कौन हैं आर बालासुब्रमण्यम और जोराम अनिया? PM मोदी ने जताया भरोसा, NITI आयोग की दी जिम्मेदारी
कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इन दोनों विशेषज्ञों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। यह निर्णय नीति आयोग के पुनर्गठन की उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसकी शुरुआत अप्रैल 2024 में की गई थी।

केंद्र सरकार ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. जोराम अनिया और विद्वान लेखक डॉ. आर बालासुब्रमण्यम को नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। इस नई नियुक्ति के साथ ही भारत सरकार के इस प्रमुख थिंक टैंक में पूर्णकालिक सदस्यों की कुल संख्या अब सात हो गई है, जिसमें एक उपाध्यक्ष भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीति आयोग के अध्यक्ष के रूप में इसका नेतृत्व कर रहे हैं।
कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इन दोनों विशेषज्ञों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। यह निर्णय नीति आयोग के पुनर्गठन की उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसकी शुरुआत अप्रैल 2024 में की गई थी।
कौन हैं डॉ. जोराम अनिया?
अरुणाचल प्रदेश से आने वाली डॉ. जोराम अनिया का नीति आयोग में शामिल होना न केवल उनके लिए बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण है। वह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और शोधकर्ता हैं। डॉ. अनिया वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षिक नियामक आयोग की सदस्य और एक एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उनके पास शिक्षण, अनुसंधान और सार्वजनिक नीति में 18 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है।
वह न्यिशी (Nyishi) समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। साथ ही, वह अपने राज्य की पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने हिंदी भाषा में पीएचडी पूरी की है। उन्होंने न्यिशी साहित्य, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह क्षेत्रीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सक्रिय रही हैं। नीति आयोग में उनकी नियुक्ति से पूर्वोत्तर भारत की बौद्धिक आवाज को राष्ट्रीय नीति निर्माण के उच्चतम स्तर पर स्थान मिला है।
कौन हैं डॉ. आर बालासुब्रमण्यम?
डॉ. आर बालासुब्रमण्यम सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञ और एक प्रसिद्ध विकास कार्यकर्ता हैं। जमीनी स्तर पर काम करने और वैश्विक शिक्षा प्राप्त करने का उनका अनूठा मिश्रण नीति आयोग के लिए अत्यंत मूल्यवान साबित होगा। उन्होंने 'स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट' (SVYM) की स्थापना की है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का एक प्रतिष्ठित संगठन है। इसके अलावा, उन्होंने 'ग्रासरोट्स रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट' (GRAAM) नामक एक अग्रणी पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक की भी स्थापना की।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षित डॉ. बालासुब्रमण्यम कॉर्नेल विश्वविद्यालय और आईआईटी दिल्ली में फैकल्टी सदस्य रह चुके हैं। उनके पास 'इंडिक लीडरशिप' (भारतीय नेतृत्व) में डॉक्टरेट की उपाधि है। वह एक प्रखर लेखक हैं और कन्नड़ व अंग्रेजी समाचार पत्रों में 500 से अधिक कॉलम लिख चुके हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘Power Within: The Leadership Legacy of Narendra Modi’ और ‘Voices from the Grassroots’ शामिल हैं। वर्तमान में वह भगवद गीता से नेतृत्व के सिद्धांतों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने शासन सुधारों, संस्थागत मजबूती और राज्य की क्षमता निर्माण पर विभिन्न सरकारों को सलाह दी है।
नीति आयोग का नया स्वरूप
24 अप्रैल 2024 को सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन शुरू किया था। अशोक कुमार लाहिड़ी को इसका उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। डॉ. अनिया और डॉ. बालासुब्रमण्यम के अलावा भी कई विद्वान इस टीम में शामिल हैं।
के. वी. राजू: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री।
एम. श्रीनिवास: एम्स (AIIMS) के निदेशक।
अभय करंदीकर: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव।
गोबर्धन दास: जाने-माने वैज्ञानिक।
राजीव गौबा: पूर्व कैबिनेट सचिव।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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