कब दोबारा खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? ईरान ने भारत से दिया US को हार्ड मैसेज; क्या रखीं शर्तें
भारत सहित दूसरे देश दुनिया के सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में होने वाली रुकावटों को लेकर चिंतित हैं। यह जलमार्ग भारत के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि उसके एनर्जी इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है।

मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) तबाह हो चुका है। इस समुद्री मार्ग से होकर पहले की तुलना में काफी कम संख्या में जहाज गुजर रहे हैं। इसकी वजह से भारत सहित दुनिया के कई देशों को पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत का सामना कर पड़ रहा है। इस सबके बीच ईरान ने इसको दोबारा खोलने के संकेत दिए हैं, लेकिन इसके लिए अमेरिका के सामने शर्तें भी रख दी हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की यात्रा पर आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नाकेबंदी और सैन्य गतिविधियां बंद कर दे तो ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समुद्री ढांचे के तहत काम करने को तैयार है। उन्होंने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कही हैं। पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते के लिए एक खास समुद्री ढांचा तैयार करने के लिए ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। जब उनसे होर्मुज में की गई कार्रवाईयों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी हमलों को जवाब देने के लिए किया गया था।
'हमने नहीं की इसकी शुरुआत'
पेजेश्कियान ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, "न तो हिज्बुल्लाह ने और न ही ईरान ने इसकी शुरुआत की थी। ईरान को अपने खिलाफ हुए हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा। अमेरिका एक तरफ तो इलाके में हथियार ला रहा है और दूसरी तरफ क्षेत्रीय रास्तों को क्यों रोक रहा है। अमेरिकी किस आधार पर हमारे इलाके पर हमला कर रहे हैं और हमारे रास्तों को रोक रहे हैं। क्या हमें कुछ नहीं करना चाहिए? अगर हम जिंदा हैं तो हमें जवाब देना होगा। मरने के बाद तो हम जवाब नहीं देंगे। इसलिए हम जिंदा हैं और हम जवाब देंगे।"
होर्मुज को खोलने की क्या हैं शर्तें?
पेजेश्कियान ने साफ कर दिया कि जब तक अमेरिका ईरान पर अपना दबाव कम नहीं कर लेता है तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारम मरीजों की जान ली जा रही है। इसकी वजह से लोगों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि सैन्य कार्रवाई से अपने मकसद हासिल करने में नाकाम रहने के बाद अमेरिका आर्थिक उपायों के जरिए आम नागरिकों पर दबाव डाल रहा है। अमेरिका को अपनी यह रणनीति छोड़नी पड़ेगी। तभी जाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोला जा सकता है।
आपको बता दें कि भारत सहित दूसरे देश दुनिया के सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में होने वाली रुकावटों को लेकर चिंतित हैं। यह जलमार्ग भारत के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि उसके एनर्जी इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है।
ईरान की यह मांग है कि इस जलमार्ग पर उसके नियंत्रण को मान्यता दी जाए। वह इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से फीस वसूलना चाहता है। अमेरिका ने इस मांग को खारिज कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की दूसरी छोड़ पर स्थित ओमान ने कहा है कि वह मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों से बातचीत कर रहा है। पेजेश्कियान ने भी कहा कि ईरान इस जलमार्ग के लिए एक ढांचा तैयार करने के मकसद से ओमान के साथ बातचीत कर रहा है।
अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा ईरान
पेजेश्कियान का कहना है कि समुद्री रास्तों पर दबाव होने के बावजूद ईरान का प्रतिबंधों और नाकेबंदी के आगे झुकने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, "बेशक समुद्री रास्ते आसान हैं, लेकिन यह मुख्य रास्ता नहीं है। अगर वे उन्हें रोकते हैं तो हम हार नहीं मानेंगे।"
पेजेश्कियान ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इन्होंने चाबहार बंदरगाह पर भारत के निवेश और साझेदारी पर भी बात की है।


