होटल के लिफ्ट में क्या हुआ था उस रात? 2013 में मचा था ‘तहलका’, अब तरुण तेजपाल दोषी करार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'तहलका' के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराया है। इस दौरान HC ने निचली अदालत के बरी किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया है।

खोजी पत्रकारिता के लिए देशभर में अपनी पहचान बनाने वाली मैगजीन 'तहलका' के फाउंडर और पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को रेप मामले में दोषी करार दिया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2013 के दुष्कर्म मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। निचली अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद तेजपाल ने खुद को प्रताड़ना का शिकार बताया और सजा सुनाने में नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि वह दो बेटियों के पिता हैं। इससे पहले हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर ने तेजपाल को रेप मामले में दोषी करार दिया। अब तरुण तेजपाल को कम से कम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
क्या हुआ था उस रात?
यह मामला नवंबर 2013 का है। 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक 5-स्टार होटल में तहलका मैगजीन का एक हाई-प्रोफाइल सालाना कार्यक्रम 'थिंक फेस्ट' कार्यक्रम चल रहा था। इसमें दुनिया भर से नामचीन हस्तियां शामिल हुई थीं। इसी बीच तरुण तेजपाल ने अपनी एक कलीग के साथ होटल के लिफ्ट में जबदस्ती की। पीड़िता उस समय तहलका में ही एक जूनियर महिला पत्रकार के रूप में कार्यरत थी। उसने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट के अंदर तरुण तेजपाल ने उनके साथ 2 बार जबरदस्ती की और यौन उत्पीड़न किया।
मीडिया जगत में मचा था हड़कंप
घटना के कुछ दिनों बाद पीड़िता ने संस्थान की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ईमेल भेजकर पूरी आपबीती बताई। मामला सामने आते ही मीडिया जगत में हड़कंप मच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके बाद तरुण तेजपाल ने पीड़िता को एक ईमेल भेजा। इसमें उन्होंने अपने इस व्यवहार को एक ‘गलती’ माना और माफी मांगी। तेजपाल ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 महीने के लिए 'तहलका' के एडिटर इन चीफ पद से हटने का भी ऐलान किया।
हालांकि पीड़िता ने आरोप लगाए कि एक संस्था के प्रमुख के पद पर बैठकर इसे केवल निजी गलती बताकर दबाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच 22 नवंबर 2013 को गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तेजपाल के खिलाफ रेप और गैर-जमानती धाराओं में FIR दर्ज की। 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। करीब 8 महीने तक गोवा की जेल में बंद रहने के बाद जुलाई 2014 में तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली गई।
निचली अदालत ने कर दिया था बरी
लंबी सुनवाई के बाद मई 2021 में गोवा की सेशंस कोर्ट ने तरुण तेजपाल को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता के व्यवहार पर सवाल उठाए थे और कहा था कि घटना के बाद पीड़िता का आचरण वैसा नहीं था जैसा एक यौन उत्पीड़न की पीड़िता का होना चाहिए। इस फैसले की देश भर में कड़ी आलोचना हुई थी, जिसके बाद गोवा सरकार तुरंत बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची। अब हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला पलट दिया है। कोर्ट ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) यानी महिला से दुष्कर्म, धारा 354(ए), यौन उत्पीड़न और धारा 354(बी), महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग के तहत दोषी ठहराया है।


