
काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता भी, मनरेगा की जगह 'G RAM G' आने के बाद क्या-क्या बदल जाएगा?
सरकार ने मनरेगा को रिपील करने और नई योजना लागू करने वाला विधेयक सदन में पेश कर दिया है। इसके तहत अब 100 दिन की जगह 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी और साप्ताहिक भुगतान की व्यवस्था होगी।
लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलने वाला विधेयक पेश कर दिया गया है। अब इस योजना का नाम विकसित भारत- जी राम जी होगा। विपक्ष का कहना है कि यह केंद्र सरकार की केवल सनक है कि वह कांग्रेस की योजनाओं के नाम बदलने पर तुली है। उन्होंने कहा कि इसके तहत केवल केंद्र के अधिकारों को बढ़ाया जा रहा है, फंडिंग को तो पहले से कम किया जा रहा है। वहीं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि महात्मा गांधी खुद राम राज की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द ही हे राम थे। उन्होंने कहा कि अब 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी।
VB- G RAM G कानून लागू होने के छह महीने के अंदर ही राज्यों को भी नए प्रावधान के हिसाब से योजना बनानी होगी। सरकार का कहना है कि विकसित भात 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आधुनिक ढांचा स्थापित करना है और ऐसे में योजना में बदलाव जरूरी था। सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य टिकाऊ ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर खडडा करना, पानी की सुरक्षा, आजिविका का साधन उपलब्ध कराना और विकास के कार्य करवाना है।
आइए जानते हैं कि इस विधेयक में कौन से अहम प्रावधान हैं-
125 दिनों का काम और साप्ताहिक भुगतान- मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी जिसे अब 125 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा श्रमिकों को मासिक भुगतान की जगह साप्ताहिक भुगतान करना होगा। कार्य पूरा होने के 15 दिन के अंदर ही भुगतान आवश्यक होगा। इसके अलावा किसी परिवार के काम के लिए आवेदन के 15 दिन के भीतर अगर उसे काम नहीं मिलता तो वह बेरोजगारी भत्ता का हकदार होगा।
मनरेगा की वापसी और नए गोल- इस प्रस्तावित विधेयक के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को निरस्त कर दिया जाएगा। इसकी जगह नया कानून लागू होगा। वहीं लंबित देनदारियों और मनेरागा के तहत जारी कार्यों के लिए संक्रमणकालीन समय होगा।
कितना खर्च होगा- नई योजना के तहत साल में लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें केंद्र का हिस्सा करीब 95,692 करोड़ रुपये का होगा। वहीं बाकी का योगदान राज्यों का रहेगा। वित्त पोषण का अनुपात राज्यों की श्रेणी के अनुसार होगा। उत्तर पूर्वी और हिमालयी राज्यों का अनुपात 90:10 का होगा। बाकी राज्यों का अनुपात 60:40 का रहेगा। वहीं केंद्र शासित प्रदेश में 100 प्रतिशत योगदान केंद्र का ही रहेगा।
लोकपाल की नियुक्ति- नए कानून में समस्या के तत्काल निवारण की व्यवस्थी की गई है। इसके अलावा निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिले स्तर पर लोकपाल की नियुक्ति का प्रावधान है। श्रमिकों के लिए बायोमेट्रीक प्रमाणीकरण, जियो टैगिंग और डिजिटल एमआईएस डैशबोर्ड का उपयोग किया जाएगा।
खेती के कार्यों के लिए छूट- इस योजना में प्रावधान किया गया हि खेती के लिए श्रमिकों को छूट दी जाएगी। हर साल में 60 दिन खेती के कार्य के लिए होंगे और इसमें कोई काम नहीं कराया जाएगा। इससे सुनिश्चित किया जाएगा कि कृषि कार्य प्रभावित ना हो। आपातकाल स्थिति में इस छूट को खत्म भी किया जा सकता है।
कार्यों का विभाजन- इस योजना के तहत कार्यों को चार क्षेत्रों में बांट दिया गया है। इसके तहत जल सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा, रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर और आपदारोधी ढांचे तैयार करने का प्लान है। यह योजना पंचायत स्तर से शुरू होकर ब्लॉक, जिला और राज्य के स्तर पर एकीकृत होगी। इसके क्रियान्वयन में पंचायती राज्यों की मुख्य भूमिका होगी।

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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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