
बांग्लादेश कब वापस लौटना चाहती हैं शेख हसीना? पूर्व PM ने बताया अपना प्लान
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में निर्वासन में रहकर अपने देश लौटने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि वे केवल तब लौटेंगी जब वहां लोकतंत्र और संविधान का सम्मान हो। उनका लक्ष्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बहाली है।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पिछले साल ढाका में छात्र आंदोलन के दौरान अपने महल से हेलिकॉप्टर के जरिए नाटकीय रूप से भागने के बाद से भारत की राजधानी नई दिल्ली में शरण लेकर रह रही हैं। अगस्त 2024 से शेख हसीना दिल्ली में रह रही हैं और अब तक सार्वजनिक जीवन से लगभग दूर हैं। उनके देश में इस समय नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार काम कर रही है, जिसने फरवरी 2027 में आम चुनाव कराने का वादा किया है। वहीं, हसीना दिल्ली में शांत लेकिन एकाकी जीवन बिता रही हैं।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले हसीना को दिल्ली के ऐतिहासिक लोधी गार्डन में टहलते देखा गया था। उनके साथ दो सादे कपड़ों में सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। उन्होंने राहगीरों को सिर हिलाकर नमस्कार किया और कुछ लोगों ने उन्हें पहचान भी लिया। सूत्रों के मुताबिक, शेख हसीना लुटियंस दिल्ली के हाई सिक्योरिटी में एक सुरक्षित आवास में रह रही हैं। यहां कई पूर्व और वर्तमान सांसद तथा वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं। यह आवास भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया है।
5 अगस्त 2024 को जब ढाका में प्रदर्शनकारियों ने उनके आवास पर धावा बोला तो वह बांग्लादेश वायुसेना के विमान से भारत के हिंडन एयरबेस पहुंचीं। वहां उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। दो दिन बाद उन्हें एक गुप्त स्थान पर ले जाया गया। उनकी सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं।
शेख हसीना ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कहा, “मैं अपने देश लौटना चाहूंगी, लेकिन तभी जब वहां की सरकार वैध हो संविधान का सम्मान किया जा रहा हो और कानून व्यवस्था बहाल हो।” उन्होंने कहा कि निर्वासन के बावजूद उनका उद्देश्य लोकतंत्र की बहाली है। उन्होंने ब्रिटेन के The Independent से कहा, “केवल स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव ही देश को ठीक कर सकते हैं।”
शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने घोषणा की है कि वह अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रीय चुनावों का बहिष्कार करेगी। शेख हसीना ने कहा, “लाखों लोग अवामी लीग का समर्थन करते हैं। उन्हें मतदान से बाहर रखना देश के लोकतंत्र के लिए घातक है। कोई भी राजनीतिक व्यवस्था तब तक काम नहीं कर सकती जब तक सबको समान अधिकार न मिले।”
वहीं, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने बुधवार को कहा कि आगामी चुनावों को अंदरूनी और बाहरी ताकतें विफल करने की कोशिश करेंगी।
उनके प्रेस सचिव शफीकुल आलम के अनुसार, “कई शक्तिशाली ताकतें, न सिर्फ देश के भीतर बल्कि बाहर से भी चुनाव को बिगाड़ने का प्रयास करेंगी। अचानक हमलों की आशंका है।” यूनुस ने कहा कि चुनाव चुनौतीपूर्ण होंगे, क्योंकि अंदर और बाहर से योजनाबद्ध तरीके से प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिश की जाएगी।
शेख हसीना का दिल्ली में निर्वासन बांग्लादेश की राजनीति में एक नया और असामान्य अध्याय जोड़ रहा है। 1975 में उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान और तीन भाइयों की हत्या के बाद अब एक बार फिर इतिहास ने खुद को मानो दोहराया है। इस बार शेख हसीना सुरक्षित हैं, लेकिन अपने देश से दूर हैं।





