ममता बनर्जी खुद नहीं लड़ रहीं चुनाव, इन्हें उतारा; कौन हैं संचिता प्रधान डे?
नंदीग्राम उपचुनाव ममता बनर्जी नहीं लड़ रहीं हैं, यह बात रविवार को साफ हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने संचिता प्रधान डे को सीट से उम्मीदवार बनाया है। पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि ममता बनर्जी खुद ही यहां से चुनाव लड़ सकती हैं।

नंदीग्राम उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे होंगी। इस ऐलान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बात साफ कर दी है कि 15 सालों में पहली बार ममता बनर्जी विधानसभा से बाहर होंगी। अटकलें थीं कि वह उपचुनाव लड़ सकती हैं। खास बात है कि ऋताब्रत बनर्जी गुट ने तो चुनौती दी थी कि अगर बनर्जी खुद चुनाव लड़ती हैं, तो उनकी तरफ से उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार को बागी गुट भी नामों का ऐलान कर सकता है।
कौन हैं संचिता प्रधान डे
पार्टी ने इस हाई प्रोफाइल सीट के लिए संचिता प्रधान डे पर भरोसा जताया है। हालांकि, उनके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह साल 2023 में पंचायत चुनाव लड़ चुकी हैं और नंदीग्राम 2 से पंचायत समिति का चुनाव भी हार चुकी हैं। वहीं, रेजीनगर सीट से पार्टी ने रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।
अखिल गिरी का नाम था तय?
अटकलें ये भी हैं कि इससे पहले टीएमसी ने वरिष्ठ नेता अखिल गिरी से संपर्क साधा था। टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में टीएमसी के एक नेता के हवाले से बताया गया है कि ममता बनर्जी ने फोन पर गिरी से बात की थी और शनिवार को कालीघाट आवास पर मिलने के लिए भी बुलाया था। तब से अटकलों का दौर शुरू हो गया था कि गिरी पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, गिरी ने कहा कि बनर्जी ने सीट पर उपचुनाव को लेकर उनकी राय मांगी थी। खास बात है कि उन्होंने यह भी कहा कि जानकारी व्हाट्सएप पर भेज दी थी। उन्होंने कहा था, 'मैं पार्टी का एक सच्चा सिपाही हूं। अगर पार्टी मुझे कोई भी जिम्मेदारी देती है, तो मैं उसे पूरा करूंगा।' उन्होंने यह भी बताया है कि अंतिम फैसला बनर्जी के हाथ में है।
नंदीग्राम क्यों है टीएमसी के लिए खास
साल 2007 में आंदोलन हुआ, जिसके 4 साल बाद ही टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल कर ली थी। इस आंदोलन में ममता बनर्जी प्रमुख रूप से नजर आईं थीं। खास बात है कि इसके साथ ही पार्टी ने 3 दशक से ज्यादा समय से चल रहे वाम शासन को भी राज्य में खत्म कर दिया था। हालांकि, यह पहला मौका है कि टीएमसी सत्ता से बाहर हुई है और भारतीय जनता पार्टी राज्य सरकार चला रही है।
ममता बनर्जी राजनीति से होंगी दूर?
ममता बनर्जी 2011 से लेकर अब तक बंगाल विधानसभा में सत्तापक्ष की आवाज रहीं हैं। अब 15 साल बाद यह सिलसिला खत्म होने की कगार पर है। वजह है कि उन्होंने नंदीग्राम सीट पर इस उपचुनाव से भी दूरी बना ली है। खास बात है कि 2021 में उन्हें इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन वह भवानीपुर उपचुनाव जीतकर राज्य की मुख्यमंत्री बनी थीं।
इससे पहले 2011 में भी उन्होंने भवानीपुर से उपचुनाव जीता था। बागी गुट तो यह दावा कर रहा है कि बनर्जी कभी भी सीधा चुनाव नहीं जीती हैं और हमेशा उपचुनाव से सत्ता में रहीं हैं।


