कौन हैं TMC नेता स्वप्ना बर्मन, राजनीति के लिए रेलवे जॉब छोड़ी; अब चुनाव हारकर पछता रहीं
स्वप्ना बर्मन ने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित साल 2018 के एशियाई खेलों में महिलाओं की 'हेप्टाथलॉन' प्रतियोगिता में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता और यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय 'हेप्टाथलीट' बन गईं।

एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल विजेता स्वप्ना बर्मन के घर पर आग लगने से राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं पर घटना को अंजाम देने के आरोप लगाए हैं। वहीं, भाजपा ने इसे पारिवारिक विवाद बताया है। खबरें हैं कि इस घटना के बाद से ही एथलीट राजनीति में आने के अपने फैसले पर अफसोस करती नजर आ रहीं हैं।
राजनीति में दर्द
टेलीग्राफ के अनुसार, उन्होंने कहा, 'परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं।' उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता था कि राजनीति में इतना दर्द है। नहीं तो मैं राजनीति में आती ही नहीं।' रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चुनावी हार के बाद कुछ रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने उनसे दूरी बना ली है।
उन्होंने भविष्य को लेकर कहा, 'मैं हमेशा स्पोर्ट्स में रही हूं, लेकिन राजनीति अलग है। मुझे पता है कि कैसे संघर्ष करना है और सफल बनना है। मुझे सोचने दीजिए कि आने वाले दिनों में क्या करूंगी।' रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि खिलाड़ी आग की घटना के बाद से ही पार्टी से जुड़ी गतिविधियों से दूर रही हैं। कुछ टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि स्वप्ना उनके फोन का जवाब नहीं दे रही हैं।
कौन हैं स्वप्ना बर्मन
बर्मन ने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित 2018 एशियाई खेलों में महिलाओं की 'हेप्टाथलॉन' प्रतियोगिता में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता और यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय 'हेप्टाथलीट' बन गईं। वह इस साल 27 फरवरी को टीएमसी में शामिल हुई थीं। उन्होंने जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के दिनेश सरकार ने उन्हें 21,000 से अधिक मतों के अंतर से हरा दिया।
रेलवे की नौकरी भी गंवाई
राजबंशी समुदाय से संबंध रखने वाली एथलीट अलीपुरद्वार मंडल में उत्तर सीमांत रेलवे की पूर्व कर्मचारी थीं। आधिकारिक रूप से इस्तीफा दिए बिना टीएमसी में शामिल होने के कारण उन्हें सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। अब कहा जा रहा है कि इस चुनावी हार के बाद वह आर्थिक तंगी का भी शिकार हो सकती हैं। हालांकि, इसे लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा है।
स्वप्ना बर्मन के घर में आग की घटना
बर्मन के पुराने घर में शुक्रवार को लगी आग ने बंगाल के जलपाईगुड़ी में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उन्होंने इस संबंध में शनिवार को पश्चिम बंगाल पुलिस के कोतवाली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। एजेंसी वार्ता के अनुसार, आग लगने की घटना के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में उनके घर को निशाना बनाया गया। हालांकि स्थानीय निवासियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया और दावा किया कि उनकी चुनावी हार के बाद इस घटना का राजनीतिकरण किया जा रहा है।
पारिवारिक विवाद?
एजेंसी के मुताबिक, कुछ निवासियों ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान बर्मन और उनके परिवार के सदस्यों ने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग किया और ग्रामीणों को डराया-धमकाया। राजगंज के भाजपा विधायक दिनेश सरकार ने कहा, 'जितनी भी जानकारी मैंने जुटाई है उससे लगता है कि यह घटना पारिवारिक विवाद से जुड़ी है। मुझे नहीं लगता कि भाजपा कार्यकर्ता इसमें किसी भी तरह से शामिल हैं।'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद तृणमूल कांग्रेस में तनाव को दर्शाता है। खबरों के अनुसार, स्वप्ना बर्मन को राजगंज से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही पार्टी में असंतोष व्याप्त था खासकर तब से जब चार बार के विधायक खागेश्वर बर्मन को पार्टी का टिकट नहीं दिया गया।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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