भारत ने दिखाया कि परंपरा और विज्ञान साथ-साथ बढ़ सकते हैं आगे, WHO चीफ ने क्या कहा
शिखर सम्मेलन में WHO के महानिदेशक ने कहा, ‘पारंपरिक चिकित्सा हमारे आधुनिक विश्व के स्वास्थ्य के लिए कई खतरों, आर्थिक क्षमताओं पर बोझ और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच को दूर करने में मदद कर सकती है।'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भारत को लेकर शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा एकीकृत और समावेशी होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं। वह पारंपरिक चिकित्सा पर डब्ल्यूएचओ के दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन अवसर पर बोल रहे थे। भारत सरकार के साथ संयुक्त रूप से आयोजित यह शिखर सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ था। इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्री, वैज्ञानिक, नेता और विशेषज्ञ शामिल हुए। भारत की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने यह साबित कर दिया है कि परंपरा और नवाचार साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत ने दुनिया को दिखाया है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।’
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा, ‘पारंपरिक चिकित्सा हमारे आधुनिक विश्व के स्वास्थ्य के लिए कई खतरों, आर्थिक क्षमताओं पर बढ़ते बोझ और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच को दूर करने में मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने इस दृष्टिकोण को दुनिया के सामने लाने में मदद की है।’ शिखर सम्मेलन के परिणामों के बारे में उन्होंने कहा, ‘हम सामान्य और जोखिम-आधारित नियमों के माध्यम से सुरक्षा, गुणवत्ता और जनविश्वास सुनिश्चित करने पर सहमत हुए हैं। हम सांस्कृतिक विरासत, बौद्धिक संपदा और समान साझाकरण का सम्मान करते हुए जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करने पर भी सहमत हुए हैं।’
WHO के महानिदेशक ने क्या कहा
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा, ‘हम अनुसंधान और डेटा सृजन तक पहुंच में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों व नवाचार का जिम्मेदारी से उपयोग करने पर सहमत हुए हैं। हम सुरक्षित व प्रभावी पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों, विशेष रूप से निजी स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने पर सहमत हुए हैं।’ टेड्रोस ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन के समापन के अवसर पर आइए हम इस साझा विश्वास के साथ एकजुट होकर जिएं कि स्वास्थ्य का भविष्य एकीकृत, समावेशी और सुविज्ञ होना चाहिए। लोगों, समुदायों और ग्रह के बीच संतुलन बहाल करके हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ समाजों का निर्माण कर सकते हैं।’





