नीरव-माल्या की नींद उड़ाने वाले ED अफसर ने लिया VRS, 11 साल पहले ही क्यों छोड़ दी नौकरी?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चोकसी और महादेव बेटिंग ऐप जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच करने वाले पूर्व ED अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। जानिए उनका पूरा करियर और इस फैसले के मायने।

नीरव-माल्या की नींद उड़ाने वाले ED अफसर ने लिया VRS, 11 साल पहले ही क्यों छोड़ दी नौकरी?

नीरव मोदी, विजय माल्या और महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप जैसे हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच करने वाले पूर्व ईडी (ED) विशेष निदेशक सत्यव्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। सत्यब्रत कुमार पिछले एक साल से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर तैनात थे। करीब एक साल पहले ही उन्हें ईडी से वापस उनके मूल विभाग में भेजा गया था।

कौन हैं सत्यब्रत कुमार?

सत्यब्रत कुमार 2004 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं। वे सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर कैडर से हैं। उन्होंने करीब 12 वर्षों तक प्रवर्तन निदेशालय में काम किया और एजेंसी के सबसे लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे। ED में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बहुचर्चित आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच का नेतृत्व किया। बाद में उन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया था, जहां वे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर तैनात थे।

11 साल पहले क्यों छोड़ी नौकरी?

अधिकारियों के मुताबिक, 48 वर्षीय सत्यव्रत कुमार को केंद्र सरकार ने अप्रैल में वीआरएस के लिए मंजूरी दे दी थी। इसके औपचारिक आदेश इसी महीने जारी किए गए हैं। कुमार की रिटायरमेंट 2037 में होने वाली थी, यानी उन्होंने अपनी तय सेवानिवृत्ति (60 वर्ष की आयु) से करीब 11 साल पहले ही सरकारी सेवा छोड़ दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई के सूत्रों के अनुसार, कुमार ने अपने व्यक्तिगत कार्यों और निजी रुचियों को समय देने के लिए यह कदम उठाया है।

ईडी में 12 साल का लंबा कार्यकाल और बड़े केस

सत्यव्रत कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) में करीब 12 वर्षों तक काम किया। वह एजेंसी में प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) पर सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों में से एक थे। मुंबई स्थित ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख के तौर पर उन्होंने कई बड़े मामलों का नेतृत्व किया:

पीएनबी बैंक धोखाधड़ी: डायमंड कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़ा 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का बैंक फ्रॉड मामला। इस केस में करोड़ों रुपये की विदेशी संपत्तियों को कुर्क करने में उनकी अहम भूमिका रही।

बैंक लोन फ्रॉड: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या का बैंक लोन धोखाधड़ी केस।

महादेव बेटिंग ऐप: सट्टेबाजी से जुड़ा यह बड़ा मामला, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई राजनेताओं और व्यवसायियों के तार जुड़े पाए गए थे।

अन्य संवेदनशील मामले: महाराष्ट्र के कई राजनेताओं से जुड़े संवेदनशील मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी कुमार के नेतृत्व में हुई।

एक साल से कम समय में दूसरे अधिकारी का इस्तीफा

यह पिछले एक साल से भी कम समय में दूसरा मौका है, जब ईडी से हटने के तुरंत बाद किसी अधिकारी ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया है।

इससे पहले जुलाई 2025 में पूर्व ईडी संयुक्त निदेशक कपिल राज ने भी अपनी रिटायरमेंट से 15 साल पहले इस्तीफा दे दिया था।

2009 बैच के आईआरएस अधिकारी कपिल राज ने अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में दो मुख्यमंत्रियों- हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का पर्यवेक्षण किया था। कपिल ने ईडी में 8 साल तक काम किया था और इस्तीफा देते वक्त वह दिल्ली में जीएसटी इंटेलिजेंस विंग में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात थे।

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Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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