Hindi NewsIndia NewsWho is Dr Nisar ul Hassan hired by Al Falah University as professor, fired by JK government, missing after Delhi blast
कौन है डॉ. निसार उल हसन, जो हुआ लापता? आतंकी कनेक्शन पर जम्मू-कश्मीर LG ने किया था बर्खास्त

कौन है डॉ. निसार उल हसन, जो हुआ लापता? आतंकी कनेक्शन पर जम्मू-कश्मीर LG ने किया था बर्खास्त

संक्षेप: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. निसार-उल-हसन को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 नवंबर 2023 को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण बर्खास्त कर दिया था। तब वह श्रीनगर के मेडिकल कॉलेज में तैनात था।

Wed, 12 Nov 2025 05:21 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Delhi Lal Quila Blast: दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किला के पास कार में धमाके के बाद फरीदाबाद की अल फलाह प्राइवेट यूनिवर्सिटी सुरक्षा और जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है। धमाकों के तार यहां से जुड़ने लगे हैं। इस बीच, वहां तैनात प्रोफेसर डॉ. निसार उल हसन गायब बताया जा रहा है। वह भी जम्मू-कश्मीर का मूल निवासी है। इस प्रोफेसर को जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल आतंकी कनेक्शन के आरोप में पहले बर्खास्त कर चुके हैं। वह श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था। वहां से बर्खास्त होने के बाद निसार उल हसन को अल फलाह यूनिवर्सिटी ने बहाल किया था।

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NDTV की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. निसार-उल-हसन को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 नवंबर 2023 को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत बर्खास्त कर दिया था। यह प्रावधान सरकार को राज्य की सुरक्षा से जुड़े मामलों में विभागीय जाँच के बिना किसी लोक सेवक को बर्खास्त करने का अधिकार देता है।

नकली दवा घोटाले में हुआ था निलंबन

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, डॉ. निसार-उल-हसन अपनी बर्खास्तगी से पहले श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह कॉलेज और अस्पताल में मेडिसिन के सहायक प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत था। अब वह 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट के बाद से कथित तौर पर लापता है। डॉ. निसार को मई 2014 में कश्मीर घाटी में एक बड़े नकली दवा घोटाले के आरोप में भी निलंबित कर दिया गया था। नकली दवा की वजह से कई लोगों की मौत हो गई थी।

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अल-फलाह का इनकार

2014 में स्थापित अल-फलाह विश्वविद्यालय ने आतंकवादी संगठनों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वह अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और गुरुवार को होने वाली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले पर चर्चा करेगा। सूत्रों के अनुसार, दक्षिण दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय कार्यालय ने पुष्टि की है कि अभी तक कोई भी केंद्रीय या राज्य स्तरीय जाँच दल उनके परिसर में नहीं पहुँचा है। ओखला कार्यालय के अधिकारियों ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने मौजूदा घटनाक्रम के बारे में पहले ही एक औपचारिक बयान जारी कर दिया है।

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जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ रहे तार

लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट के दो दिन बाद, जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि आतंकवादियों ने 26/11 के मुंबई हमलों जैसे दिल्ली में कई समन्वित हमलों की योजना बनाई गई थी। सूत्रों के अनुसार, यह साजिश – जो कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) आतंकवादी समूह से जुड़ी है – का उद्देश्य मध्य दिल्ली के कई ऐतिहासिक स्थलों, जिनमें लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और गौरी शंकर मंदिर शामिल हैं, को निशाना बनाना था। जाँचकर्ताओं का मानना ​​है कि 200 से ज़्यादा इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) न केवल दिल्ली में, बल्कि गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी इस्तेमाल के लिए तैयार किए जा रहे थे। अब तक दिल्ली धमाका केस में 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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