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कौन थे निजाम उस्मान अली खान, जिन्होंने बनवाया हैदराबाद हाउस? विदेशी मेहमानों की होती है मेजबानी

कौन थे निजाम उस्मान अली खान, जिन्होंने बनवाया हैदराबाद हाउस? विदेशी मेहमानों की होती है मेजबानी

संक्षेप:

हैदराबाद हाउस का निर्माण 1926-28 के बीच पूरा हुआ। यह तितली के आकार का भव्य महल है, जिसमें 36 कमरे, चार जनाना (महिलाओं के लिए) कक्ष, आलीशान सीढ़ियां, फायरप्लेस, फव्वारे और मुगल-यूरोपीय शैली का मिश्रण है।

Dec 05, 2025 01:52 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कल यानी 4 दिसंबर की शाम से दिल्ली की हलचल भरी सड़कों पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का काफिला सरपट दौड़ रहा है। एयरपोर्ट से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ निजी डिनर, फिर आज राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर, राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि और अब हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता। यह दो दिवसीय दौरा भारत-रूस के 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा है, जहां रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर समझौते होने की उम्मीद है। लेकिन इस दौरे की खासियत सिर्फ समझौतों तक सीमित नहीं। पुतिन का स्वागत हो रहा है एक ऐसे ऐतिहासिक महल में, जो कभी हैदराबाद के आखिरी निजाम उस्मान अली खान की शाही ठाठ-बाट का प्रतीक था। आज यही हैदराबाद हाउस विदेशी मेहमानों की भव्य मेजबानी का केंद्र है, जहां मोदी-पुतिन की बैठक हो रही है।

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निजाम उस्मान अली खान: दुनिया के सबसे अमीर शासक की अनकही कहानी

मीर उस्मान अली खान, जिन्हें निजाम VII के नाम से जाना जाता है, वे ब्रिटिश भारत के सबसे धनी शासकों में शुमार थे। 1886 में हैदराबाद में जन्मे इस निजाम ने 1911 से 1948 तक हैदराबाद रियासत पर शासन किया। टाइम मैगजीन ने 1937 में उन्हें दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था - उनकी संपत्ति का अनुमान आज के मूल्य में 2 खरब डॉलर से अधिक था! हीरे-जवाहरात, सोने की ईंटें, और गोलकुंडा की खदानों से कमाई गई दौलत ने उन्हें वैभव का प्रतीक बना दिया। लेकिन निजाम सिर्फ धन-दौलत के मालिक नहीं थे; वे एक दूरदर्शी शासक भी थे।

उन्होंने हैदराबाद को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाई। उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना, उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल और कचिगुड़ा रेलवे स्टेशन जैसे निर्माण उनके नाम से जुड़े हैं। लेकिन दिल्ली से उनका नाता खास था। 1919 में ब्रिटिश सरकार ने रियासतों के शासकों को 'चैंबर ऑफ प्रिंसेस' में शामिल किया, जिसके लिए दिल्ली में रहना जरूरी हो गया। निजाम ने 1926 में अशोक रोड पर 8.2 एकड़ जमीन खरीदी - लागत लगभग 50 लाख रुपये (आज के मूल्य में सैकड़ों करोड़)। प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिन्होंने नई दिल्ली का अधिकांश डिजाइन किया था।

हैदराबाद हाउस का निर्माण 1926-28 के बीच पूरा हुआ। यह तितली के आकार का भव्य महल है, जिसमें 36 कमरे, चार जनाना (महिलाओं के लिए) कक्ष, आलीशान सीढ़ियां, फायरप्लेस, फव्वारे और मुगल-यूरोपीय शैली का मिश्रण है। ऐसा अनुमान है कि उस समय इसकी लागत लगभग 2 लाख पाउंड (आज के मूल्य में 170 करोड़ रुपये) थी। वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) के अलावा यह लुटियंस द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा राजसी महल था। लेकिन विडंबना देखिए - निजाम के बेटों को यह 'बहुत पश्चिमी' लगा, इसलिए वे शायद ही कभी यहां रुके। 1948 में ऑपरेशन पोलो के बाद हैदराबाद का भारत में विलय हो गया। निजाम ने इसे कभी-कभार इस्तेमाल किया, लेकिन 1974 में यह विदेश मंत्रालय के अधीन आ गया। आज यह प्रधानमंत्री का स्टेट गेस्ट हाउस है।

भारत की कूटनीतिक राजधानी का केंद्र

यह हाउस आज भारत की कूटनीतिक राजधानी का केंद्र है, जहां दुनिया के सबसे महान नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज की है। अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश, बराक ओबामा ने यहां द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से वैश्विक साझेदारी को मजबूत किया, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी कई यात्राओं में रक्षा और ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो भारत-रूस संबंधों की नींव हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन तथा थेरेसा मे ने व्यापारिक समझौतों को आकार दिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन जैसे अन्य महान हस्तियां भी यहां मेजबान बनीं। कुल मिलाकर भारत के राजकीय दौरे पर आए लगभग सभी विदेशी मेहमानों की यहां मेजबानी हुई है। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी ने भी नवंबर 1983 में ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का हैदराबाद हाउस में भव्य स्वागत किया था, जहां दोनों ने न केवल राजकीय भोज में हिस्सा लिया बल्कि कॉमनवेल्थ शिखर सम्मेलन के दौरान गोपनीय वार्ताएं भी कीं।

निजाम उस्मान अली खान की बात करें तो उनकी विरासत सिर्फ इमारतों तक नहीं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कला को बढ़ावा दिया। 1967 में उनका निधन हुआ, लेकिन हैदराबाद हाउस आज भी उनकी भव्यता की गवाही देता है - एक शाही निवास से कूटनीतिक मंच तक का सफर।

पुतिन का भारत दौरा: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा 2021 के बाद भारत का पहला दौरा है। यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक दबावों के बीच यह यात्रा रूस की अलगाव की नीति को तोड़ने का संकेत है। 4 दिसंबर की शाम पलम एयरपोर्ट पर उतरते ही प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया – गले मिलना, हाथ पकड़ना, और एक ही कार में सवार होकर 7, लोक कल्याण मार्ग पर निजी डिनर।

आज सुबह 11 बजे पुतिन को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात हुई। फिर राजघाट पर गांधीजी को श्रद्धांजलि देते हुए पुतिन ने फूल चढ़ाए। इसके बाद हैदराबाद हाउस पहुंचे, जहां मोदी ने उनका स्वागत किया।

भारत-रूस संबंध: इतिहास से वर्तमान तक

भारत और रूस (पूर्व सोवियत संघ) की दोस्ती 1947 से चली आ रही है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत वीटो ने भारत का साथ दिया। आज यह 'स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' है। पुतिन के पिछले दौरे (2000, 2004, आदि) ने इसे मजबूत किया। लेकिन यूक्रेन संकट के बाद भारत ने संतुलन बनाए रखा यानी रूसी तेल खरीदना जारी, लेकिन पश्चिमी दबावों का विरोध। इस दौरे ने साबित किया कि दोनों देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

विरासत और भविष्य: हैदराबाद हाउस की प्रासंगिकता

पुतिन के दौरे ने हैदराबाद हाउस को फिर से सुर्खियों में ला दिया। निजाम उस्मान अली खान की यह देन आज भारत की 'सॉफ्ट पावर' का प्रतीक है। जहां कभी शाही साज-सज्जा हुआ करती थी, वहां अब वैश्विक नेता फैसले लेते हैं।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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