प्रोड्यूसर से लेकर कैमरामैन तक, विजय की सरकार चला रहे ये 5 लोग! तमिलनाडु में बड़ा भूचाल
तमिलनाडु के सीएम विजय के 'इनर सर्कल' पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। डीएमके ने सीक्रेट बैठकों में फिल्म जगत के करीबियों के शामिल होने पर FIR की मांग की है। जानें क्या है ये पूरा विवाद।

तमिलनाडु में इस समय बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ा है। राज्य के मंत्री एवं टीवीके नेता आर. निर्मल कुमार ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेतृत्व पर उनकी पार्टी के विधायकों को लुभाने के लिए खरीद-फरोख्त के प्रयास का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इस विवाद के इतर सभी की नजरें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर हैं।
मुख्यमंत्री विजय थलापति के इर्द-गिर्द भी ऐसे लोगों का एक समूह है, जिसमें राजनीतिक रणनीतिकार, फिल्म मैनेजर, पत्रकार और उनके बिजनेस से जुड़े पुराने वफादार शामिल हैं। सीएम विजय को अपनी सिनेमाई और निजी दुनिया के लोगों पर भरोसा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन टीवीके सरकार के सामने अब एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि अगर ये लोग सरकारी कामकाज में दखल रखते हैं, तो जनता को इनके बारे में इंस्टाग्राम पोस्ट या विपक्ष की शिकायतों के जरिए क्यों पता चल रहा है?
डीएमके ने क्यों की FIR की मांग?
इस पूरे मामले में मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और गंभीर आरोप लगाए हैं। डीएमके के संगठन सचिव आर. एस. भारती ने 30 जून को डीजीपी को शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि राजनीतिक रणनीतिकार जॉन अरोकियासामी और विजय के करीबी सहयोगी विष्णु रेड्डी कैबिनेट और अन्य गोपनीय सरकारी बैठकों में शामिल हो रहे हैं।
डीएमके का कहना है कि यह 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट' का उल्लंघन है, क्योंकि सीएम विजय गोपनीय सरकारी कार्यवाही को सुरक्षित रखने के लिए अपनी शपथ से बंधे हैं। डीएमके सांसद पी. विल्सन ने भी सवाल उठाया है कि जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, वे ऐसी बैठकों में कैसे शामिल हो सकते हैं जहां गुप्त दस्तावेज साझा किए जाते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों को सीएम कार्यालय के पास अलग से केबिन भी दिए गए हैं।
टीवीके सरकार का क्या है बचाव?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन आरोपों पर टीवीके के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि विपक्ष के दावे बेबुनियाद हैं। उनका तर्क है कि अरोकियासामी और रेड्डी को अहम बैठकों का हिस्सा बनने के लिए आवश्यक सरकारी आदेश जारी किए जा चुके हैं। एक नेता के मुताबिक, "वे अब प्राइवेट व्यक्ति नहीं हैं, बस इन जानकारियों का सार्वजनिक तौर पर प्रचार नहीं किया गया है।" हालांकि, इससे यह सवाल उठने लगा है कि अगर इन नियुक्तियों (कुछ कैबिनेट रैंक के साथ) के आदेश मौजूद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक कर पूरी पारदर्शिता क्यों नहीं बरती गई?
इंस्टाग्राम से हो रहे सरकारी पदों के खुलासे
विवाद सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं है। सीएम विजय के लंबे समय तक मैनेजर रहे जगदीश पलानीसामी ने 22 जून को विजय को जन्मदिन की बधाई देते हुए एक इंस्टाग्राम पोस्ट किया था। इसी पोस्ट में उन्होंने खुलासा किया कि अब वे "माननीय मुख्यमंत्री के निजी सचिव" बन गए हैं। एक टीवीके नेता ने बताया कि यह नियुक्ति चार दिन पहले ही हो चुकी थी, लेकिन जगदीश ने मुख्यमंत्री से अपनी नजदीकी का फायदा उठाते हुए इस खबर की घोषणा खुद ही कर दी।
फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को मिल रहे अहम पद
इस नई सरकार में फिल्म जगत के लोगों को भी बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। बेंगलुरु स्थित केवीएन ग्रुप के चेयरमैन और विजय की अनरिलीज्ड फिल्म 'जननायक' के प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है, जो कि कैबिनेट रैंक का पद है।
मशहूर सिनेमैटोग्राफर मनोज परमहंस, जिन्होंने विजय की कई फिल्में शूट की हैं, उन्हें 'तमिलनाडु सरकार एमजीआर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट' का प्रमुख बनाया गया है। सीएम विजय के समर्थकों का तर्क है कि फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों के पास शानदार मैनेजमेंट स्किल्स होती हैं, जो राजनीति और शासन में बेहद काम आ सकती हैं।
पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे 5 खास लोग
सीएम विजय के खेमे के सूत्रों के अनुसार, पांच व्यक्ति ऐसे हैं जो अनौपचारिक रूप से अहम सलाह और राजनीतिक रणनीतियां तय करने में मुख्यमंत्री की मदद कर रहे हैं।
- इनमें से एक व्यक्ति विष्णु रेड्डी का रिश्तेदार है, जो कभी डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के काफी करीब था और अब विजय के 'इनर सर्कल' में है।
- कुछ पत्रकार (जिनमें एक तमिल मैगजीन के पूर्व संपादक भी शामिल हैं) बिना किसी आधिकारिक पद के ट्रांसफर और प्रशासनिक तालमेल जैसे मामलों में सरकार को सलाह दे रहे हैं।
- इसके अलावा, विजय के एक भरोसेमंद पूर्व प्रोडक्शन कंट्रोलर (PRO) और डीएमके गठबंधन से दो बार चुने गए लेफ्ट पार्टी के एक सांसद भी इस टीम का हिस्सा हैं।
पारदर्शिता पर उठते सवाल
सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि मामला सिर्फ भरोसे का नहीं, बल्कि पारदर्शिता की कमी का है। एक वरिष्ठ सरकारी सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अगर इन सलाहकारों के पास अधिकार है, तो आदेश प्रकाशित करें। अगर कोई आपका निजी सचिव है, तो इंस्टाग्राम से पहले सरकार को यह बताना चाहिए। सत्ता की शुरुआत भले ही भरोसे से होती हो, लेकिन उसकी वैधता पारदर्शिता से ही साबित होती है।"
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