पूरी तरह चालू हुआ न्योमा एयरबेस, चीन सीमा के पास गरजेंगे भारत के फाइटर जेट; IAF की बढ़ी ताकत

पूरी तरह चालू हुआ न्योमा एयरबेस, चीन सीमा के पास गरजेंगे भारत के फाइटर जेट; IAF की बढ़ी ताकत

संक्षेप:

न्योमा एयरबेस का संचालन शुरू होना भारत के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र चीन की सीमा के करीब है और यहां से वायुसेना को निगरानी, आपूर्ति और आपात अभियानों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलेगी।

Nov 12, 2025 08:31 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, लेह
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पूर्वी लद्दाख के रणनीतिक महत्व वाले न्योमा एयरबेस को भारतीय वायुसेना ने पूरी तरह चालू कर दिया है। 13700 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह दुनिया का सबसे ऊंचा फाइटर एयरबेस अब फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर्स और ट्रांसपोर्ट विमानों के संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम हो गया है। चीन सीमा से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित इस एयरबेस के चालू होने से भारत की सीमा सुरक्षा में एक नया मजबूत किला तैयार हो गया है, जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर त्वरित प्रतिक्रिया और निगरानी को सक्षम बनाएगा। यह वही एयरबेस है जो पहले केवल एक कच्चे रनवे वाला लैंडिंग ग्राउंड था। पिछले वर्ष सीमा सड़क संगठन (BRO) ने यहां पक्का रनवे तैयार किया था और इस साल अक्टूबर तक सभी आवश्यक सहायक ढांचागत कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया था। अब वायुसेना इस बेस से विमान उड़ाने, लैंड कराने और सीमित रखरखाव कार्य करने में सक्षम है। सूत्रों के अनुसार न्योमा अब विमानों के संचालन और उनके ‘सस्टेन्ड’ रहने की क्षमता रखता है। सैन्य शब्दावली में ‘सस्टेन्ड’ का अर्थ है- ऐसे बेस की क्षमता, जहां विमान की मरम्मत, ईंधन भराई, रडार संचालन, मौसम की निगरानी और चालक दल के रहने की व्यवस्था मौजूद हो।

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सिंधु नदी के किनारे, 13700 फीट की ऊंचाई पर स्थित बेस

न्योमा एयरबेस लद्दाख की सिंधु नदी के किनारे समुद्र तल से 13700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह लेह से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, ऐसे में रखरखाव सुविधाओं को अत्यधिक ठंडे वातावरण में काम करने के अनुरूप तैयार किया गया है। यब बेस लंबे समय से भारतीय वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं का हिस्सा रहा है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद निष्क्रिय पड़े इस एयरस्ट्रिप को 2009 में फिर से सक्रिय किया गया था। तब से यहां सी-130जे सुपर हर्क्यूलिस, एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर्स जैसे एमआई-17, सीएच-47एफ चिनूक तथा एएच-64ई अपाचे का सफल संचालन हो चुका है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के दौरान।

2020 के तनाव के बाद सरकार ने 2021 में इसकी अपग्रेडेशन के लिए 220 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट हिमांक ने कठिन हिमालयी परिस्थितियों में यह काम पूरा किया। माइनस 20-40 डिग्री सेल्सियस की ठंड, कड़ाके की हवा और सीमित कामकाजी मौसम के बावजूद, 2.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट रनवे का निर्माण अक्टूबर 2024 तक 95 प्रतिशत पूरा हो गया था। नवंबर 2025 तक सभी सहायक सुविधाएं जैसे हैंगर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन, क्रैश बे, वॉच टावर्स और आवासीय व्यवस्था पूरी हो गईं। जुलाई 2025 में यह अनुमान लगाया गया था कि एयरबेस अक्टूबर तक चालू हो जाएगा, लेकिन वायुसेना ने इसे समय से पहले पूरी क्षमता के साथ सक्रिय कर दिया।

वायुसेना का चौथा सक्रिय बेस

यह लद्दाख में भारतीय वायुसेना का चौथा सक्रिय बेस बन गया है। फिलहाल लेह में एक प्रमुख एयरबेस पहले से संचालित है, जबकि कारगिल और थॉइस (जो सियाचिन बेस के रूप में जाना जाता है) में पूर्ण विकसित एयरस्ट्रिप्स मौजूद हैं। इसके अलावा, दौलत बेग ओल्डी (DBO) में एक कच्चा रनवे है, जहां विशेष अभियानों के लिए वायुसेना के विमान उतरते हैं।

न्योमा अब एक पूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग ग्राउंड के रूप में कार्य करेगा। यहां से राफेल और सुखोई-30एमकेआई जैसे फाइटर जेट्स रोटेशनल आधार पर तैनात किए जाएंगे। ऊंचाई के कारण जेट इंजनों को कम तापमान में स्टार्ट करने के लिए संशोधित किया गया है। यह एयरबेस लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ में सैनिकों की तैनाती, निगरानी और आपूर्ति के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।

चुशुल एयरस्ट्रिप का पुनरुद्धार कार्य भी जारी

रक्षा मंत्रालय अलग से चुशुल में एक निष्क्रिय एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) को भी पुनर्जीवित कर रहा है। चुशुल LAC से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भविष्य की योजना के तहत इस ALG को UAVs (मानवरहित विमान) और हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए विकसित किया जा रहा है। चुशुल का मौजूदा रनवे इतना लंबा है कि भारतीय वायुसेना के एयरबस C-295 और विशेष अभियान वाले C-130J विमान यहां उतर सकते हैं। चुशुल 14,000 फीट की ऊंचाई पर एक प्राकृतिक समतल भूभाग है। इसे आखिरी बार 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया था, जब भारतीय वायुसेना के सोवियत मूल के AN-12 विमान ने चंडीगढ़ से चुशुल तक AMX-13 टैंकों की टुकड़ी पहुंचाई थी।

ALG क्या होता है?

ALG यानी एडवांस लैंडिंग ग्राउंड सैन्य शब्दावली में ऐसे अस्थायी रनवे को कहा जाता है जो अग्रिम मोर्चे के पास कच्ची सतह पर तैयार किए जाते हैं। ऐसे रनवे पर विमान, हेलीकॉप्टर या ड्रोन उतरने के लिए एक सीमित दल तैनात किया जाता है। धीरे-धीरे इन स्थानों को बुनियादी ढांचे और रहने योग्य सुविधाओं से लैस किया जाता है।

रणनीतिक महत्व: LAC पर नया किला

न्योमा का स्थान इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। लेह और थोइस एयरबेस से 100 किलोमीटर दूर होने के मुकाबले यह LAC से मात्र 23-50 किलोमीटर दूर है। पांगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे पर स्थित होने से यहां का मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जो संचालन की विश्वसनीयता बढ़ाता है। यह एयरबेस अब यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स), ड्रोन स्वार्म लॉन्च और अटैक हेलीकॉप्टर्स जैसे एएलएच रुद्रा के लिए भी कमांड-एंड-कंट्रोल हब बनेगा।

2020 के स्टैंडऑफ के दौरान यहां से सैनिकों की तैनाती, खुफिया जानकारी संग्रह और लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान किया गया था। अब यह सी-17 ग्लोबमास्टर जैसी भारी ट्रांसपोर्ट मशीनों को भी संभाल सकेगा, जिससे LAC के पास आपूर्ति की गति दोगुनी हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास चीन की बढ़ती सीमा अवसंरचना के जवाब में भारत की हवाई शक्ति को मजबूत करेगा, साथ ही पाकिस्तान की उत्तरी सीमाओं पर नजर रखने में मदद करेगा।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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