EXPLAINER: क्या है भारत और नेपाल का 210 साल पुराना लिपुलेख विवाद, ब्रिटेन की क्यों होने लगी चर्चा?

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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कैलास मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग लिपुलेख दर्रे से होकर जाता है। यह भारत के हिस्से में आता है। हालांकि नेपाल लंबे समय  से इलको लेकर अपना दावा  ठोकता रहता है। अब नेपाली पीएम बालेन शाह ने यूके से मध्यस्थता कराने की मांग रख दी है।  

क्या है भारत और नेपाल का 210 साल पुराना लिपुलेख विवाद, ब्रिटेन की क्यों होने लगी चर्चा?

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के संसद में दिए गए बयान के बाद भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे का विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। बालेन शाह ने कहा था कि अंग्रेजी राज से चले आ रहे विवादों को वह यूके के सामने उठाएंगे। हालिया मामला भारत और चीन की ओर से किए गए 2026 कैलास मानसरोवर यात्रा से जुड़ा हुआ है। कैलास मानसरोवर की यात्रा के दो रास्तों में से एक उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से भी होकर गुजरता है। भारत और चीन में समझौते के मुताबिक दोनों देश मिलकर इस यात्रा को पूरा करवाते हैं। वहीं नेपाल लिपुलेख पर अपना दावा ठोक रहा है।

210 साल पुराना है विवाद

लिपुलेख दर्रे का विवाद कोई नया नहीं है। यह 1816 से ही चला आ रहा है। दरअसल यह दर्रा भारत, चीन और नेपाल की सीमा के पास स्थित है। यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत के पुरांग से जोड़ता है। इस रास्ते से लंबे समय से चीन और भारत के बीच व्यापार भी होता रहा है। इसके अलावा कैलास मानसरोवर की यात्रा के लिए इस दर्रे के उपयोग किया जाता है।

काली नदी के उद्गम को लेकर है विवाद

इस दर्रे को लेकर विवाद भी काली नदी के उद्गम को लेकर है। भारत का कहना है कि यह लिपुलेख के पास से निकलती है। जबकि नेपाल कहता है कि इसका उद्गम लिम्पियाधुरा के पास है। 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक यही नदी भारत और नेपाल के बीच सीमा है। वहीं 1865 में किए गए बदलाव के बाद सीमा को लिपुलेख के पास शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में लिपुलेख का इलाका भारत के हिस्से में आ गया। भारत और नेपाल एक दूसरे के साथ लगभग 1751 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं।

उत्तराखंड में धारचूला को लिपुलेख दर्रे से जोड़ने वाली सड़क का उद्घाटन होने के बाद 2020 में कालापानी क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ गया था। नेपाल ने एक मैप जारी किया था जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी उसने अपने क्षेत्र में दिखा दिया था। भारत का यही कहना है कि जो भी सीमा विवाद है उसको बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह यूके की मध्यस्थता की बात करने लगे हैं।

बता दें कि 1954 से ही कैलास मानसरोवर की यात्रा के लिए लिपुलेख एक पारंपरिक मार्ग है। यह भारतीय प्रशासन के ही अधीन रहा है। भारत और चीन के बीच युद्ध के बाद भारत ने अपने मौजूदगी यहां और मजबूत की। 2015 में भारत ने लिपुलेख को व्यापार मार्ग बनाने का फैसला किया था। तब भी नेपाल ने विरोध जताया था। भारत जब भी यहां कोई निर्माण करता है तो नेपाल इसका विरोध करता है। हालांकि भारत के पास लिपुलेश को लेकर ऐतिहासिक प्रमाण हैं।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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