'मुझे कश्मीर जाना है', 'पाकिस्तान समर्थक' काजी ने मांगी इजाजत, SC ने सरकार को भेजा नोटिस
82 वर्षीय OCI कार्डधारक खालिद जहांगीर काजी कश्मीर में रिश्तेदारों की शादी में शामिल होने की अनुमति चाहते हैं। अलगाववाद और पाकिस्तान समर्थक प्रचार के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

अमेरिका में रहने वाले 82 वर्षीय डॉक्टर खालिद जहांगीर काजी ने कश्मीर जाने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। काजी भारतीय मूल के विदेशी नागरिक (OCI) कार्डधारक हैं और भारत सरकार ने उन पर पाकिस्तान समर्थक प्रचार करने और कश्मीरी अलगाववादियों के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगाया है। वह अपनी बहन के परिवार में होने वाले शादी समारोहों में शामिल होने के लिए कश्मीर जाना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को काजी की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
काजी के वकील ने क्या कहा?
काजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने कहा कि 82 वर्षीय डॉक्टर पहले भी भारत आ चुके हैं। उन्होंने काजी की उम्र और उनके रिश्तेदारों की उम्र का हवाला देते हुए कहा कि यह संभवतः आखिरी मौका हो सकता है जब वह कश्मीर जाकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकें।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि काजी इस बात का लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार हैं कि कश्मीर यात्रा के दौरान वह किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
OCI कार्ड रद्द करने के खिलाफ भी चल रहा मामला
काजी के OCI कार्ड को रद्द करने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ पहले ही रद्द कर चुकी है। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ अपील हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने लंबित है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने काजी की भारत यात्रा की अनुमति देने वाली याचिका खारिज कर दी थी।
2023 में रद्द किया गया था OCI कार्ड
भारतीय वाणिज्य दूतावास, न्यूयॉर्क ने काजी पर ‘पाकिस्तान समर्थक प्रचार’ करने का आरोप लगाया था। भारत सरकार ने मई 2023 में उनकी गतिविधियों को देश की ‘संप्रभुता और सुरक्षा के प्रतिकूल’ बताते हुए उनका OCI कार्ड रद्द कर दिया था। इसके साथ ही उन्हें फॉरेनर्स एक्ट के तहत ब्लैकलिस्ट भी किया गया था।
नवंबर 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने OCI कार्ड रद्द करने के फैसले को निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि कार्ड रद्द करने से पहले काजी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।


