Explainer: 'गोल्ड किंग' पर 15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप, 99% फर्जी कमाई? कौन हैं राजेश मेहता
Rajesh Exports Scam: सोने का बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले राजेश मेहता पर SEBI ने 15 लाख करोड़ रुपये की अकाउंटिंग धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। जानें कौन हैं राजेश मेहता, क्या हैं आरोप और कंपनी ने इस पर क्या सफाई दी है। पूरी डिटेल।

Rajesh Exports Scam: बाजार नियामक सेबी (SEBI) के एक हालिया अंतरिम आदेश ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार में भूचाल ला दिया है। सोने की रिफाइनिंग और आभूषण निर्माण के क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 'राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड' (REL) और इसके प्रमोटर राजेश मेहता पर 15.15 लाख करोड़ रुपये (लगभग 158 अरब डॉलर) की वित्तीय हेराफेरी का आरोप लगा है। इस भारी-भरकम आंकड़े के कारण ही इसकी तुलना भारत के कई वर्षों के रक्षा बजट से की जा रही है और इसे इतिहास के सबसे बड़े कथित एकाउंटिंग घोटालों में से एक माना जा रहा है।
फर्श से अर्श तक का सफर: कौन हैं राजेश मेहता?
राजेश मेहता 1995 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई कंपनी 'राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड' के संस्थापक और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। राजेश मेहता को दशकों तक एक ऐसे कामयाब उद्यमी के तौर पर देखा जाता रहा, जिन्होंने अपने छोटे से पारिवारिक बिजनेस को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्टिंग कंपनियों में से एक बना दिया। लेकिन अब उनकी कंपनी 'राजेश एक्सपोर्ट्स' बाजार नियामक सेबी (SEBI) की रडार पर है।
बेंगलुरु में जन्मे राजेश मेहता एक जैन कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज से हुई है। साल 1988 में वह अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ पारिवारिक रिटेल ज्वेलरी बिजनेस से जुड़े। महज दो साल के भीतर ही दोनों भाइयों ने देश की पहली 'ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी' शुरू कर दी। 1991 में उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर खोला और 1994 तक राजेश एक्सपोर्ट्स देश की सबसे बड़ी गोल्ड ज्वेलरी निर्यातक और थोक विक्रेता कंपनी बन गई।
साल 2015 में राजेश मेहता के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आया, जब उन्होंने स्विस रिफाइनरी 'वालकाम्बी' (Valcambi) का अधिग्रहण किया। इस डील ने उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग फैसिलिटी का कंट्रोल दे दिया। कंपनी अपनी वेबसाइट पर दावा करती है कि वह दुनिया के कुल सोने के उत्पादन का 35% प्रोसेस करती है और भारत की लीडिंग गोल्ड निर्यातक है।
SEBI ने आखिर क्या लगाए हैं आरोप?
सेबी ने बुधवार को जारी अपने एक अंतरिम आदेश में आरोप लगाया है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कमाई को लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। नियामक के मुताबिक, कंपनी की सब्सिडियरी कंपनियों द्वारा रिपोर्ट की गई कमाई का लगभग 99.8% हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो सकता है। 97 से 99% रेवेन्यू का स्वतंत्र रूप से सत्यापन (वेरीफाई) नहीं किया जा सका, क्योंकि ये विदेशी संस्थाओं के लेन-देन से जुड़े थे।
इन आरोपों के बाद सेबी ने जांच पूरी होने तक राजेश मेहता के राजेश एक्सपोर्ट्स की सिक्योरिटीज खरीदने, बेचने या डील करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कंपनी की किताबों (खातों) और लेन-देन के लिए नए सिरे से फोरेंसिक ऑडिट का भी आदेश दिया गया है। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने विदेशी सब्सिडियरीज के नाम पर पिछले पांच वर्षों में 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। आसान शब्दों में, कंपनी की 99.80% विदेशी कमाई केवल कागजों पर थी, जिसका कोई ठोस व्यावसायिक आधार जांच में नहीं मिला।
निजी ट्रेडिंग के लिए शेल खातों का इस्तेमाल
जांच में अहमदाबाद की एक छोटी ब्रोकिंग फर्म 'एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स प्राइवेट लिमिटेड' का नाम प्रमुखता से उभरा है। कंपनी ने कागजों पर दिखाया कि उसने एफ्लुएंस के साथ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीदारी की। चौंकाने वाली बात यह है कि GST रिकॉर्ड्स में इन दोनों के बीच ऐसा कोई लेनदेन दर्ज नहीं है। एफ्लुएंस के प्रमोटर ने भी इस तरह के व्यावसायिक लेनदेन से साफ इनकार किया है।
सेबी का दावा है कि ये 11,400 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी अकाउंटिंग एंट्रीज सिर्फ कंपनी का टर्नओवर फुलाने और राजेश मेहता की निजी डेरिवेटिव ट्रेडिंग (शेयर सट्टेबाजी) को छिपाने के लिए की गईं। बिना बोर्ड या ऑडिट कमिटी की मंजूरी के कंपनी के 338.90 करोड़ रुपये राजेश मेहता से जुड़े निजी खातों में भेजे गए, ताकि उनके निजी ट्रेडिंग लॉस (करीब 3.50 करोड़ रुपये) की भरपाई की जा सके।
कंपनी ने दी सफाई, शेयर धड़ाम
सेबी की इस कार्रवाई के बाद गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5% की गिरावट दर्ज की गई। आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि उनके द्वारा दी गई रेवेन्यू की जानकारी बिल्कुल सही है। कंपनी ने सफाई दी कि सेबी को 'गलतफहमी' हुई है। कंपनी के मुताबिक, सेबी ने वालकाम्बी (Valcambi) के 'EBITDA' (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) को ही रेवेन्यू समझ लिया है, जिस वजह से 97% के अंतर की बात सामने आ रही है। कंपनी ने इसे 'कम्युनिकेशन गैप' बताया है और कहा है कि वे सेबी के साथ पूरा सहयोग करते हुए सभी जरूरी दस्तावेज सौंपेंगे।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर उठ रहे सवाल
राजेश एक्सपोर्ट्स के टर्नओवर तो हमेशा से बड़े रहे हैं, लेकिन मुनाफा (प्रॉफिट मार्जिन) बेहद कम रहा है। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का टर्नओवर 9,188.8 करोड़ रुपये था, लेकिन नेट प्रॉफिट मात्र 32.09 करोड़ रुपये रहा। इस खुलासे के बाद कंपनी के ऑडिटर्स और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 54.55% है। वहीं, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने भी पिछले 10 सालों में लगातार अपना निवेश बढ़ाया है और अब उसकी हिस्सेदारी 10.80% है। शेयर बाजार के विशेषज्ञ अब इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या बड़े निवेशकों ने कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की पर्याप्त जांच नहीं की थी।
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लेखक के बारे में
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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