क्या है नई दिल्ली डिक्लेरेशन, जिसपर 88 देशों ने किए हस्ताक्षर; भारत की यह बड़ी जीत

Feb 22, 2026 07:56 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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आपको बताचे चलें कि इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स: वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा।

क्या है नई दिल्ली डिक्लेरेशन, जिसपर 88 देशों ने किए हस्ताक्षर; भारत की यह बड़ी जीत

भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) शुक्रवार को एक ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हुई। अमेरिका, चीन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित 88 देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए हैं। यह घोषणापत्र न केवल एआई के भविष्य के लिए एक रूपरेखा तैयार करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को भी दर्शाता है।

यह समझौता भारत के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। पिछले साल पेरिस में हुए 'एआई एक्शन समिट' के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन ने यूरोपीय नियामक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, नई दिल्ली में भारत इन सभी देशों को एक मंच पर लाने में सफल रहा है। भारत का मुख्य उद्देश्य एआई का "लोकतंत्रीकरण" करना है, ताकि यह तकनीक केवल कुछ मुट्ठी भर कंपनियों या व्यक्तियों के हाथों में सिमट कर न रह जाए।

इस घोषणापत्र के माध्यम से हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कई स्वैच्छिक ढांचे और मंच बनाने पर सहमति जताई है।

डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर: इसके तहत एआई के बुनियादी संसाधनों तक सभी की पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा और स्थानीय नवाचारों को समर्थन मिलेगा।

ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स: यह एक ऐसा व्यावहारिक मंच होगा जो सफल एआई उपयोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनाने और दोहराने में मदद करेगा।

ट्रस्टेड एआई कॉमन्स: एआई प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों, बेंचमार्क और सर्वोत्तम प्रथाओं का एक साझा संग्रह बनाया जाएगा।

इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स: वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा।

घोषणापत्र में इस बात को स्वीकार किया गया है कि एआई समाज के सभी वर्गों के उत्थान की क्षमता रखता है। इसके लिए 'सोशल एम्पॉवरमेंट प्लेटफॉर्म' बनाने की बात कही गई है। साथ ही एआई के कारण रोजगार के बदलते स्वरूप को देखते हुए 'रीस्किलिंग' और कार्यबल विकास के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर भी सहमति बनी है।

हालांकि 88 भागीदारों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को लागू करना होगा क्योंकि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक प्रकृति की हैं। सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने शुरुआत में घोषणापत्र के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र (UN) के चार्टर से मिलते-जुलते थे। लेकिन भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सहयोगी मानते हुए यूरोपीय संघ अंततः इस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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