Explainer: क्या है MLFF मॉडल? जिसे लागू करने जा रही सरकार; अगले साल से हाई-वे पर खत्म हो जाएंगे टोल प्लाजा!
MLFF मॉडल के बारे में गडकरी ने कहा कि ऐसे सिस्टम का मतलब है कि रास्ते में कोई टोल प्लाजा नहीं होगा और कोई भी गाड़ी नहीं रोकेगा। इसका उद्देश्य ईंधन की खपत और टोल प्लाजा के ऑपरेशन और रखरखाव खर्च को कम करना भी है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि बहुत जल्द देशभर में हाई-वे पर टॉल प्लाजा से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि भारत पूरी तरह से डिजिटल और बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये नई व्यवस्था अगले साल फरवरी-मार्च 2027 तक पूरे देश में लागू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या है MLFF मॉडल?
MLFF टोलिंग एक बैरियर-फ्री इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो गाड़ियों की पहचान करने और उनसे टोल वसूलने के लिए ओवरहेड गैंट्री का इस्तेमाल करता है। इसमें गाड़ियों को सामान्य गति से गुजरते समय रुकने या धीमा होने की जरूरत नहीं पड़ती। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद टोल कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रोकने या उसकी स्पीड कम करने की प्रक्रिया को रोकना है। ताकि इससे ईंधन की खपत और टोल प्लाज़ा से जुड़े ऑपरेशनल खर्च को कम किया जा सके।
नई दिल्ली में हो चुका सफल प्रयोग
मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में गडकरी ने कहा, "हम एक साल में अपने सभी टोल को MLFF मॉडल पर लाना चाहते हैं। मैंने अधिकारियों को इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। मुझे विश्वास है कि साल के अंत तक 60% से 70% काम पूरा हो जाएगा। फरवरी-मार्च तक, पूरे देश में बैरियर-फ्री टोल प्लाज़ा सिस्टम लागू हो जाएगा।" बता दें कि इससे पहले गडकरी मई में दिल्ली की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाज़ा पर देश के पहले बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन कर चुके हैं। अब यही व्यवस्था सभी हाई वे पर लागू की जाएगी।
नए सिस्टम से बचेंगे 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये
MLFF मॉडल के बारे में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहा कि ऐसे सिस्टम का मतलब है कि रास्ते में कोई टोल प्लाजा नहीं होगा और कोई भी गाड़ी को नहीं रोकेगा। उन्होंने कहा, "इसका मतलब ईंधन की खपत और टोल प्लाजा के ऑपरेशन और रखरखाव के खर्च को कम करना भी है।" गडकरी ने कहा कि अभी टोल प्लाजा का ऑपरेशनल खर्च 12% से 15% के बीच है, जिसके बैरियर-फ्री टोलिंग मॉडल के देश भर में लागू होने के बाद 2% से 4% तक होने की उम्मीद है। इससे सालाना 6,000 करोड़ से 7,000 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिलेगी।
टोल पर अब न करना होगा इंतजार, न स्पीड कम
गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम FASTag ने इंतजार के समय को काफी कम करके और टोल प्लाज़ा पर कैश पेमेंट और छुट्टे पैसे की जरूरत को खत्म करके सिस्टम को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि गाड़ियों को टोल प्लाज़ा पर बिल्कुल भी न रुकना पड़े। उन्होंने कहा कि पहले इंतज़ार का समय 12 मिनट था, जो कुछ जगहों पर 30 मिनट तक बढ़ जाता था। गडकरी ने कहा कि हर टोल प्लाजा पर इंतजार के समय को समझने के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया गया है। उन्होंने ने कहा, “इसमें 80% से 90% तक सुधार हुआ है, लेकिन मैं चाहता हूँ कि इसमें और सुधार हो ताकि किसी को भी टोल प्लाजा पर इंतजार न करना पड़े।”
हर साल लगभग 71 करोड़ घंटे समय की बचत
गडकरी ने कहा कि टोल प्लाजा पर इंतजार का समय कम होने से हर साल लगभग 71 करोड़ घंटे और 56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होती है, जिससे ईंधन की कीमत में लगभग ₹5,250 करोड़ की बचत होगी। उन्होंने कहा, “यात्रियों के बचे हुए समय की आर्थिक कीमत सालाना ₹68,500 करोड़ आंकी गई है। यह लोगों के लिए बहुत बड़ा फ़ायदा है।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि FASTag के ज़्यादा इस्तेमाल और डिजिटल टोलिंग की ओर बढ़ने से सरकार को सालाना ₹20,000 करोड़ से ₹25,000 करोड़ का फायदा हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर आप FASTag से पहले और बाद के सिस्टम की तुलना करें, तो अकेले हमारे विभाग को ही सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ से ₹25,000 करोड़ का फायदा हो रहा है।”


