पेट्रोल-डीजल के दाम अगली बार कब बढ़ेंगे? केंद्र सरकार के जवाब में टेंशन वाली बात
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच देश में ईंधन कीमतों को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब पेट्रोल और डीजल के दाम कब बढ़ेंगे? केंद्र की मोदी सरकार ने इस पर स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल वह कोई समयसीमा या अनुमान नहीं लगा सकती।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच देश में ईंधन कीमतों को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब पेट्रोल और डीजल के दाम कब बढ़ेंगे? केंद्र की मोदी सरकार ने इस पर स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल वह कोई समयसीमा या अनुमान नहीं लगा सकती। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे कोई बदलाव करने की कोई समयसीमा या प्रतिबद्धता नहीं है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले शुक्रवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी थी। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। साथ ही कई शहरों में सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई।
पर्याप्त स्टॉक, घबराने की कोई जरूरत नहीं
सुजाता शर्मा ने आश्वासन देते हुए कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। एलपीजी वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है। सभी आवश्यक ईंधनों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संकट शुरू हुए ढाई महीने से अधिक समय बीत चुका है और होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है, इसके बावजूद भारतीय रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों पर दबाव
दूसरी ओर बताया जा रहा है कि शुक्रवार को 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बावजूद तेल विपणन कंपनियां अभी भी भारी घाटे में चल रही हैं। विश्लेषक फर्म नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा खुदरा मूल्य बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति बाधाओं की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कंपनियों को पूर्ण मार्जिन हासिल करने के लिए प्रति लीटर करीब 25 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत है।
इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की अस्थिरता से वैश्विक एलपीजी की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 520 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं। इससे सरकारी तेल कंपनियों का दैनिक एलपीजी घाटा करीब 440 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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