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50 के बैच में 42 मुस्लिम, वैष्णो देवी कॉलेज में एडमिशन पर क्यों बवाल? BJP बोली- हिंदुओं का दान...

50 के बैच में 42 मुस्लिम, वैष्णो देवी कॉलेज में एडमिशन पर क्यों बवाल? BJP बोली- हिंदुओं का दान...

संक्षेप:

बीजेपी नेता सुनील शर्मा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलकर विरोध दर्ज कराया और कहा- दान हिंदुओं का है, हिंदुओं की भलाई के लिए है। हम चाहते हैं कि प्रवेश उन्हीं को मिले जिनकी माता वैष्णो देवी में आस्था है।

Nov 25, 2025 11:28 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर में हाल ही में स्थापित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में MBBS के पहले बैच के लिए हुए दाखिलों ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद की वजह बना 50 सीटों में से 42 मुस्लिम छात्रों का चयन, जिसके बाद बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विरोधियों का आरोप है कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वित्तीय सहयोग से चल रहे संस्थान में हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।

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क्या है पूरा मामला?

इंस्टीट्यूट ने इस माह की शुरुआत में NEET मेरिट लिस्ट के आधार पर अपने पहले MBBS बैच के लिए दाखिला प्रक्रिया पूरी की। कुल 50 सीटों में से 85% सीटें जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए आरक्षित थीं। मेरिट के आधार पर 42 मुस्लिम और 8 हिंदू छात्रों का चयन हुआ। दाखिला सूची जारी होते ही VHP और बजरंग दल ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों ने तर्क दिया कि- यह संस्थान माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के धन से चल रहा है इसलिए हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।

बीजेपी ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देते हुए दाखिला सूची रद्द करने की मांग कर दी और कहा कि श्राइन बोर्ड को मिलने वाला दान हिंदुओं का है, जो हिंदुओं की भलाई के लिए खर्च होना चाहिए।

BJP की मांग: ‘माता वैष्णो देवी में आस्था रखने वालों को मिले प्रवेश’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी नेता सुनील शर्मा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलकर विरोध दर्ज कराया और कहा- दान हिंदुओं का है, हिंदुओं की भलाई के लिए है। हम चाहते हैं कि प्रवेश उन्हीं को मिले जिनकी माता वैष्णो देवी में आस्था है। इस साल की प्रवेश सूची स्वीकार नहीं है, नियम बदलने चाहिए। इन संगठनों ने यह भी मांग उठाई कि मेडिकल कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया जाए जिससे धर्म आधारित आरक्षण लागू किया जा सके।

प्रशासन का जवाब: कॉलेज का कोई ‘माइनॉरिटी स्टेटस’ नहीं, प्रवेश पूरी तरह मेरिट-आधारित

अधिकारियों ने साफ किया कि- कॉलेज अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है इसलिए धर्म के आधार पर कोई आरक्षण या प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। प्रवेश केवल NEET मेरिट के अनुसार ही हुआ है।

CM उमर अब्दुल्ला का पलटवार

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विरोध प्रदर्शनों को अनुचित और गैर-संवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रवेश सूची कानूनन और पूरी तरह मेरिट-आधारित है। उमर ने BJP की मांगों पर सवाल उठाते हुए कहा- अगर आप बिना मेरिट के प्रवेश चाहते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर आएं। संविधान में ‘सेक्युलर’ शब्द है- अगर आपको यह पसंद नहीं, तो इसे हटा दीजिए।

उन्होंने आगे कहा- धर्म के आधार पर प्रवेश देना संविधान के अनुसार संभव नहीं है। क्या पुलिस भी धर्म के आधार पर काम करेगी? अगर अस्पताल और विश्वविद्यालय लोगों से दान लेकर बने हैं, तो क्या आप कहेंगे कि मुसलमान या गैर-हिंदू वहां इलाज न कराएं? उमर अब्दुल्ला ने यह भी पूछा कि यदि प्रशासन भाजपा नेताओं को भविष्य में धर्म आधारित आरक्षण देने का आश्वासन दे रहा है, तो यह कैसे संभव होगा: अगर ऐसा है, तो फिर माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी और अस्पताल को भी दान-आधारित और धर्म-आधारित संस्थान घोषित कर दें।

विवाद का मूल मुद्दा: ‘दान, धर्म और मेरिट’

यह विवाद दरअसल तीन मुद्दों पर केंद्रित है-

  1. श्राइन बोर्ड के दान का उपयोग किसके हित में होना चाहिए?
  2. धर्म आधारित प्रवेश क्या किसी सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थान में लागू हो सकता है?
  3. संवैधानिक तौर पर ‘मेरिट’ बनाम ‘धार्मिक प्राथमिकता’ का संघर्ष।

फिलहाल, J&K प्रशासन ने कहा है कि प्रवेश सूची में कोई बदलाव नहीं होगा और प्रक्रिया NEET के नियमों के अनुरूप है। वहीं हिंदू संगठनों और बीजेपी ने संकेत दिए हैं कि वे आंदोलन जारी रखेंगे।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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