

तेलंगाना में जातिगत सर्वे किया गया है, जिसमें सभी बिरादरियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इस बीच एक दिलचस्प डेटा और सामने आया है, जिसमें यह बताया गया है कि प्रदेश की कौन सी जातियां इंटर कास्ट मैरिज करने में आगे हैं। इस सर्वे में कहा गया है कि सबसे ज्यादा इंटर कास्ट मैरिज करने वाली जातियों में अय्यर, ईसाई और राजू शामिल हैं। तेलंगाना में अय्यर को ही आयंगर भी कहा जाता है। इसके अलावा कापू और ब्राह्मण समाज के लोग भी अंतर्जातीय विवाह करने में आगे हैं। वहीं खेतिहर समाज में आने वालीं रेड्डी और वेलामा जातियों के लोगों में इंटर कास्ट मैरिज का प्रचलन कम है।
यही नहीं ये जातियों राज्य के औसत से भी पीछे हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी के नेतृत्व वाली एक्सपर्ट कमेटी ने सर्वे का अध्ययन कर यह जानकारी दी है। इंटर कास्ट मैरिज तो इस मापक के तौर पर देखा गया है कि कैसे किसी समाज में सामाजिक रूढ़िवादिता कमजोर हो रही है और सोशल मोबिलिटी में इजाफा हुआ है। इसके अलावा व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विशेष तौर पर महिलाओं को अपना पार्टनर चुनने की आजादी से इसको जोड़ा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा 12 फीसदी परिवार अय्यर/आयंगर बिरादरी में ऐसे हैं, जिन्होंने इंटर कास्ट मैरिज की हैं। इसके बाद कुछ ओबीसी और फिर दलित ईसाई इसमें आगे हैं।
दलित ईसाई करीब 9.9 फीसदी हैं, जिन्होंने इंटर कास्ट मैरिज की है। इसके बाद राजू बिरादरी के लोग हैं, जिनका आंकड़ा 8.7 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आयंगर/अय्यर बिरादरी के लोगों में शिक्षा का स्तर ऊंचा है। उनकी बड़ी आबादी शहरों में ही रहती है और उनका सामाजिक एक्सपोजर भी अधिक है। माना गया है कि इसी के कारण उनमें सामाजिक बैरियर कम हैं और वे आसानी से इंटर कास्ट मैरिज कर रहे हैं। इंटर कास्ट मैरिज के मामले में सबसे बड़ा कारक लोगों का शहरों में बसना है। शहरी लोगों में दूसरी जातियों में शादियां करने का प्रचलन ज्यादा देखा गया है।
राज्य में ब्राह्मणों की 90 फीसदी आबादी ऐसी है, जो शहरों में ही बसी है। इसी के चलते इस बिरादरी में सामाजिक बैरियर कमजोर हुए हैं। वहीं एसटी बिरादरी कोलम, बीसी समाज में आने वाली माली और एसटी गोंड समाज के लोगों में इंटर कास्ट मैरिज की संख्या बहुत कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनकी बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों में ही बसती है। इन्हें समाज में ज्यादा एक्सपोजर नहीं मिला है। इसी के कारण रूढ़ियों के प्रति इनकी आसक्ति ज्यादा है। इसके अलावा खेतिहर समुदायों में भी इंटर कास्ट मैरिज का प्रचलन कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी बड़ी संख्या गांवों में ही रहती है। इसके अलावा उनके बीच शादियों को लेकर एक सामाजिक प्रतिष्ठा का भाव भी है।
दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।
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