भारत में कब-कब बढ़ी सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या, आज फिर पेश होगा बिल; जानें पूरी डिटेल

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई यानी सोमवार से होने जा रही है। संभावनाएं जताई जा रहीं हैं कि राम मंदिर, पेपर लीक समेत कई मुद्दों को लेकर यह सत्र भी हंगामेदार रह सकता है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट जज से जुड़े बिल के पेश होने के आसार हैं।

Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को लेकर विधेयक पेश हो सकता है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सहित उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने वाले अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक को मंजूरी दी थी। लेकिन इसके तुरंत बाद सरकार अध्यादेश लेकर आई थी।

अध्यादेश के बाद बढ़ाई गई स्वीकृत संख्या के आधार पर उच्चतम न्यायालय में पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई। प्रस्तावित विधेयक के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी और इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होगी।

उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या इससे पहले 2019 में बढ़ाई गई थी। उस समय प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।

देश में कब-कब बढ़ी संख्या

वर्ष 1956 के उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम में प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 10 तय की गई थी। वर्ष 1960 के संशोधन अधिनियम के तहत यह संख्या 13 की गई और बाद में एक अन्य संशोधन के जरिये 17 कर दी गई।

वर्ष 1986 के संशोधन अधिनियम से न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 (प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर) कर दी गई। इसके बाद वर्ष 2009 के संशोधन से यह संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई।

अध्यादेश के विरोध में लोकसभा ने प्रस्ताव स्वीकारा

16 जुलाई को लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गए उस सांविधिक संकल्प को स्वीकार कर लिया है, जिसमें इस अध्यादेश का विरोध किया गया है। इसकी जानकारी बुधवार को लोकसभा के बुलेटिन में दी गई। प्रक्रिया के अनुसार, जब किसी अध्यादेश की जगह कानून बनाने के लिए विधेयक पेश किया जाता है, तो विपक्ष उसके विरोध में सांविधिक संकल्प लाता है।

अध्यादेश सरकार की कार्यकारी शक्ति के तहत जारी किया जाने वाला आदेश है, जिसके जरिये संसद का सत्र न चलने पर जरूरत पड़ने की स्थिति में कानून बनाए जा सकते हैं। संकल्प में कहा गया है कि, 'यह सदन उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को अस्वीकार करता है।

पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पीके मल्होत्रा ने कहा, 'किसी अध्यादेश की अवधि छह महीने होती है, लेकिन जैसे ही संसद का सत्र शुरू होता है, उस अध्यादेश को छह सप्ताह यानी 42 दिन में संसद से कानून के रूप में पारित कराना होता है। ऐसा नहीं होने पर अध्यादेश स्वतः समाप्त हो जाता है।'

मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने वाले एक विधेयक को मंजूरी दी थी, लेकिन इसके तुरंत बाद सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया। अध्यादेश लागू होने के बाद बढ़ाई गई स्वीकृत संख्या के आधार पर उच्चतम न्यायालय में पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई।

ये विधेयक भी सूचीबद्ध

सरकार ने 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए जाने के लिए कुछ विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें से एक विधेयक राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने से संबंधित है। लोकसभा सचिवालय ने कहा कि सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को भी लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है। यह विधेयक बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन इस पर विचार और पारित करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

लोकसभा में पेश करने, विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध एक अन्य विधेयक 'जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' है। यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (जिसमें 2023 में संशोधन किया गया था) की धारा 13(3) में और संशोधन करने का प्रस्ताव करता है, ताकि पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाया जा सके।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।