
बिहार में पैदा हुए अभय सिंह रूस में विधायक बने, पुतिन की यात्रा से पहले भारत से क्या बोले
अभय सिंह साल 1991 में पटना से सोवियत संघ मेडिसिन की पढ़ाई के लिए गए थे। अभय सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा पटना के लोयोला हाई स्कूल से की है। इसके बाद वह कुर्स्क चले गए थे। कुर्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के बाद वह डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने दोबारा पटना लौटे थे।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं। इस बीच बिहार के पटना में जन्मे रूसी विधायक अभय सिंह ने भारत से एक अपील की है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत की तरफ से एस-500 डिफेंस सिस्टम के लिए जोर दिया जाए। खास बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 सिस्टम ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
अक्टूबर 2018 में, भारत ने रूस के साथ एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच यूनिट खरीदने के लिए पांच अरब अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अनुबंध पर आगे बढ़ने से ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (CAATSA) के प्रावधानों के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं।
इंडिया टुडे से बातचीत में सिंह ने कहा, 'एस-400 बहुत अच्छा मिसाइल सिस्टम है, लेकिन एस-500 लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है और इसका इस्तेमाल सिर्फ रूस में होता है। रूस इसे किसी अन्य देश को नहीं दे रहा है। अगर रूस इस भारत को देने का फैसला करता है, तो भारत इसे हासिल करने वाला पहला देश हो जाएगा। चीन के पास भी यह सिस्टम नहीं है। मुझे लगता है कि भारत को एस-500 मिसाइल सिस्टम लेने के लिए काम करना चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। सुखोई-57 भी बहुत अच्छा है।' सिंह राष्ट्रपति पुतिन की पार्टी से हैं। वह यूक्रेन की सीमा से लगे कुर्स्क क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सिंह का कहना है, 'यह दौरा बहुत अहम है, क्योंकि वह (पुतिन) बीते चार साल से भारत नहीं आए हैं। मुझे लगता है कि यह दौरा दो देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिए बहुत अच्छा साबित होगा।'
कौन हैं अभय सिंह
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभय सिंह साल 1991 में पटना से सोवियत संघ मेडिसिन की पढ़ाई के लिए गए थे। अभय सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा पटना के लोयोला हाई स्कूल से की है। इसके बाद वह कुर्स्क चले गए थे। कुर्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के बाद वह डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने दोबारा पटना लौटे थे। हालांकि, हालात वैसे नहीं रहे, जैसा वह चाहते थे। ऐसे में उन्होंने फिर कुर्स्क लौटने का फैसला किया और फार्मा बिजनेस में एंट्री की। इसके बाद उन्होंने रूस में रियल ऐस्टेट सेक्टर में भी हाथ आजमाया।
पुतिन समर्थक सिंह का मानना है कि रूस को सॉफ्ट डेमोक्रेसी से नहीं चलाया जा सकता। वह रूस में डेप्युटेट हैं, जो भारत में विधायक के बराबर होता है। वह साल 2017 और 2022 में चुनाव जीत चुके हैं। द वीक के अनुसार, सिंह बताते हैं, 'मैं बिहार से हूं और राजनीति हमारे डीएनए में है।'
पुतिन का भारत दौरा
पुतिन गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद पीएम मोदी उनके सम्मान में उसी दिन एक निजी रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। पुतिन की इस यात्रा का व्यापक उद्देश्य खासकर ऐसे समय में भारत-रूस सामरिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है, जब भारत के अमेरिका के साथ संबंधों में तीव्र गिरावट आई है।
पीटीआई भाषा के अनुसार, पुतिन की यात्रा की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि पुतिन का शुक्रवार को औपचारिक स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद 23वीं भारत-रूस शिखर वार्ता होगी। उन्होंने बताया प्रधानमंत्री मोदी हैदराबाद हाउस में पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए दोपहर भोज की भी मेजबानी करेंगे तथा पुतिन सुबह राजघाट भी जाएंगे।
इन मुद्दों पर निगाहें
शुक्रवार को होने वाली शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग को बढ़ाने, द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने और छोटे ‘मॉड्यूलर रिएक्टर’ में संभावित सहयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। इस वार्ता पर पश्चिमी देशों की पैनी निगाह रहेगी। लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद पुतिन शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे भारत से प्रस्थान करेंगे।
पहले रक्षा मंत्री मिलेंगे
शिखर बैठक से पहले दोनों देशों के रक्षा मंत्री गुरुवार को व्यापक वार्ता करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के बीच गुरुवार को होने वाली वार्ता में एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद, सुखोई 30 लड़ाकू विमानों के अपग्रेड और रूस से अन्य महत्वपूर्ण सैन्य साजो सामान खरीदने में भारत की रुचि एजेंडे में रहेगी।





