जमीन से निकली खोपड़ी किसकी? धर्मस्थल में शवों को दफनाने का सच पता चल गया, होश उड़ा देगी रिपोर्ट
धर्मस्थल सीक्रेट मर्डर और शवों को दफनाने के मामले में SIT ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट पेश कर दी है। जांच में सफाईकर्मी चिन्नैया के सभी आरोप झूठे निकले हैं और इसे एक बड़ी साजिश बताया गया है।

कर्नाटक के मशहूर धार्मिक शहर धर्मस्थल में कथित 'शवों को गुप्त रूप से दफनाने' के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस सनसनीखेज मामले की जांच कर रही कर्नाटक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। 7,000 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में साफ हो गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत थे।
सफाई कर्मचारी सीएन चिन्नैया बना एकमात्र आरोपी
बुधवार को दक्षिण कन्नड़ की एक मजिस्ट्रेट अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 215 के तहत जांच पूरी होने की रिपोर्ट पेश की गई है। इस धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज होने का मतलब है कि आरोप झूठे पाए गए हैं। अब यह अदालत पर निर्भर करता है कि वह झूठे आरोप लगाने को लेकर आगे की कार्रवाई शुरू करती है या नहीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिपोर्ट में धर्मस्थल के पूर्व सफाई कर्मचारी सीएन चिन्नैया को एकमात्र आरोपी बनाया गया है। पिछले साल चिन्नैया ने दावा किया था कि उसने मंदिर शहर में दर्जनों शवों को गुप्त रूप से दफनाया था। उसने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ हत्याएं 'क्रूर तरीके से' की गई थीं और उसे जबरन शवों को ठिकाने लगाने के लिए मजबूर किया गया था।
एसआईटी ने चिन्नैया के दावों के आधार पर एक महीने से अधिक समय तक शवों की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद, झूठी जानकारी देने के आरोप में 23 अगस्त 2025 को चिन्नैया को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में सामने आया खोपड़ी का सच
मामले को सही साबित करने के लिए चिन्नैया ने जांचकर्ताओं को एक खोपड़ी भी दी थी। उसका दावा था कि यह उन गुप्त शवों में से एक का हिस्सा है जिसे उसने दफनाया था। हालांकि, एसआईटी की जांच में इस झूठ की भी पोल खुल गई। जांच में पाया गया कि यह खोपड़ी 2012 में धर्मस्थल में रेप और हत्या का शिकार हुई एक किशोर लड़की की थी, जिसे लड़की के चाचा ने चिन्नैया को दिया था। बता दें कि 2012 के उस मर्डर केस में अदालत में कोई सुबूत नहीं टिक पाया था और किसी को दोषी नहीं ठहराया गया था।
साजिश का भंडाफोड़: निशाने पर कौन था?
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, चिन्नैया एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। जांचकर्ताओं ने संकेत दिया है कि क्षेत्र के कई कार्यकर्ता- महेश थिमारोडी, जयंत टी, विट्टल गौड़ा और पूर्व पुलिस अधिकारी गिरीश मट्टनवर इस कथित भ्रामक साजिश में शामिल थे।
किसे फंसाने की थी तैयारी?
इस पूरी साजिश का मुख्य उद्देश्य श्री धर्मस्थल मंजूनाथेश्वर मंदिर ट्रस्ट के प्रशासकों और इसके 'धर्माधिकारी' वीरेंद्र हेगड़े को निशाना बनाना था। वीरेंद्र हेगड़े बीजेपी से जुड़े राज्यसभा सांसद भी हैं।
जांच की टाइमलाइन और सर्च ऑपरेशन के नतीजे
4 जुलाई 2025: चिन्नैया के आरोपों के आधार पर धर्मस्थल पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
11 जुलाई 2025: चिन्नैया ने बेलथांगडी में मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया।
19 जुलाई 2025: कर्नाटक सरकार ने डीजीपी रैंक के अधिकारी प्रणब मोहंती के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया।
सर्च ऑपरेशन में क्या मिला?
29 जुलाई 2025 से एसआईटी ने तलाशी शुरू की। चिन्नैया द्वारा बताई गई 13 जगहों में से केवल एक जगह (नेत्रावती नदी के किनारे और स्नान घाटों के पास के जंगल में) हड्डियां मिलीं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक ये अवशेष एक ऐसे व्यक्ति के थे जिसने कथित तौर पर आत्महत्या की थी। हत्या का कोई सबूत नहीं मिला। नवंबर 2025 में एसआईटी ने बेलथांगडी कोर्ट में अपनी शुरुआती रिपोर्ट दायर कर साफ कर दिया था कि चिन्नैया के दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है।
लापता छात्रा के मामले में भी नहीं हुई पुष्टि
इस जांच के दौरान, सुजाता भट नाम की एक बुजुर्ग महिला ने शिकायत की थी कि मणिपाल में मेडिकल की पढ़ाई कर रही उनकी बेटी 2003 में धर्मस्थल से लापता हो गई थी। उन्होंने बताया था कि तब स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी। एसआईटी ने प्रारंभिक जांच के बाद स्पष्ट किया है कि वे महिला के बयानों की पुष्टि नहीं कर सके हैं।


