
क्या होता है 'नेगेटिव G टर्न' जिससे रिकवर नहीं कर पाया तेजस, हो गया क्रैश; 2016 से शानदार रिकॉर्ड
तेजस हल्का, चपल, 4.5 जेनरेशन फाइटर है। सुपरसोनिक स्पीड, एडवांस्ड एवियोनिक्स इसे कमाल का विमान बनाते हैं। एयर शो में इसकी नेगेटिव G मैन्युवर दर्शकों को दीवाना बना रही थी। जानिए कैसे हुआ क्रैश?
आसमान में चमकते जेट की गरज और जमीन पर दर्शकों की तालियां। दुबई एयर शो 2025 का माहौल कुछ ऐसा ही था, जब दुनिया के सबसे बड़े विमान प्रदर्शन में भारत का गौरव, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस अपनी चपलता दिखाने उतरा। लेकिन अगले ही पल एक भयानक दुर्घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया। तेजस ने एक नेगेटिव G टर्न किया, रिकवर नहीं कर पाया और जमीन से टकराकर आग का गोला बन गया। पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की जान चली गई। पिछले करीब 10 सालों में भारतीय वायुसेना (IAF) के इस 'स्वदेशी सितारे' का यह दूसरा हादसा था, जो उसके शानदार सुरक्षा रिकॉर्ड पर एक गहरा सवालिया निशान लगा गया। यह कहानी सिर्फ एक क्रैश की नहीं है। यह है तेजस की सफलता, एक जोखिम भरे एयरोबैटिक मैन्युवर की जटिलता और एक बहादुर पायलट की कुर्बानी की।

दुबई एयर शो: जहां सपने हकीकत बनते हैं... और टूटते हैं
दुबई एयर शो हर दो साल में होता है, जो दुनिया के एविएशन जगत का 'ऑस्कर' है। 21 नवंबर 2025 को इसका आखिरी दिन था। अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हजारों दर्शक जुटे थे। एमिरेट्स और फ्लाई दुबई जैसे दिग्गजों ने अरबों डॉलर के सौदे किए, लेकिन दोपहर करीब 2:15 बजे लोकल टाइम सबकी नजरें तेजस पर टिक गईं।
तेजस 2016 से भारतीय वायुसेना की सेवा में है। यह विमान तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस की 45वीं स्क्वाड्रन से आया था। यह जेट MiG-21 के रिटायरमेंट के बाद IAF का नया 'वर्कहॉर्स' बन चुका है। प्रदर्शन शुरू हुआ- लूप, रोल्स, हाई-स्पीड टर्न्स। दर्शक मंत्रमुग्ध थे। लेकिन एक लूप के बाद, जेट ने नेगेटिव G टर्न की कोशिश की। वीडियो फुटेज से साफ दिखता है: जेट अचानक ऊंचाई खोने लगा, रिकवर नहीं कर पाया और तेज रफ्तार से जमीन की ओर गोता लगा लिया। धमाके के साथ आग लग गई, काला धुआं आसमान छू गया।
वायुसेना ने तुरंत बयान जारी किया- आईएएफ का एक तेजस विमान दुबई एयर शो के दौरान हादसे का शिकार हो गया। पायलट की मौत हो गई। हम जान गंवाने पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और परिवार के साथ खड़े हैं। मौके पर मौजूद एक दर्शक मनोज कुमार तुटेजा ने ANI को बताया- यह नेगेटिव G मैन्युवर कर रहा था... ऊंचाई बहुत कम थी। रिकवर किया, लेकिन सीधा जमीन में घुस गया। भयानक आग का गोला बन गया। मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया।
नेगेटिव G टर्न: आसमान का 'डेडली डांस'
अब सवाल आता है कि आखिर नेगेटिव G टर्न क्या है? इसे समझना आसान है, लेकिन करना मुश्किल। G-फोर्स यानी गुरुत्वाकर्षण बल, जो उड़ान के दौरान पायलट और जेट पर पड़ता है। नॉर्मल उड़ान में 1G होता है- जैसे हम जमीन पर खड़े होते हैं। पॉजिटिव G (जैसे तेज टर्न या ऊपर चढ़ते समय) पायलट को सीट में दबाता है, खून पैरों की ओर जाता है, जिससे ब्लैकआउट हो सकता है। लेकिन नेगेटिव G उल्टा होता है- जेट नीचे की ओर तेजी से जाता है या उल्टा हो जाता है, यह पायलट को सीट से ऊपर की ओर उछाल देता है। खून सिर की ओर बहता है, जिससे 'रेडआउट' (लाल धब्बे दिखना) या 'G-LOC' हो सकता है। इंसान -2 से -3G तक ही सहन कर पाता है। G-LOC का मतलब- ग्रेविटी-इंड्यूस्ड लॉस ऑफ कॉन्शियसनेस है। यह तब होता है जब किसी व्यक्ति को अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बेहोशी आ जाती है, जिससे मस्तिष्क में खून का प्रवाह कम हो जाता है। यह लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलटों के लिए एक गंभीर खतरा है।
दुबई एयर शो में नेगेटिव G टर्न तेजस की खासियत रही। यह जेट डिजाइन ही ऐसा है कि लूप के बाद उल्टा होकर तेजी से नीचे आता है, फिर रिकवर करता है। लेकिन ऊंचाई कम हो तो? सेकंड्स ही मिलते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हादसे के वक्त ऊंचाई बहुत कम थी। लूप खत्म होते ही नेगेटिव G फेज में जेट स्टेबल नहीं रहा। पायलट को डिसोरिएंटेशन हुआ, या कंट्रोल लॉस हो गया। असली हकीकत ब्लैक बॉक्स के डाटा से ही पता चलेगी। एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पायलट्स को नेगेटिव G हैंडल करने की ट्रेनिंग दी जाती है- सांस रोकना, मसल्स टाइट करना। लेकिन लो-ऑल्टीट्यूड पर कोई भी गलती घातक हो सकती है।
तेजस: 2016 से शानदार रिकॉर्ड
तेजस कोई साधारण जेट नहीं। HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) का यह 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट 2001 में पहली उड़ान भर चुका था। 2016 में IAF में शामिल हुआ। 24 सालों में सिर्फ दो क्रैश- यह रिकॉर्ड MiG-21 जैसे पुराने जेट्स से कहीं बेहतर है। पहला क्रैश मार्च 2024 में जैसलमेर के पास ट्राई-सर्विस एक्सरसाइज के दौरान हुआ, जहां पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया।
तेजस हल्का, चपल, 4.5 जेनरेशन फाइटर है। सुपरसोनिक स्पीड, एडवांस्ड एवियोनिक्स इसे कमाल का विमान बनाते हैं। एयर शो में इसकी नेगेटिव G मैन्युवर दर्शकों को दीवाना बना देती। लेकिन दुबई हादसे ने इसके फैन्स को निराश किया। फिलहाल, IAF ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ऑर्डर की है- ब्लैक बॉक्स, ATC रिकॉर्डिंग, फ्लाइट डेटा चेक होगा। एक्सपर्ट्स कहते हैं, नेगेटिव G के अलावा इंजन स्टॉल या कंट्रोल फेलियर भी हो सकता है।
यह क्रैश सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि एक सबक है। एयर शो में जोखिम हमेशा रहता है- F-16 से लेकर सुखोई तक, कई जेट्स ऐसे ही गिरे। लेकिन तेजस का रिकॉर्ड साफ कहता है: यह विश्वसनीय है। जांच से सच्चाई सामने आएगी- क्या ट्रेनिंग गैप? क्या डिजाइन इश्यू? या महज दुर्भाग्य?





