
बेबी अरिहा कौन? जिसके लिए पीएम मोदी को जर्मनी के चांसलर से करनी पड़ी बात, जानें पूरा मामला
कल्पना कीजिए, अगर किसी मां की गोद से उसकी सिर्फ सात महीने की मासूम बच्ची को छीन लिया जाए, तो उस मां पर क्या बीतेगी? सोचकर ही दिल कांप जाता है। कुछ ऐसा ही दर्दनाक मामला जर्मनी में एक भारतीय परिवार के साथ हुआ है… आइये जानते हैं पूरा मामला
कल्पना कीजिए, अगर किसी मां की गोद से उसकी सिर्फ सात महीने की मासूम बच्ची को छीन लिया जाए, तो उस मां पर क्या बीतेगी? सोचकर ही दिल कांप जाता है। कुछ ऐसा ही दर्दनाक मामला जर्मनी में एक भारतीय परिवार के साथ हुआ है। यह कहानी है बेबी अरिहा शाह की, जो जर्मनी के फोस्टर केयर (पालक माता-पिता) में पल रही है, जबकि उसके असली माता-पिता भारत में न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहे हैं। मामला इतना संवेदनशील हो गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद जर्मनी के चांसलर फेडिरक मर्ज से इस पर सीधी बात करनी पड़ी। वहीं विदेश मंत्रालय पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन जर्मनी के कानून और चाइल्ड प्रोटेक्शन सिस्टम बच्ची को भारत लौटाने में बाधा बन रहे हैं।
कौन है बेबी अरिहा?
बेबी अरिहा शाह के माता-पिता भारतीय हैं। उनका नाम धरा शाह और भावेश शाह है। भावेश शाह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। साल 2018 में उन्हें जर्मनी में अच्छी नौकरी मिली, तो वे पत्नी धरा के साथ बर्लिन चले गए। सब कुछ सामान्य चल रहा था। साल 2021 में उनके घर एक नन्ही परी का जन्म हुआ, जिसका नाम अरिहा रखा गया। जन्म के बाद परिवार में खुशियां छाई थीं, लेकिन यह सुख ज्यादा दिनों तक नहीं रहा।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, सितंबर 2021 में जब अरिहा महज 7 महीने की थीं, एक दिन उसकी दादी उसे गोद में खिला रही थीं। गलती से बच्ची को थोड़ी चोट लग गई। बाद में मां धरा ने डायपर बदलते समय खून देखा। घबराकर माता-पिता तुरंत बच्ची को नजदीकी अस्पताल ले गए। उन्हें उम्मीद थी कि डॉक्टर इलाज करेंगे, लेकिन वहां जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी उलट-पुलट कर दी। डॉक्टरों ने चोट देखकर संदेह जताया। स्थानीय अस्पताल ने शुरुआती इलाज किया, लेकिन बाद में बड़े अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों को शक हुआ कि बच्ची के साथ यौन प्रताड़ना हुई है। अस्पताल ने तुरंत जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी को सूचना दी। इसके बाद एजेंसी ने बच्ची को माता-पिता से अलग कर अपनी कस्टडी में ले लिया, और यहीं से कानूनी जंग शुरू हुई।
कस्टडी लेने के बाद जर्मन पुलिस ने जांच की। डीएनए टेस्ट, मेडिकल जांच हुई। जांच में साबित हुआ कि बच्ची के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ था। 2022 की शुरुआत में पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ क्रिमिनल केस बंद कर दिया। इसका मतलब ये हुआ कि पुलिसिया जांच में धरा और भावेश निर्दोष साबित हुए। लेकिन चाइल्ड लाइन सर्विस ने बच्ची लौटाने से इनकार कर दिया। एजेंसी का कहना था कि भले यौन शोषण नहीं हुआ, लेकिन माता-पिता ने हिंसक व्यवहार किया या देखभाल में लापरवाही बरती। उन्होंने तर्क दिया कि चोट माता-पिता की लापरवाही से लगी। इस आधार पर कोर्ट ने माता-पिता के पैरेंटिंग राइट्स खत्म कर दिए और बच्ची को फोस्टर केयर में डाल दिया। जर्मन अदालतों से उम्मीद टूटने पर धरा-भावेश भारत लौट आए और भारत सरकार से मदद मांगी।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
सोमवार को इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले 40 महीनों से अरिहा जर्मन पालक परिवार में है और भारत सरकार जर्मनी के साथ लगातार संपर्क में है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर से इस मुद्दे पर चर्चा की है। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह पहले कानूनी मुद्दा था, लेकिन अब इसे मानवीय आधार पर देखा जाना चाहिए। भारत जर्मन सरकार, अधिकारियों, दूतावास और सभी एजेंसियों से बात कर रहा है। परिवार की पीड़ा समझते हुए प्रयास हो रहे हैं कि अरिहा भारतीय सांस्कृतिक माहौल में पले।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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