Explainer: क्या है NASM-SR मिसाइल? पहली बार DRDO और नेवी ने किया सफल परीक्षण, समंदर में कांपेंगे दुश्मन!

Pramod Praveen पीटीआई, चांदीपुर (ओडिशा)
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NASM SR missile Salvo Launch: ये मिसाइलें DRDO द्वारा विकसित भारत की पहली स्वदेशी, हवा से दागी जाने वाली कम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल है। यह 55 किमी की रेंज के साथ हेलीकॉप्टरों से दुश्मन के युद्धपोतों को सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम हैं।

क्या है NASM-SR मिसाइल? पहली बार DRDO और नेवी ने किया सफल परीक्षण, समंदर में कांपेंगे दुश्मन!

NASM SR missile Salvo Launch: भारत की समुद्री आक्रमण क्षमताओं को बढ़ावा देते हुए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने बुधवार को कम दूरी की पोत विध्वंसक मिसाइल प्रणाली यानी Naval Anti-Ship Missile-Short Range (NASM-SR) का पहला सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह 'सॉल्वो लॉन्च' था। 'साल्वो लॉन्च' का अर्थ एक ही लॉन्चर से कुछ ही सेकंड के भीतर कई मिसाइल तेजी से और लगातार दागे जाने से है। दुश्मन की रक्षा प्रणाली को ध्वस्त करने के लिए डिजाइन की गई यह रणनीति उच्च सटीकता वाले, एक के बाद एक हमले सुनिश्चित करती है।

यह परीक्षण ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट से दूर नौसेना के हेलीकॉप्टर के जरिए किया किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, नौसेना, भारतीय वायुसेना और परियोजना में शामिल उद्योग भागीदारों को बधाई दी है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''परीक्षण के दौरान, एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइल तेजी से दागी गईं, जिससे यह हवा से दागी जाने वाली पोत विध्वंसक मिसाइल प्रणाली का पहला सामूहिक प्रक्षेपण बन गया।''

दुश्मन खा जाएगा चकमा

इसने कहा कि चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) द्वारा तैनात रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली और टेलीमेट्री जैसे विभिन्न 'रेंज ट्रैकिंग' उपकरणों का उपयोग करके प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सभी परीक्षण उद्देश्यों को पूरी तरह से प्राप्त कर लिया गया। सॉल्वो लॉन्च की वजह से दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम चकमा खा जाएगा क्योंकि एक मिसाइल को तो वह रोक सकता है, लेकिन जब एक साथ 2-3 मिसाइलें आएंगी तो उसे चकमा देना आसान नहीं रह जाएगा। ऐसे में दुश्मन का टारगेट नष्ट करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।

क्या है NASM-SR मिसाइल?

NASM-SR मिसाइलें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित भारत की पहली स्वदेशी, हवा से दागी जाने वाली कम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल है। यह 55 किमी की रेंज के साथ हेलीकॉप्टरों से दुश्मन के युद्धपोतों को सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है, जो समुद्र की सतह के बहुत करीब उड़ती है। ये मिसाइल विशेष रूप से नौसेना के हेलीकॉप्टरों से छोड़े जाने के लिए बनाई गई है।

NASM-SR मिसाइल की खूबियां क्या?

इसमें स्वदेशी 'इमेजिंग इन्फ्रा-रेड' (IIR) सीकर का उपयोग किया गया है, जो रडार से छिपकर दुश्मन के जहाज को टारगेट करता है। यह 0.8 मैक (ध्वनि की गति से थोड़ा कम) की गति से चलती है और 100 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल 55 किमी तक की दूरी पर दुश्मन के जहाज को मार सकती है। सका वजन करीब 385 किलो है जिसे हेलिकॉप्टर से आसानी से ले जाया जा सकता है। इसमें 100 किलो का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड लगा है, जो बड़े-बड़े जहाजों को भी डुबो सकता है।

समंदर में दुश्मन देश इससे कांपेंगे

यही वजह है कि समंदर में दुश्मन देश भी इससे कांपेंगे। यह समुद्र की सतह से सिर्फ 5 मीटर ऊपर उड़ सकती है, जिससे इसे दुश्मन के रडार द्वारा ट्रैक करना बहुत मुश्किल होता है। भारतीय नौ सेना अभी तक एंटी-शिप मिसाइलों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थी लेकिन NASM-SR के आने से नौ सेना को स्वदेशी विकल्प मिल गया है। इसे सीकिंग और MH-60R जैसे नौसेना के हेलिकॉप्टरों से दागा जा सकेगा। यह मिसाइल छोटे युद्धपोत, गश्ती नौकाओं और दुश्मन के सप्लाई जहाजों के खिलाफ बहुत कारगर है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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