Explainer: क्या है MLFF मॉडल? जिसे लागू करने जा रही सरकार; अगले साल से हाई-वे पर खत्म हो जाएंगे टोल प्लाजा!

हिन्दुस्तान टाइम्स, फैसल मलिक, मुंबई
Follow us on Google News
share

MLFF मॉडल के बारे में गडकरी ने कहा कि ऐसे सिस्टम का मतलब है कि रास्ते में कोई टोल प्लाजा नहीं होगा और कोई भी गाड़ी नहीं रोकेगा। इसका उद्देश्य ईंधन की खपत और टोल प्लाजा के ऑपरेशन और रखरखाव खर्च को कम करना भी है।

Union Road Transport and Highways Minister Nitin Gadkari during the Global Fintech Fest 2026, in Mumbai
मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि बहुत जल्द देशभर में हाई-वे पर टॉल प्लाजा से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि भारत पूरी तरह से डिजिटल और बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये नई व्यवस्था अगले साल फरवरी-मार्च 2027 तक पूरे देश में लागू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा।

क्या है MLFF मॉडल?

MLFF टोलिंग एक बैरियर-फ्री इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो गाड़ियों की पहचान करने और उनसे टोल वसूलने के लिए ओवरहेड गैंट्री का इस्तेमाल करता है। इसमें गाड़ियों को सामान्य गति से गुजरते समय रुकने या धीमा होने की जरूरत नहीं पड़ती। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद टोल कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रोकने या उसकी स्पीड कम करने की प्रक्रिया को रोकना है। ताकि इससे ईंधन की खपत और टोल प्लाज़ा से जुड़े ऑपरेशनल खर्च को कम किया जा सके।

नई दिल्ली में हो चुका सफल प्रयोग

मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में गडकरी ने कहा, "हम एक साल में अपने सभी टोल को MLFF मॉडल पर लाना चाहते हैं। मैंने अधिकारियों को इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। मुझे विश्वास है कि साल के अंत तक 60% से 70% काम पूरा हो जाएगा। फरवरी-मार्च तक, पूरे देश में बैरियर-फ्री टोल प्लाज़ा सिस्टम लागू हो जाएगा।" बता दें कि इससे पहले गडकरी मई में दिल्ली की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाज़ा पर देश के पहले बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन कर चुके हैं। अब यही व्यवस्था सभी हाई वे पर लागू की जाएगी।

नए सिस्टम से बचेंगे 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये

MLFF मॉडल के बारे में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहा कि ऐसे सिस्टम का मतलब है कि रास्ते में कोई टोल प्लाजा नहीं होगा और कोई भी गाड़ी को नहीं रोकेगा। उन्होंने कहा, "इसका मतलब ईंधन की खपत और टोल प्लाजा के ऑपरेशन और रखरखाव के खर्च को कम करना भी है।" गडकरी ने कहा कि अभी टोल प्लाजा का ऑपरेशनल खर्च 12% से 15% के बीच है, जिसके बैरियर-फ्री टोलिंग मॉडल के देश भर में लागू होने के बाद 2% से 4% तक होने की उम्मीद है। इससे सालाना 6,000 करोड़ से 7,000 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिलेगी।

टोल पर अब न करना होगा इंतजार, न स्पीड कम

गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम FASTag ने इंतजार के समय को काफी कम करके और टोल प्लाज़ा पर कैश पेमेंट और छुट्टे पैसे की जरूरत को खत्म करके सिस्टम को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि गाड़ियों को टोल प्लाज़ा पर बिल्कुल भी न रुकना पड़े। उन्होंने कहा कि पहले इंतज़ार का समय 12 मिनट था, जो कुछ जगहों पर 30 मिनट तक बढ़ जाता था। गडकरी ने कहा कि हर टोल प्लाजा पर इंतजार के समय को समझने के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया गया है। उन्होंने ने कहा, “इसमें 80% से 90% तक सुधार हुआ है, लेकिन मैं चाहता हूँ कि इसमें और सुधार हो ताकि किसी को भी टोल प्लाजा पर इंतजार न करना पड़े।”

हर साल लगभग 71 करोड़ घंटे समय की बचत

गडकरी ने कहा कि टोल प्लाजा पर इंतजार का समय कम होने से हर साल लगभग 71 करोड़ घंटे और 56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होती है, जिससे ईंधन की कीमत में लगभग ₹5,250 करोड़ की बचत होगी। उन्होंने कहा, “यात्रियों के बचे हुए समय की आर्थिक कीमत सालाना ₹68,500 करोड़ आंकी गई है। यह लोगों के लिए बहुत बड़ा फ़ायदा है।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि FASTag के ज़्यादा इस्तेमाल और डिजिटल टोलिंग की ओर बढ़ने से सरकार को सालाना ₹20,000 करोड़ से ₹25,000 करोड़ का फायदा हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर आप FASTag से पहले और बाद के सिस्टम की तुलना करें, तो अकेले हमारे विभाग को ही सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ से ₹25,000 करोड़ का फायदा हो रहा है।”

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव , CJP Protest Live और Navratri 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candidates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsIndia Newsक्या है MLFF मॉडल? जिसे लागू करने जा रही सरकार; हाई-वे पर खत्म होंगे टोल प्लाजा