
सब भगवान का किया-धरा, वेंकटेश्वर मंदिर बनवाने वाले ने कहा- भगदड़ के लिए कोई जिम्मेदार नहीं
काशीबुग्गा में वेंकटेश्वर मंदिर बनवाने वाले ओडिशा के हरि मुकुंद पांडा ने कहा कि भगदड़ के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दैवीय घटना है। एकादशी पर मची भगदड़ में कम से कम 10 लोगों की जान चली गई थी।
आंध्र प्रदेश के काशीबुग्गी में वेंकटेश्वर स्वामी के मंदिर में एकादशी के मौके पर भगदड़ मचने की वजह से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। निर्माणाधीन मंदिर में अव्यवस्था को लेकर कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। यह मंदिर तिरुपति मंदिर के तर्ज पर बनाया गया है। ओडिशा के 94 साल के हरि मुकुंद ने इसे बनवाया है और अभी चार महीने पहले ही यह श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। हरि मुकुंद पांडा ने कहा कि इस घटना के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है बल्कि यह केवल दैवीय प्रकोप था।

जानकारी के मुताबिक एकादशी के मौके पर मंदिर परिसर में बेतहाशा भीड़ थी। यहां लगभग 10 हजार लोग पहुंचे थे। सुबह के 11 बजे के करीब मंदिर के प्रवेश द्वार के पास धक्का-मुक्की के चलते एक रेलिंग टूट गई और लोग गिरने लगे। इसके बाद भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि अगर प्रशासन को इतनी भीड़ के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई होती तो पुलिस ने क्राउड मैनेजमेंट प्लान बना लिया होता।
पुलिस ने कहा कि अगर इतनी भीड़ के बारे में पहले ही जिला प्रशासन को बताया गया होता तो इस तरह की घटना ना होती। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 100 (सदोष हत्या) का मुकदमा रर्ज किया है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश सरकार के रिकॉर्ड में भी दर्ज नहीं था। एक श्रद्धालु ने बताया. सुबह 9 बजे के आसपास भीड़ अचानक बढ़ने लगी। संकरी सीढ़ियां एकदम से जाम हो गईं। तभी एक रेलिंग टूट गई और लोग एक दूसरे पर गिरने लगे।
मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश और निकास द्वार भी एक ही था। ऐसे में भीड़ को संभालना मुश्किल था। श्री सत्य साईं जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए नायडू ने आयोजकों पर पुलिस को पहले से सूचित न करने का आरोप लगाया, जिसके कारण पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जा सकी। श्रीकाकुलम जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) केवी महेश्वर रेड्डी ने कहा कि मंदिरों (या धार्मिक संस्थानों) के लिए यह अनिवार्य है कि वे कार्यक्रम आयोजित करते समय पुलिस से अनुमति लें, चाहे उनमें कितनी भी भीड़ क्यों न हो।





