
PM मोदी कब करेंगे अपने नए कार्यालय 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन? सामने आई तारीख
कई दशकों से प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में कई स्थानों पर बिखरे हुए और पुराने बुनियादी ढांचे से काम कर रहे थे। इस बिखराव के कारण परिचालन अक्षमता, समन्वय की चुनौतियां और रखरखाव की लागत अधिक थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार यानी कि 13 फरवरी को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत निर्मित अपने नए कार्यालय परिसर 'सेवा तीर्थ' (Seva Teerth) का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे निर्धारित है। सेवा तीर्थ का पुराना नाम 'एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव' था, जो अब नए नाम से प्रशासनिक कार्यों का केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अलावा, 'सेवा तीर्थ' परिसर में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और मंत्रिमंडल सचिवालय भी स्थित होंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह उद्घाटन भारत के प्रशासनिक शासन ढांचे में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है और एक आधुनिक, कुशल और नागरिक-केंद्रित शासन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को दर्शाता है।
कई दशकों से प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में कई स्थानों पर बिखरे हुए और पुराने बुनियादी ढांचे से काम कर रहे थे। इस बिखराव के कारण परिचालन अक्षमता, समन्वय की चुनौतियां और रखरखाव की लागत अधिक थी। नए भवन इन मुद्दों का समाधान करते हुए प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक, भविष्य के लिए तैयार सुविधाओं के भीतर एकीकृत करते हैं।
'कर्तव्य भवन' में शिफ्ट होंगे प्रमुख मंत्रालय
प्रधानमंत्री 'सेवा तीर्थ' के साथ-साथ 'कर्तव्य भवन-1 और 2' (Kartavya Bhavan-1 & 2) का भी उद्घाटन करेंगे। इन आधुनिक भवनों में कई प्रमुख मंत्रालय काम करेंगे। वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ कॉर्पोरेट मामले, संस्कृति, कानून और न्याय, सूचना और प्रसारण, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय आदि इसमें शामिल हैं।
इस परिवर्तन की घोषणा सबसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिसंबर 2025 में की थी। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार के लिए पिछले 11 साल सत्ता नहीं, बल्कि सेवा के पर्याय रहे हैं। अमित शाह ने कहा था, "इस दिशा में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सेवा का संकल्प दोहराया है और प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ' रखा है।" उन्होंने यह भी बताया था कि इसी तरह राजभवन और राजनिवास का नाम बदलकर 'लोक भवन' और 'लोक निवास' किया जा रहा है।

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