कौन हैं अरूप राय? ममता के सिपहसालार ने ही छीन ली कुर्सी, बने 'असली TMC' के सुप्रीमो
टीएमसी में बड़ी बगावत! ममता बनर्जी को हटाकर पूर्व मंत्री अरूप रॉय बने 'असली' TMC के नए अध्यक्ष। जानिए कौन हैं अरूप रॉय और बंगाल राजनीति के इस बड़े तख्तापलट की पूरी इनसाइड स्टोरी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हुई तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी बगावत अब संगठन के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने एक विशेष अधिवेशन में पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को 'असली' टीएमसी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। इस गुट ने एक समानांतर नेतृत्व ढांचा तैयार किया है, जिससे पार्टी पर नियंत्रण की यह लड़ाई अब सीधे तौर पर संगठन के मूल ढांचे तक पहुंच गई है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं अरूप राय?
कौन हैं नए अध्यक्ष अरूप रॉय?
अरूप रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति और खासकर हावड़ा जिले के एक बड़े नेता माने जाते हैं। एक समय पर वह ममता बनर्जी के बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालारों में गिने जाते थे।
70 वर्षीय अरूप रॉय हावड़ा मध्य विधानसभा सीट से लगातार अजेय रहे हैं। वह 2011, 2016, 2021 और हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनावों में भी इसी सीट से विधायक चुने गए हैं।
वह 2011 से लेकर 2026 तक ममता बनर्जी सरकार में सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह लंबे समय तक हावड़ा जिले के टीएमसी जिलाध्यक्ष रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनका काफी प्रभाव है।
पेशे से वकील रहे अरूप रॉय 1998 में टीएमसी के गठन से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का हिस्सा थे। जब ममता बनर्जी ने अपनी अलग पार्टी बनाई, तब से ही वह टीएमसी के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं।
उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 4.9 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उन पर 22.8 लाख रुपये की देनदारी (लायबिलिटी) है। उनकी घोषित वार्षिक आय 31.2 लाख रुपये है।
चुनाव आयोग का रुख करेगा बागी गुट
विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के करीब छह हफ्ते बाद यह बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने आधे घंटे तक चली बागी टीएमसी गुट की बैठक के बाद मीडिया के सामने अरूप रॉय के नाम का ऐलान किया। बागी गुट ने यह भी साफ कर दिया है कि वह खुद को "असली" अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता दिलाने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने के लिए जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का रुख करेगा। इसके साथ ही नई 'तृणमूल राष्ट्रीय कार्य समिति' भी पेश की जाएगी।
अरूप रॉय को टीएमसी का नया अध्यक्ष नियुक्त करने का यह फैसला तब आया है, जब ममता बनर्जी ने न्यू टाउन के एक होटल में बागी विधायकों और पार्टी पार्षदों के साथ एक अलग बैठक की थी।
कोलकाता में हुई बागी गुट की बैठक में अरूप रॉय, जावेद खान, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अरूप विश्वास, असीम बोस, जूई विश्वास और तारक सिंह जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इनके अलावा हावड़ा, कोलकाता, बहरामपुर, मुर्शिदाबाद समेत कई अन्य जिलों के बागी विधायक, पार्षद और पूर्व जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
बैठक को संबोधित करते हुए रितब्रत बनर्जी ने तर्क दिया कि पार्टी के संविधान के अनुसार हर 3 साल में राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) का गठन होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि 2022 में बनी पिछली समिति बिना पुनर्गठन के ही अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है।
बागी गुट की नई नियुक्तियां
बैठक में 10 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को मंजूरी दी गई। जिसका विस्तार 30 सदस्यों तक किया गया और ध्वनि मत से नए पदाधिकारियों का चुनाव किया गया।
अध्यक्ष: अरूप रॉय (हावड़ा सेंट्रल से वरिष्ठ विधायक)
उपाध्यक्ष: अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन
महासचिव: ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा
कोषाध्यक्ष: अखरुज्जमां अंसारी
ममता को दिया ऑफर
बागी गुट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी को निलंबित नहीं किया है, लेकिन नई समिति और नए महासचिवों की नियुक्ति के साथ ही अभिषेक बनर्जी अपने पद से स्वतः ही विस्थापित हो गए हैं। ममता बनर्जी को बागी गुट की ओर से 'मुख्य सलाहकार' बनने का प्रस्ताव दिया गया है। ममता बनर्जी के खेमे ने इस पूरी प्रक्रिया को सिरे से खारिज कर दिया है।
वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि असंतुष्टों के पास ऐसा सत्र बुलाने या संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, "टीएमसी और ममता बनर्जी एक दूसरे के पर्याय हैं।" ममता समर्थक खेमे ने संकेत दिया है कि इस घटनाक्रम के बाद कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है। फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान जैसे नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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