Explainer: क्या है रोटेशन सिस्टम? अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण में जिसका किया विरोध, बिल में क्या प्रावधान
मान लीजिए आज किसी शहर की विधानसभा या लोकसभा सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है तो अगली बार जब परिसीमन होगा, तब महिलाओं के लिए आरक्षित वह सीट सामान्य हो सकती है और किसी दूसरे क्षेत्र की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जा सकती है।

Rotation System: लोकसभा में गुरुवार (16 अप्रैल) महिला आरक्षण से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करना और महिला आरक्षण को 2029 से जल्द लागू करना है। यह विधेयक परिसीमन, नई जनगणना के आंकड़ों का उपयोग और महिला आरक्षण कानून में संशोधनों से जुड़ा है। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने बिल में प्रावधान किए गए रोटेशन सिस्टम (Rotation System) का विरोध किया।
उन्होंने इसे "भाजपा की चालबाजी" बताते हुए कहा कि यह परिसीमन और जनगणना के बिना लागू करने का एक षड्यंत्र है। यादव ने सीधे-सीधे केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार परिसीमन का इस्तेमाल देश के चुनावी नक्शे को बदलने के लिए कर रही है। उन्होंने रोटेशन के खिलाफ रुख अपनाते हुए कहा कि यह प्रणाली सही नहीं है और इसका उपयोग महिलाओं को आगे लाने के बजाय सीटों में हेरफेर के लिए किया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी व्यवस्था से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने दोहराया, “हम सीटों के रोटेशन के खिलाफ हैं। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। सबसे पहले जनगणना होनी चाहिए।” लगे हाथ उन्होंने आरक्षण के भीतर ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए कोटे में कोटा की भी मांग की। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या है रोटेशन सिस्टम जिसका सपा प्रमुख ने प्रमुखता से विरोध किया है।
क्या होता है रोटेशन सिस्टम?
दरअसल, रोटेशन सिस्टम से मतलब एक ऐसी व्यव्स्था से है, जिसमें किसी खास समुदाय या वर्ग के लिए आरक्षित सीटों यानी निर्वाचन क्षेत्रों को परिसीमन के बाद हर बार बदल दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी एक सीट हमेशा के लिए किसी खास समुदाय या वर्ग के लिए आरक्षित न रहे, बल्कि अवसरों की भी समान वितरण होता रहे। फिलहाल यह व्यवस्था अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों (Constituency) में लागू है, जो परिसीमन के बाद बदला जाता रहा है।
131वें संविधान संशोधन विधेयक में क्या प्रावधान
संसद में पेश मौजूदा 131वें संविधान संशोधन विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि लोक सभा या किसी राज्य की विधान सभा या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधान सभा या केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधान सभा और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की विधान सभा में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के बीच रोटेशन के आधार पर आवंटित की जाएँगी।
हर अगली परिसीमन प्रक्रिया में सीटों में रोटेशन
विधेयक के प्रावधान में आगे कहा गया है कि लोक सभा, किसी राज्य की विधान सभा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधान सभा में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का रोटेशन, हर अगली परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होगा, जैसा कि संसद कानून बनाकर तय करेगा। यानी महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें फिक्स नहीं होंगी। वे हर परिसीमन प्रक्रिया के बाद अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेट होती रहेंगी, ताकि कोई एक निर्वाचन क्षेत्र हमेशा के लिए सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित न हो जाए। अखिलेश यादव ने इसी व्यवस्था और प्रावधान का विरोध किया है।
जो आरक्षित, वो अगली बार हो सकती है सामान्य सीट
अब इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आज किसी शहर की विधानसभा या लोकसभा सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है तो अगली बार जब परिसीमन होगा, तब महिलाओं के लिए आरक्षित वह सीट सामान्य हो सकती है और किसी दूसरे क्षेत्र की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जा सकती है। इसे सरल भाषा में कहें तो महिलाओं के लिए आरक्षण घूम-घूमकर अलग-अलग सीटों पर लागू होगा, ताकि सभी क्षेत्रों की महिलाओं को समान अवसर मिल सके। बता दें कि परिसीमन के दौरान सीटों की सीमाएं बदलने के साथ-साथ यह तय किया जाता है कि कौन सी सीट आरक्षित होगी, जो आमतौर पर 10 साल बाद (जनगणना के बाद) होता है। मौजूदा प्रस्तावित महिला आरक्षण के तहत भी हर परिसीमन के बाद 1/3 सीटों को रोटेशन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


