क्या है बंगाल-केरल मॉडल, जिसके जरिए विजय-स्टालिन को INDIA अलायंस में लाने की हो रही कवायद

लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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डीएमके सांसद गणपति पी राजकुमार ने कहा कि कांग्रेस ने सिर्फ तमिलनाडु में मंत्रिपद पाने के लिए टीवीके से हाथ मिलाया और डीएमके की पीठ पर छुरा घोंप दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वीसीके को उसे मनाने के लिए किसी दूत की तरह इस्तेमाल कर रही है।

थलपति विजय और एमके स्टालिन

तमिलनाडु में विजय सरकार का हिस्सा कांग्रेस और उसकी पूर्व साथी डीएमके के बीच दूरियां और बढ़ गई हैं। डीएमके ने वीसीके के उस फॉर्मूले और प्रस्ताव को नकार दिया है, जिसमें कहा गया था कि डीएमके और विजय की टीवीके दोनों को भाजपा के खिलाफ बने इंडिया गठबंधन में लाया जाए। दरअसल, वीसीके भी पूर्व में कांग्रेस की तरह डीएमके सरकार का हिस्सा थी, लेकिन बाद में विजय सरकार को समर्थन दे दिया। वीसीके चीफ थोल थिरुमावलवन ने पश्चिम बंगाल और केरल की तरह फॉर्मूला दिया था, जिसमें राज्य स्तर पर तो पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बने गठबंधन में साथ हिस्सा होती हैं। इस फॉर्मूले को कांग्रेस का भी समर्थन मिला था।

हालांकि, डीएमके ने इसे मानने से पूरी तरह से इनकार कर दिया और कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके को धोखा दिया, इसलिए यह मॉडल काम नहीं करेगा। ‘एनडीटीवी’ से बात करते हुए, डीएमके सांसद गणपति पी राजकुमार ने कहा कि कांग्रेस ने सिर्फ तमिलनाडु में मंत्रिपद पाने के लिए टीवीके से हाथ मिलाया और डीएमके की पीठ पर छुरा घोंप दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वीसीके को उसे मनाने के लिए किसी दूत की तरह इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता है कि डीएमके की लीडरशिप वीसीके के प्रपोजल को मानेगी। केरल और बंगाल मॉडल तमिलनाडु में काम नहीं करेगा।'' उन्होंने कहा कि टीवीके राज्य में एक अलग ताकत बनकर उभरी, जिससे तमिलनाडु की राजनीति पूरी तरह से बदल गई। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ के बीच मुकाबला है, जबकि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला होता है। इसके विपरीत तमिलनाडु में एक नया प्लेयर टीवीके मैदान में आ गया है।

'टीवीके का कोई सांसद नहीं'

उन्होंने कहा कि टीवीके का कोई भी सांसद नहीं है, लेकिन इसके बाद भी उसे इंडिया ब्लॉक का हिस्सा बनने के लिए कहा जा रहा है। इस पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा डीएमके की मुख्य विचाराधारा विरोधी पार्टी है। वह राज्यों में क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने पर लगी हुई है। सांसद का साफ कहना है कि कांग्रेस और डीएमके के बीच अभी तक सबकुछ ठीक नहीं हुआ है और अगर होता भी है तो उसमें भी काफी समय लग जाएगा। डीएमके का इंडिया अलायंस से अलग होना, सांसद ने इसे इंडिया अलायंस के लिए बड़ा झटका बताया।

क्या है बंगाल-केरल मॉडल?

दरअसल, बंगाल और केरल में कांग्रेस और रीजनल पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर रहती है, लेकिन नेशनल लेवल पर ये तमाम दल इंडिया गठबंधन का ही हिस्सा हैं। जहां पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी और कांग्रेस लंबे समय से एक-दूसरे के खिलाफ हैं और चुनाव लड़ती रही है तो यही हालत केरल में भी है। केरल में कांग्रेस की लीडरशिप वाले यूडीएफ और लेफ्ट की लीडरशिप वाले एलडीएफ के बीच सत्ता को लेकर टकराव होता है। विधानसभा चुनाव के दौरान ये दल एक-दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी करते हैं, लेकिन जब मामला राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का आता है, तो ये सभी पार्टियां कांग्रेस के साथ आकर भाजपा का विरोध करती हैं। इसी मॉडल के तहत डीएमके और टीवीके के विजय, दोनों को इंडिया अलायंस का हिस्सा बनाए जाने की कवायद हो रही है। हालांकि, डीएमके ने फॉर्मूला मानने से इनकार कर दिया है।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

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