CJI के सामने व्हाट्सएप का यू-टर्न, अर्जी वापस ले बोला- NCLT के निर्देशों का करेंगे पालन मीलॉर्ड
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ दिसंबर, 2025 में आए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी।

वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा और उसके फास्ट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप ने सोमवार (23 फरवरी) को देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि वे अपीलीय न्यायाधिकरण NCLT के उस निर्देश का पालन करेंगे, जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा तय गोपनीयता एवं सहमति संबंधी मानकों को विज्ञापन से जुड़े डेटा पर भी लागू करने को कहा गया है। व्हाट्सएप ने यह भी कहा कि वह NCLT के खिलाफ दायर अपनी अर्जी वापस ले रहा है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ दिसंबर, 2025 में आए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। शीर्ष अदालत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की उस अपील पर भी विचार कर रही है जिसमें एनसीएलएटी द्वारा व्हाट्सएप और मेटा को विज्ञापन उद्देश्यों के लिए उपयोगकर्ताओं का डेटा साझा करने की अनुमति दिए जाने को चुनौती दी गई है।
सिब्बल ने रखा व्हाट्सएप का पक्ष
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्थगन की मांग वाली याचिकाएं एनसीएलएटी के 15 दिसंबर, 2025 के आदेश के उस हिस्से पर रोक चाहती हैं, जिसमें सीसीआई के निर्देशों का पालन करने को कहा गया था। व्हाट्सएप का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि अपीलकर्ता कंपनियों ने 16 मार्च तक न्यायाधिकरण के निर्देशों को लागू करने का फैसला किया है। इस पर पीठ ने स्थगन याचिकाएं खारिज करने के साथ यह स्पष्ट किया कि मुख्य अपील में उठाए गए मुद्दों पर इससे कोई असर नहीं होगा। अदालत ने कंपनियों से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी।
213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने को दी गई थी चुनौती
शीर्ष अदालत इन कंपनियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति के मामले में 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने तीन फरवरी को इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि नागरिकों के निजता के अधिकार से 'डेटा साझा करने' के नाम पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। एनसीएलएटी ने चार नवंबर, 2025 को सीसीआई के उस आदेश के एक हिस्से को निरस्त कर दिया था, जिसमें व्हाट्सएप को पांच वर्ष तक मेटा के साथ विज्ञापन के लिए डेटा साझा करने से रोका गया था। हालांकि, 213 करोड़ रुपये का दंड बरकरार रखा गया था।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


