मैं क्या करूं? ईश्वर ने मुझे ऐसा ही बनाया है... प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुनवाई में क्यों बोले CJI गवई?

मैं क्या करूं? ईश्वर ने मुझे ऐसा ही बनाया है... प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुनवाई में क्यों बोले CJI गवई?

संक्षेप:

राष्ट्रपति की ओर से सुप्रीम कोर्ट के भेजे गए रेफरेंस पर सुनवाई के दौरान CJI बीआर गवई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील पर मुस्कुराने लगते हैं। यह देखकर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मैं समझता हूँ... मैं आपकी मुस्कान देख सकता हूँ।

Aug 20, 2025 02:53 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Presidential Reference case, CJI BR Gavai: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आज (बुधवार, 20 अगस्त को) लगातार दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विधेयकों पर स्वीकृति देने के अधिकार से संबंधित राष्ट्रपति संदर्भ पर सुनवाई कर रही है। राष्ट्रपति की ओर से दाखिल रेफरेंस में पूछा गया है कि क्या न्यायालय राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर सकता है।

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प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बुधवार को पूछा कि क्या देश संविधान निर्माताओं की इस उम्मीद पर खरा उतरा है कि राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच सामंजस्य होगा तथा दोनों शक्ति केंद्रों के बीच विभिन्न मुद्दों पर परामर्श भी किया जाएगा। CJI गवई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्यपाल की नियुक्ति और शक्तियों पर संविधान सभा की बहस का उल्लेख किया।

पांच जजों की पीठ में कौन-कौन?

इस पीठ में CJI गवई के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस ए एस चंदुरकर शामिल हैं। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने पीठ को बताया कि विभिन्न वर्गों में की गई आलोचनाओं के विपरीत, राज्यपाल का पद राजनीतिक शरण चाहने वालों के लिए नहीं है, बल्कि संविधान के तहत उनके पास कुछ शक्तियां और दायित्व हैं। सॉलिसिटर जनरल ने राष्ट्रपति संदर्भ पर अपनी दलीलें जारी रखते हुए कहा कि संविधान की संघीय योजना को ध्यान में रखते हुए संविधान सभा में राज्यपालों की भूमिका और नियुक्ति पर विस्तृत बहस हुई है।

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बीच सुनवाई मुस्कुराने लगे CJI गवई

बहस के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "हम सभी को संविधान से शक्तियाँ प्राप्त हैं।" इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा: अगर विधेयक को रोकने की शक्ति, अस्वीकार करने की शक्ति में बदल जाए तो क्या होगा? इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह इस पर बात करेंगे। इसी दौरान CJI गवई मुस्कुराने लगते हैं। यह देखकर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “मैं समझता हूँ... मैं आपकी मुस्कान देख सकता हूँ।”

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सॉलिसिटर जनरल ने मुस्कान पर की टिप्पणी तो बोल पड़े CJI

बार एंड बेंच के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल की इस टिप्पणी पर CJI ने तुरंत जवाब दिया और कहा, "मैं हमेशा मुस्कुराता रहता हूँ। मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा और हम कुछ कह भी नहीं सकते।" इस पर SG ने फिर कहा, "आपकी मुस्कान एक संकेत है।" इस पर CJI गवई ने कहा, “अगर ईश्वर ने मुझे मुस्कान दी है तो इसमें मैं क्या करूँ? ईश्वर ने मुझे ऐसा ही बनाया है।”

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इसी बीच जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, "ध्यान रखें... अनुच्छेद 200 के तहत दो जगहों पर रोक लगाने का प्रावधान है... अगर इस अधिकार के कारण विधेयक रद्द हो जाता है। तो आपको कहना होगा कि दूसरे कथन का भी यही अर्थ समझा जाना चाहिए।"

राष्ट्रपति ने SC से क्या पूछा है?

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शीर्ष अदालत से यह जानने का प्रयास किया था कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करते समय राष्ट्रपति द्वारा विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए न्यायिक आदेशों द्वारा समय-सीमाएं निर्धारित की जा सकती हैं या नहीं? पांच पृष्ठों के परामर्श में राष्ट्रपति मुर्मू ने उच्चतम न्यायालय से 14 प्रश्न पूछे और राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करने में अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर उसकी राय जानने की कोशिश की।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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