कौन हैं भारतीय मूल के अनिल मेनन? जो NASA के ISS मिशन पर उड़ने को हैं तैयार, क्यों कहा जाता है एस्ट्रोनॉट फैमिली
49 साल के अनिल मेनन भारत में भी एक वर्ष तक 'रोटरी एंबेसडोरियल स्कॉलर' के रूप में रहे हैं, जहां उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियान के अध्ययन और समर्थन का कार्य किया।
भारतीय मूल के डॉक्टर, इंजीनियर और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अंतरिक्षयात्री अनिल मेनन अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा और नासा के मिशन ISS के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह मंगलवार यानी 14 जुलाई को रूस के सोयुज MS-29 स्पेसक्राफ्ट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए अंतरिक्ष यात्रा शुरू करने वाले हैं। NASA की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, मेनन कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सुबह 10:47 बजे (बैकोनूर समय के अनुसार शाम 7:47 बजे) उड़ान भरेंगे। उनके साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
NASA की रिलीज में कहा गया है कि तीन सदस्यों वाली यह टीम लॉन्च के लगभग तीन घंटे बाद ISS से जुड़ेगी। इस अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर यह दल करीब आठ महीने रहेगा। अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटने से पहले यह टीम आठ महीने के मिशन वाले 'एक्सपीडिशन 74' टीम के साथ काम करेगी।
कौन हैं अनिल मेनन?
अनिल मेनन को नासा ने 2021 में अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना था। मेनन एक डॉक्टर, मैकेनिकल इंजीनियर और हैं, जो इमरजेंसी मेडिसिन और एयरोस्पेस मेडिसिन में माहिर हैं। वह अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं। NASA में शामिल होने से पहले, उन्होंने एस्ट्रोनॉट्स की मदद करने वाले फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम किया और SpaceX के साथ भी काम किया है, जहाँ उन्होंने कंपनी के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम को विकसित करने में मदद की। भारतीय और यूक्रेनी माता-पिता की संतान मेनन के पास न्यूरोबायोलॉजी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और मेडिसिन में डिग्रियां हैं।
केरल से जुड़ी हैं जड़ें
अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय और मां यूक्रेनी मूल के हैं। उनकी जड़ें केरल के पलक्कड़ से जुड़ी हैं। अपने करियर की शुरुआत में, उन्होंने US एयर फोर्स में भी सेवा दी और 'ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम' के समर्थन में अफगानिस्तान में तैनात रहे। मेनन हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन से भी जुड़े रहे हैं और माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों को मेडिकल मदद पहुँचाते रहे हैं।
पत्नी एना भी हैं मशहूर अंतरिक्ष यात्री
दिलचस्प बात यह है कि अनिल की पत्नी एना मेनन भी एक मशहूर अंतरिक्ष यात्री हैं। एना ने सितंबर 2024 में ऐतिहासिक 'पोलारिस डॉन' मिशन के तहत उड़ान भरी थी, जिसने दुनिया की पहली प्राइवेट स्पेसवॉक का रिकॉर्ड बनाया था। फिलहाल वह नासा में ही ट्रेनिंग ले रही हैं। इस दंपति के दो बच्चे हैं। अनिल और एना के परिवार को कम्पलीट एस्ट्रोनॉट फैमिली भी कहा जाता है।
मिशन का मुख्य उद्देश्य और वैज्ञानिक प्रयोग
ISS पर अपने आठ महीने के प्रवास के दौरान मेनन कई अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे जो भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों (जैसे चंद्रमा और मंगल मिशन) के लिए अहम होंगे। उनके शोध कार्यों में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल का उत्पादन, भविष्य के हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और एआई (AI) उपकरणों के लिए अंतरिक्ष में इनका निर्माण करना शामिल है। अंतरिक्ष में रहने के दौरान इंसानी शरीर कैसे ढलता है, इस पर भी मेनन स्टडी करेंगे। इसके तहत वह माइक्रोग्रैविटी में रक्त प्रवाह के परिवर्तनों का अध्ययन करेंगे और अंतरिक्ष में संवहनी ऊतक (vascular tissue) की बायोप्रिंटिंग का परीक्षण करेंगे।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


