बेटों के खून को चावल में मिलाकर मां को खिलाया, पढ़ें बंगाल की राजनीति का सबसे खूनी कांड
बुधवार रात करीब साढ़े 10 बजे मध्यमग्राम के डोलतला के पास मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्र नाथ रथ की गाड़ी का पीछा किया, उन्हें रुकने के लिए मजबूर किया और गोली चलाकर भाग गए।

भीड़ घर में दाखिल हुई और मां की आंखों के सामने ही उन दो बेटों को मौत के घाट उतार दिया गया, जिनका गुनाह सिर्फ एक अलग विचारधारा का समर्थक होना था। क्रूरता और हैवानियत यहां रुकी नहीं। चश्मदीदों के अनुसार, उस महिला को उसके ही बेटों के खून से सने चावल खाने पर मजबूर किया गया। आज जब पश्चिम बंगाल की सियासत के पन्नों पर चंद्र नाथ रथ के रूप में एक और खूनी अध्याय दर्ज हुआ है, तो 17 मार्च 1970 की उस 'सेनबाड़ी घटना' की चर्चा फिर होने लगी है। क्या हुआ था उस दिन।
क्या हुआ था उस दिन
वरिष्ठ पत्रकार अत्रि मित्र की तरफ से इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में इस घटना का जिक्र मिलता है। साल 2021 में प्रकाशित इस लेख के अनुसार, '17 मार्च, 1970 का दिन बर्धमान शहर की प्रतापेश्वर शिबतला लेन में स्थित सेनबाड़ी के लिए खुशियों भरा दिन होने वाला था। उस दिन परिवार में एक नवजात बच्चे का नामकरण संस्कार होने वाला था, और इस कार्यक्रम के लिए कई रिश्तेदार वहां आए हुए थे।'
वह लिखते हैं कि घटना वाले दिन से एक दिन पहले ही राज्य में यूनाइटेड फ्रंट की सरकार गिरी थी और इसकी सदस्य सीपीएम ने हड़ताल बुलाई थी। इसके बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल शुरू हो गया था।
उन्होंने लिखा, '17 मार्च की तड़के सीपीएम (CPM) की एक विशाल रैली शिबतला लेन में दाखिल हुई। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग जबरन सेन परिवार के घर में घुस गए, जिन्हें कांग्रेस समर्थक माना जाता था। घर को आग के हवाले कर दिया गया और सेन परिवार के दो भाइयों मलय और प्रणब के साथ परिवार के एक निजी शिक्षक जितेंद्रनाथ राय की हत्या कर दी गई। दोनों भाइयों को मारने के बाद, हमलावरों ने कथित तौर पर उनकी मां मृगनयनी देबी को उनके बेटों के खून से सने चावल खिलाए।'
वह लिखते हैं कि घटना के समय मौजूद रहे घर के सबसे बड़े बेटे नाबा सेन की एक साल बाद हत्या कर दी गई थी। इतना ही नहीं उनकी आंखें तक निकाल ली गईं थीं।
आंखों देखी
इस निर्मम हत्याकांड की गवाह स्वर्णलता जश ने 2013 में टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया था, 'हत्या और हमले के बाद सीपीएम समर्थकों ने घर से जुलूस भी निकाला था।' रिपोर्ट के अनुसार, तब दर्ज हुई FIR में निरुपम सेन और बिनॉय कोनार जैसे वरिष्ठ सीपीएम नेताओं समेत 83 अन्य लोगों का नाम लिखा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने 1978 में सभी 83 आरोपियों को बरी कर दिया था।
परिवार की सदस्य रेखारानी सेन ने अखबार से 2011 में हुई बातचीत में उस दिन को याद किया था। उन्होंने बताया था कि उनके घरों पर आग लगे तीर मारे जा रहे थे और इसके जरिए आग लगाई गई। उन्होंने कहा था, 'इसके बाद वे जबरन घर के अंदर घुस आए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। महिलाओं को छोड़कर सबकी बुरी तरह पिटाई की गई। उस समय नाश्ता कर रहे जेठ प्रणब पर पीछे से कुल्हाड़ी से वार किया गया। मेरे देवर मलय को दौड़ाकर एक पड़ोसी के घर में ले जाकर मार डाला गया। मेरे पति की आंखों में तेजाब डाल दिया गया, जबकि मेरी बेटी के प्राइवेट ट्यूटर जितेन राय की भी हत्या कर दी गई।'
रेखा रानी ने 2016 में इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, 'मेरी सास, मृगनयनी देवी ने हमलावरों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके सिर पर वार किया गया। दो हमलावरों ने प्रणब और मलय के खून को चावल में मिलाया और जबरदस्ती उनके मुंह में डाल दिया... उन्हें अस्पताल ले जाया गया... वह बच गईं।'
सीपीएम का क्या कहना था
मित्र के अनुसार, तब सीपीएम का कहना था कि सेन भाई अपराधी थे। उन्होंने लिखा था कि सीपीएम का कहना था कि जब रैली शिबतला गली से गुजर रही थी, तो दूसरे पक्ष ने सेनबाड़ी के अंदर से हमला किया था।
हत्या और फिर बम विस्फोट
2026 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के मुख्य किरदार माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब साढ़े 10 बजे मध्यमग्राम के डोलतला के पास मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने रथ की गाड़ी का पीछा किया, उन्हें रुकने के लिए मजबूर किया और गोली चलाकर भाग गए।
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि रथ को ले जा रहे वाहन को पहले दोहरिया जंक्शन के पास एक छोटे चार पहिया वाहन ने रोका, जिसके बाद एक मोटरसाइकिल सवार कार के पास आया और करीब से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। भाजपा ने आरोप लगाया कि हमलावरों को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने इस आरोप को खारिज कर दिया।
रथ की हत्या के कुछ घंटों के बाद ही उत्तर 24 परगना जिले के पनिहाटी में हुए कथित तौर पर एक बम विस्फोट हुआ, जिसमें भाजपा के 5 कार्यकर्ता घायल हो गए। पीटीआई भाषा के अनुसार, जिस इलाके में विस्फोट हुआ, वह नवनिर्वाचित भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ के आवास के पास है। आरजी कर अस्पताल में जिस महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी थी, रत्ना देबनाथ उनकी मां हैं।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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