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क्या था उस्मान हादी का ग्रेटर बांग्लादेश प्लान, भारत के कौन-कौन से हिस्सों पर गड़ा रखी थी बुरी नजर?

क्या था उस्मान हादी का ग्रेटर बांग्लादेश प्लान, भारत के कौन-कौन से हिस्सों पर गड़ा रखी थी बुरी नजर?

संक्षेप:

Sharif Osman Hadi Greater Bangladesh: अगस्त 2025 में इस विषय ने तब अधिक तूल पकड़ा जब ढाका यूनिवर्सिटी में एक प्रदर्शनी के दौरान इस तरह का एक मानचित्र दिखाया गया। हादी ने ही ये नक्शा तैयार किया था।

Dec 19, 2025 05:09 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Sharif Osman Hadi Greater Bangladesh: पड़ोसी देश बांग्लादेश में पिछले साल जुलाई में हुए विद्रोह के प्रमुख नेताओं में से एक शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद वहां कई इलाकों में भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं हुईं हैं। इस वजह से राजधानी ढाका समेत पूरे बांग्लादेश में तनाव है। हालांकि, शुक्रवार (19 दिसंबर को) सुबह किसी हिंसक घटना की जानकारी नहीं मिली। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने पहले ही ध्वस्त हो चुके, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान के आवास 32 धानमंडी पर तोड़फोड़ की और बीती रात कुछ मीडिया संगठनों के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं चटगांव स्थित भारतीय उच्चायोग पर पत्थरबाजी भी की गई है। प्रदर्शनकारियों ने वहां भारत विरोधी नारेबाजी भी की।

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दरअसल, 34 साल का उस्मान हादी न केवल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा था बल्कि वह भारत को दुश्मनी भरी निगाहों से देखता रहा है। वह अकसर नई दिल्ली के खिलाफ जहर उगलता रहता था। उसने खुद को बांग्लादेश की आजादी के रक्षक के तौर पर पेश किया था। उस्मान हादी इंकलाब मंच का प्रवक्ता और इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक था। इंकलाब मंच एक दक्षिणपंथी राजनीतिक प्लेटफॉर्म है, जो शेख हसीना विरोधी आंदोलन से उभरा। इस संगठन का रुख घोर रुप से भारत विरोधी है। हादी न सिर्फ भारत विरोध बल्कि ग्रेटर बांग्लादेश के सपने देख रहा था। हाल ही में उसने तथाकथित ग्रेटर बांग्लादेश का नक्शा भी बांटा था, जिसमें भारत के भी कुछ इलाकों को शामिल किया गया था।

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ग्रेटर बांग्लादेश प्लान क्या है?

ग्रेटर बांग्लादेश (Greater Bangladesh) एक विवादास्पद राजनीतिक और भौगोलिक अवधारणा है, जो एक ऐसे विस्तारित बांग्लादेश की कल्पना करती है, जिसमें भारत और म्यांमार के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया है। अगस्त 2025 में इस विषय ने तब अधिक तूल पकड़ा जब ढाका यूनिवर्सिटी में एक प्रदर्शनी के दौरान इस तरह का एक मानचित्र दिखाया गया। हादी ने ही ये नक्शा तैयार किया था। पिछले साल, जब बांग्लादेश जल रहा था, तभी जुलाई के आखिरी हफ्तों में सल्तनत-ए-बांग्ला नाम के एक सक्रिय इस्लामी समूह ने ढाका यूनिवर्सिटी में कथित ग्रेटर बांग्लादेश का नक्शा जारी किया था।

ग्रेटर बांग्लादेश नक्शे में कौन-कौन से क्षेत्र?

कहा जाता है कि इस संगठन को तुर्की के Turkish Youth Federation नामक एक एनजीओ का समर्थन प्राप्त था। इस संगठन से मोहम्मद यूनुस की बेटी के संबंध रहे हैं। इस नक्शे में म्यांमार का अराकान क्षेत्र और भारत के एक बड़े हिस्से को शामिल किया गया था, जिसमें पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, असम, बिहार, ओडिशा और अन्य पूर्वोत्तर राज्य शामिल थे। सल्तनत-ए-बांग्ला का नाम बंगाल सल्तनत से लिया गया है, जो एक स्वतंत्र मुस्लिम शासित साम्राज्य था, जिस पर 1352 से 1538 ई. के बीच शासन किया गया था। उस दौर में इस सल्तनत के अंतर्गत वर्तमान पूर्वी भारत और बांग्लादेश के कुछ हिस्से आते थे।

Greater Bangladesh Plan

राष्ट्रवाद, इस्लामवाद और भारत विरोधी भावना का खतरनाक मिश्रण

यह घटना बांग्लादेश की राजनीति में अब चल रहे राष्ट्रवाद, इस्लामवाद और भारत विरोधी भावना के खतरनाक मिश्रण को दर्शाती है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए खतरनाक है। साथ ही यह उसकी एक भड़काऊ सोच थी। इस अलग सोच की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसकी जड़ें 1947 में बंगाल के आखिरी ब्रिटिश प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के यूनाइटेड बंगाल के नाकाम प्रस्ताव से जुड़ी हैं। जैसे ही शेख हसीना के पतन की कहानी शुरू हुई, इस भड़काऊ सोच ने बांग्लादेश में पैठ बनानी शुरू कर दी थी।

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भारत ने जताई थी चिंता

माना जाता है कि बांग्लादेशी कट्टरपंथियों की इस नाकाम कोशिश के पीछे चीन और पाकिस्तान का भी शह है। एक तरफ जहां अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी नेटवर्क भारत के खिलाफ धमकियां जारी कर रहे हैं और बांग्लादेशी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन ढाका पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। बीजिंग ने तीस्ता नदी परियोजना के लिए लगभग 1 अरब डॉलर की पेशकश डाका को की है। इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। जून 2025 में चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश के त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन ने नए गठबंधनों के भी संकेत दिए हैं। दूसरी तरफ, भारत सरकार ने इन रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की है । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अगस्त 2025 में राज्यसभा में कहा कि सरकार इन गतिविधियों पर करीब से नजर रख रही है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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