अन्य मुस्लिम OBC का क्या, आरक्षण मांग रहीं वकील पर CJI सूर्यकांत ने दागे सवाल
प्रधान न्यायाधीश CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद वसीम सैफी का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश से पूछा, ‘अन्य मुस्लिम ओबीसी के बारे में क्या? ओबीसी होना केवल एक सामाजिक स्थिति का कारक नहीं है, बल्कि एक आर्थिक कारक भी है।’

उच्चतम न्यायालय ने 'पसमांदा मुसलमानों' के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत नौकरियों और दाखिले में आरक्षण के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को मुसलमानों के बीच पिछड़े समुदायों का विवरण मांगा। पीठ ने कहा कि उसे इस बात पर विचार करना होगा कि क्या पसमांदा सांख्यिकीय रूप से एकमात्र पिछड़ा वर्ग हैं।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद वसीम सैफी का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश से पूछा, 'अन्य मुस्लिम ओबीसी के बारे में क्या? ओबीसी होना केवल एक सामाजिक स्थिति का कारक नहीं है, बल्कि एक आर्थिक कारक भी है।'
इस जनहित याचिका में रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार ओबीसी को उप-वर्गीकृत करके पसमांदा मुसलमानों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का अनुरोध किया गया था।
CJI ने पूछे सवाल
सीजेआई ने कहा, 'अन्य गरीब मुसलमानों की कीमत पर, आप केवल पसमांदा को बढ़ावा देना चाहते हैं... कुल कितने मुसलमान पिछड़े हुए हैं, इस पर आपने कोई अध्ययन क्यों नहीं किया?'
वकील ने जवाब दिया
वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश ने कहा कि वह सवालों के जवाब में एक नोट दाखिल करेंगी। इसके बाद पीठ ने याचिका को चार सप्ताह बाद दोबारा सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
प्रकाश ने शुरुआत में ही पीठ से आग्रह किया कि वह जनहित याचिका को आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के तहत चार प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के मुद्दे से संबंधित एक अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ दे। वरिष्ठ वकील ने कहा कि 'पसमांदा' मुसलमान गरीब हैं और उन्हें ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण लाभ प्राप्त करने का अधिकार है।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
और पढ़ें

