
कौन हैं प्रतीक जैन? जिन पर ED की रेड पड़ते ही आगबबूला हो गईं CM ममता बनर्जी
Pratik Jain ED Raid: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और आधिकारिक काफिले के साथ जैन के आवास पर पहुंचकर छापेमारी को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया।
Pratik Jain ED Raid: आगामी कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले वहां का सियासी तापमान चढ़ चुका है। गुरुवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इससे राज्य में सियासी हंगामा मच गया है। ईडी की टीम जैसे ही सुबह-सुबह कोलकाता के साल्ट लेक इलाके के सेक्टर-V में स्थित गोदरेज वाटसाइड बिल्डिंग में फर्म के दफ्तर पर छापेमारी करने पहुंची, उसके कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उस दफ्तर में पहुंच गईं। ममता ने ईडी की इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और ईडी की मंशा पर कई गंभीर सवाल उठाए।
दूसरी तरफ ईडी के आधिकारिक सूत्रों ने इस छापेमारी पर सपाई देते हुए कहा है कि करोड़ों रुपये के कोयले के कथित अवैध खनन और तस्करी मामले में धन शोधन जांच के तहत यह कार्रवाई की गई है। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में संघीय जांच एजेंसी द्वारा सुबह सात बजे से लगभग 10 परिसरों पर छापेमारी शुरू की गई। इनमें साल्ट लेक स्थित आई-पैक का कार्यालय और लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन का घर भी शामिल है। इन 10 परिसरों में चार दिल्ली में हैं।
कौन हैं प्रतीक जैन?
प्रतीक जैन आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र हैं। वह ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। वह भी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की तरह चुनावी रणनीति के दिग्गज माने जाते हैं। पीके के आई-पैक हटने के बाद से ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन कंपनी के डायरेक्टर बन गए थे। जैन पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं।
जैन ने प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे (IIT-B) से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मटीरियल साइंस में इंजीनियरिंग की, जिसके दौरान उन्होंने एक्सिस म्यूचुअल फंड में इंटर्नशिप की। इंजीनियरिंग के बाद, 2012 में जैन ने डेलॉइट में एक एनालिस्ट के तौर पर काम किया, जिसके बाद वह 'सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस' के फाउंडिंग मेंबर बने। यह एक "नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है जिसका विजन भारत में जवाबदेह शासन को और मजबूत करना है", जैसा कि इसके लिंक्डइन पर बताया गया है, जो आखिरकार I-PAC में बदल गया।
ईडी का दावा- कोयला व्यापार के लाभार्थी हैं
ईडी अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कोयला ‘घोटाले’ से जुड़े कुछ हवाला लेनदेन और नकद लेनदेन के संबंध में जैन के खिलाफ ‘विशिष्ट’ साक्ष्य हैं और इसी के संबंध में उनके टिकानों पर छापेमारी की गई है। ईडी का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी से उपजा है, जिसमें बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स की खदानों से संबंधित कई करोड़ रुपये के कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था। स्थानीय कोयला व्यापारी अनूप मांझी उर्फ लाला इस मामले में मुख्य संदिग्ध है। ईडी ने इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की थी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। ईडी ने दावा किया कि अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त धन के वह लाभार्थी हैं।
छापेमारी से क्यों आगबबूला हुईं ममता बनर्जी?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और आधिकारिक काफिले के साथ जैन के आवास पर पहुंचकर छापेमारी को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया। बनर्जी ने कहा, ‘‘उन्होंने हमारे आईटी प्रमुख के आवास पर छापा मारा है। वे मेरी पार्टी के दस्तावेज़ और हार्ड डिस्क ज़ब्त कर रहे हैं, जिनमें विधानसभा चुनावों के लिए हमारे उम्मीदवारों का विवरण है। मैंने उन्हें वापस ले लिया है।’’ उन्होंने ईडी पर अपनी पार्टी TMC की हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, उम्मीदवारों की सूची और आंतरिक रणनीति संबंधी दस्तावेज़ों को भी ले जाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या किसी राजनीतिक दल का डेटा इकट्ठा करना ईडी का काम है?’’
ईडी का क्या कहना?
उधर, ईडी सूत्रों ने कहा कि यह कार्रवाई ‘‘पूरी तरह से कोयला घोटाला मामले और उससे जुड़े अपराध से अर्जित आय के आधार पर की गई है और इसमें कोई राजनीतिक पहलू नहीं है।’’ ईडी अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसी जैन और कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता दर्शाने वाले ‘विशिष्ट’ साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान चला रहे अधिकारी विशिष्ट कंप्यूटर उपकरण और दस्तावेज़ ज़ब्त कर रहे हैं।

ईडी की कार्रवाई पर आई-पैक की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। बता दें कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आई-पैक की स्थापना की थी। बाद में उन्होंने जन सुराज नामक एक राजनीतिक दल बनाया, जिसे पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनावों में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। इस परामर्श फर्म ने 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम किया था। 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की बड़ी जीत का श्रेय I-PAC को दिया जाता है। तृणमूल और पश्चिम बंगाल सरकार के लिए 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित एक टैब आई-पैक की वेबसाइट पर साझा किया गया है, जिसका शीर्षक है 'दीदी-आर 10 ओंगीकर'। वेबसाइट के अनुसार, आई-पैक ऐसे ‘दूरदर्शी’ नेताओं के साथ काम करता है जिनका ‘सिद्ध’ ट्रैक रिकॉर्ड है।





