रिटायर होते ही मेजर जनरल 'अरेस्ट'! भर्ती घोटाले में सेना की बड़ी कार्रवाई; 10 लाख तक लेते थे घूस
सेना भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना ने कपूरथला SSC के पूर्व प्रमुख मेजर जनरल और कई अफसरों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 10 लाख तक घूस लेने के इस मामले में CBI ने 23 लोगों पर FIR दर्ज की।

भारतीय सेना ने कपूरथला स्थित सर्विस सिलेक्शन सेंटर (SSC) में ऑफिसर उम्मीदवारों के चयन में कथित तौर पर घूस लेने के आरोप में एक मेजर जनरल और कई अन्य सैन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई यानी कोर्ट मार्शल शुरू किया है। जानकारी के मुताबिक, उम्मीदवारों को पास कराने के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई थी।
रिटायरमेंट के आखिरी दिन मेजर जनरल पर एक्शन
ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सेंटर के प्रमुख रहे मेजर जनरल पर रविवार को आर्मी एक्ट की धारा 123 लागू की गई, क्योंकि रविवार को उनकी सर्विस का आखिरी दिन था। यह धारा सेना को यह विशेष अधिकार देती है कि वह सैन्य सेवा के दौरान किसी अपराध के आरोपी रिटायर्ड या सेवा से कार्यमुक्त हो चुके कर्मियों को वापस बुला सके, ताकि उनके खिलाफ कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही की जा सके।
रडार पर 20 से अधिक अफसर
इसी महीने मेजर जनरल को हेडक्वार्टर 'दिल्ली एरिया' से अटैच किया गया था, जबकि करीब 20 अन्य अधिकारियों को भी अलग-अलग फॉर्मेशन से अटैच किया गया है। इनमें से कुछ अफसर रिटायर भी हो चुके हैं।
मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की शुरुआती जांच में ही यह बात सामने आ गई थी कि उम्मीदवारों के चयन के लिए अधिकारी 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की अवैध रकम ले रहे हैं।
इसके बाद सेना मुख्यालय के 'एडिशनल डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ डिसिप्लिन एंड विजिलेंस' ने 2021 में इस घोटाले की विस्तृत जांच के लिए सीबीआई (CBI) का रुख किया था।
30 ठिकानों पर हुई थी छापेमारी, 23 लोगों पर FIR
मामला हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने इस केस के सिलसिले में पूरे भारत में 30 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। जिन शहरों में छापेमारी की गई थी, उनमें दिल्ली, कपूरथला, बठिंडा, कैथल, पलवल, लखनऊ, बरेली, गोरखपुर, विशाखापत्तनम, जयपुर, गुवाहाटी और जोरहाट शामिल थे। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) में सेना के अधिकारियों सहित कुल 23 लोगों को नामजद किया गया था।
कैसे करते थे पूरा खेल?
यह पूरा घोटाला मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों को पास कराने के इर्द-गिर्द बुना गया था, जिन्हें मेडिकल ग्राउंड पर अस्थायी रूप से अनफिट बताकर रिजेक्ट कर दिया गया था। ऐसे उम्मीदवारों को फर्जी तरीके से 'रिव्यू मेडिकल बोर्ड' के जरिए पास करा दिया जाता था। इस पूरे खेल में शामिल एक जवान विशेष तौर पर ऐसे रिजेक्टेड उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करता था, ताकि बाद में उनसे घूस के लिए आसानी से संपर्क किया जा सके।
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