EXPLAINER: 33 साल पहले यूथ कांग्रेस पर किसने चलवाईं गोलियां, शुभेंदु अधिकारी ने दबी रिपोर्ट निकाली
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती TMC यानी तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 12 वर्षों तक आयोग की रिपोर्ट को दबाए रखा और इस त्रासदी का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 21 जुलाई 1993 की गोलीबारी की घटना की 33वीं बरसी से पहले न्यायाधीश सुशांत चट्टोपाध्याय आयोग की लंबे समय से लंबित रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा में पेश की। अधिकारी ने इस रिपोर्ट के नतीजों को राज्य की सबसे विवादित राजनीतिक घटनाओं में से एक के पीछे की सच्चाई का पता लगाने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
विधानसभा अध्यक्ष के सामने रिपोर्ट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि युवा कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी को सही नहीं ठहराया जा सकता और गोलीबारी में हुई मौतों को कानूनी रूप से जायज नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि गोलीबारी तत्कालीन गृह सचिव मनीष गुप्ता के आदेश पर की गई थी।
ममता बनर्जी से नहीं हुई पूछताछ
उन्होंने दावा किया कि आयोग को जानलेवा बल के इस्तेमाल को सही ठहराने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला और पाया कि गोलीबारी बिना किसी ठोस उकसावे के और आसन्न खतरे के बजाय केवल खतरे की आशंका के आधार पर की गई थी। मुख्यमंत्री ने आयोग द्वारा पूछताछ किए गए गवाहों की सूची भी जारी की। उन्होंने बताया कि हालांकि 44 लोगों को बुलाया गया था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन्होंने 21 जुलाई, 1993 को यूथ कांग्रेस के मार्च का नेतृत्व किया था और लंबे समय से खुद को इस घटना का मुख्य गवाह बताती रही हैं से आयोग ने पूछताछ नहीं की।
अधिकारी ने बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 21 जुलाई के शहीदों की याद का इस्तेमाल राजनीतिक और निजी फायदे के लिए किया गया, जबकि पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता की भूमिका को जानबूझकर छिपाया गया।
उन्होंने कहा, '21 जुलाई की घटना का फायदा कई लोगों ने उठाया। कुछ लोगों को राजनीतिक पद मिले, तो कुछ ने सत्ता के फायदों का आनंद लिया। कुछ लोगों ने चार्टर्ड फ्लाइट से यात्रा की, अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स में इलाज करवाया या हरीश चटर्जी स्ट्रीट और हरीश मुखर्जी स्ट्रीट पर बड़ी-बड़ी संपत्तियां बनाईं। फिर भी पश्चिम बंगाल के लोगों को आज भी नहीं पता कि 21 जुलाई को असल में क्या हुआ था, पुलिस ने गोली क्यों चलाई या गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।' अधिकारी ने सवाल उठाया कि उन्हें क्यों नहीं बुलाया गया और कहा कि इस चूक के लिए स्पष्टीकरण की जरूरत है।
क्या हुआ था 21 जुलाई को
21 जुलाई की घटना तब हुई थी जब युवा कांग्रेस वोटर पहचान पत्र लागू करने की मांग को लेकर राइटर्स बिल्डिंग तक मार्च कर रही थी। झड़प के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, जिसमें युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता मारे गए। बाद में यह घटना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक अहम राजनीतिक प्रतीक बन गई।
2011 में सत्ता में आने के बाद तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने गोलीबारी की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशांत चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया। हालांकि आयोग ने अपनी रिपोर्ट कई साल पहले ही सौंप दी थी, लेकिन सोमवार तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था। रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिकारी ने कहा कि आयोग ने शुरुआती जांच की पर्याप्तता पर सवाल उठाए और पाया कि कई जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
कागज हुए गायब!
उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निश्चित तौर पर तय नहीं किया जा सका कि आखिर पुलिस गोलीबारी का आदेश किसने दिया था और साथ ही 'राइटर्स बिल्डिंग' से जरूरी दस्तावेज गायब होने पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1993 की घटना में नाम आने के बावजूद बाद में मनीष गुप्ता को तृणमूल कांग्रेस सरकार में शामिल किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि राजनीतिक कारणों से रिपोर्ट जारी करने में देरी हुई।
अधिकारी ने घोषणा की कि अगर मारे गए या घायल लोगों के परिवार आयोग की रिपोर्ट में नामजद किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज कराना चाहते हैं, तो राज्य सरकार इसमें कानूनी मदद देगी। उन्होंने विधानसभा को यह भी भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक मदद देने के अनुरोधों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
बागी गुट खुश
तृणमूल (ऋतब्रत गुट) के विधायक मदन मित्रा ने रिपोर्ट जारी होने का स्वागत किया और मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया कि उन्होंने एक 'दबे हुए मुद्दे' को फिर से सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाया। उन्होंने सरकार से इस मामले पर श्वेत पत्र जारी करने और संबंधित जानकारी रखने वाले नागरिकों से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के सामने रखने का मकसद पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जनता को जांच के नतीजों की समीक्षा करने का मौका देना था।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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