Hindi NewsIndia NewsWhat is the International Solar Alliance from which Trump withdrew US stands to lose more than India
क्या है इंटरनेशनल सोलर एलायंस, जिससे बाहर हुए ट्रंप? भारत ही नहीं, US को भी घाटा

क्या है इंटरनेशनल सोलर एलायंस, जिससे बाहर हुए ट्रंप? भारत ही नहीं, US को भी घाटा

संक्षेप:

विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसए से हटना केवल एक जलवायु संबंधी फैसला नहीं है, बल्कि यह पिछले 30 सालों में बड़ी मेहनत से तैयार किए गए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करने वाला कदम है।

Jan 09, 2026 08:27 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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India-US Relations: भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर बने इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) को एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संगठन से अमेरिका के बाहर होने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम न केवल वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए चुनौती है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले तीन दशकों से बने मजबूत रिश्तों में भी दरार पैदा करने वाला माना जा रहा है।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कार्यकारी आदेश जारी करते हुए भारत द्वारा प्रवर्तित 'इंटरनेशनल सोलर एलायंस' से हटने की घोषणा की है। यह फैसला ट्रंप की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से नाता तोड़ रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के खिलाफ मानता है। सूत्रों का मानना है कि भारत का कहना है कि अमेरिका को जहां जाना है जाए, यह गठबंधन कायम रहेगा। उसके हटने से ISA पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

ISA

क्या है इंटरनेशनल सोलर एलायंस?

इस संगठन की शुरुआत 2015 में पेरिस जलवायु शिखर सम्मेलन (COP21) के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने की थी। इसका मुख्य मुख्यालय भारत के गुरुग्राम में है। इसका लक्ष्य 2030 तक सौर ऊर्जा में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश जुटाना है। साथ ही विकासशील देशों को सस्ती सौर तकनीक और फाइनेंस उपलब्ध कराना ताकि वे प्रदूषण बढ़ाए बिना अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकें। अमेरिका 2021 में इस संगठन में शामिल हुआ था।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसए से हटना केवल एक जलवायु संबंधी फैसला नहीं है, बल्कि यह पिछले 30 सालों में बड़ी मेहनत से तैयार किए गए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करने वाला कदम है। अमेरिका उन 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं और 35 अन्य संगठनों से भी बाहर हो गया है, जो मुख्य रूप से पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा पर काम करते हैं।

चीन को मिला बड़ा तोहफा

अमेरिका के पूर्व जलवायु दूत जॉन केरी ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को खुद को पहुंचाया गया घाव बताया है। उन्होंने कहा, "यह फैसला कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन यह चीन के लिए एक 'गिफ्ट' की तरह है। इससे उन देशों और प्रदूषण फैलाने वाली ताकतों को छूट मिल जाएगी जो अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं।"

अमेरिका ने किन संगठनों को छोड़ा?

अमेरिका 31 UN संस्थाओं और 35 गैर-UN अंतर-सरकारी संगठनों से हट गया है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC), इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC), इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम शामिल हैं। वाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के अनुसार, ये संगठन, कन्वेंशन और संधियां अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या संप्रभुता के विपरीत काम करते हैं।

क्या होगा नुकसान?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका का बाहर होना न केवल जलवायु के लिए बुरा है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह है। अमेरिका उन ट्रिलियन डॉलर के निवेश और रोजगार के अवसरों को खो देगा जो क्लीन एनर्जी सेक्टर में आने वाले हैं। सौर तकनीक के वैश्विक नियमों को लिखने में अब अमेरिका की कोई भूमिका नहीं रहेगी, जिससे अन्य देशों खासकर चीन का दबदबा बढ़ेगा।

भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है क्योंकि ISA पीएम मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। अब भारत को फ्रांस और अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर फंडिंग और तकनीक के नए रास्ते तलाशने होंगे ताकि 2030 के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha
कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रैजुएट हिमांशु शेखर झा करीब 9 वर्षों से बतौर डिजिटल मीडिया पत्रकार अपनी सेवा दे रहे हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय राजनीति पर अच्छी पकड़ है। दिसंबर 2019 में लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। इससे पहले दैनिक भास्कर, न्यूज-18 और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में भी काम कर चुके हैं। हिमांशु बिहार के दरभंगा जिला के निवासी हैं। और पढ़ें
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