Explainer: भारत के रहम पर पाकिस्तान की 90 फीसदी आबादी, समझिए 66 साल पुराने समझौते पर इतना क्यों रो रहा PAK
भारत ने बीते साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह साफ कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता। भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है और कहा है कि पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं मिलेगा।

बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से मिली करारी हार को पाकिस्तान अब तक नहीं भूला होगा। इस संघर्ष के दौरान भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान के कायराना हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया था, बल्कि यह भी दिखा दिया था कि भारत आतंकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस की रणनीति अपनाएगा। भारत ने यह भी साफ किया कि दोनों देशों के बीच खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते और इसके साथ ही भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया। अब एक साल बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान इसे लेकर अब तक रो रहा है। कभी अपने लोगों के सामने, तो कभी संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर, पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को दोबारा लागू करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। लेकिन आखिर 66 साल पुराने समझौते में ऐसा क्या है, जिससे पाकिस्तान की सांसें अटकी हुई है?
पहले जानते हैं कि सिंधु जल समझौता एक बार फिर चर्चा में क्यों है। दरअसल बीते एक महीने के अंदर पाकिस्तान कई बार समझौते का जिक्र कर चुका है। हाल ही में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर कहा है कि वह सिंधु जल संधि के कथित उल्लंघन को लेकर भारत के खिलाफ संज्ञान ले। डार ने यूएनएससी की अध्यक्ष को अप्रैल में भी ऐसा ही एक पत्र लिखा था।
इधर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने खुलेआम धमकी दी है कि अगर इस्लामाबाद को लगा कि उसके राष्ट्रीय हितों को खतरा है, तो इससे युद्ध भी छिड़ सकता है। ख्वाजा आसिफ ने एक स्थानीय मीडिया आउटलेट को दिए इंटरव्यू में भारत को लेकर बेहद आक्रामक तेवर दिखाए। रक्षा मंत्री आसिफ ने कहा, "जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है, और पानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का ही एक हिस्सा है, हम भारत के साथ युद्ध में उतर जाएंगे।"
एक बूंद पानी नहीं देगा भारत
पाकिस्तान की यह छटपटाहट भारत से मिले एक तगड़े झटके के बाद देखने को मिली है। भारत ने बीते दिनों साफ किया है कि देश सिंधु जल संधि को खत्म करने की दिशा में तेजी आगे बढ़ रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने 5 जून को साफ कह दिया था कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। वहीं इसके कुछ ही दिनों बाद भारत के जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सरकार का रुख और कड़ा करते हुए कहा कि भारत सरकार यह सुनिश्चित करने पर काम कर रही है कि पाकिस्तान को जाने वाला सिंधु का पानी रुक जाए और आने वाले सालों में पाकिस्तान को पानी की एक भी बूंद न मिले।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु घाटी की नदियों के पानी का बंटवारा होता है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत 3 पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को मिला था। वहीं 3 पूर्वी नदियों, रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत के हिस्से में आया था। हालांकि भारत को इन तीन पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल करने का अधिकार था। बीते साल जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की बेरहमी से जान ले ली। इसके बाद भारत ने उस समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
इतना क्यों रो रहा पाकिस्तान?
वॉशिंगटन के थिंक टैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' (CSIS) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिंधुबके पानी पर पाकिस्तान की निर्भरता जीवन और मरण जैसी है। हर 10 में से 9 पाकिस्तानी नागरिक इसी सिंधु घाटी क्षेत्र में रहते हैं। वहीं पाकिस्तान की 90 फीसदी से अधिक फसलों की सिंचाई इसी पानी से होती है। इसके अलावा, पाकिस्तान के सभी 21 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट इसी बेसिन में स्थित हैं, जिससे देश की अधिकांश बिजली पैदा होती है।
सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक टेनेओ के दक्षिण एशिया सलाहकार अर्पित चतुर्वेदी का कहना है कि IMF के बेलआउट पैकेज पर चल रही पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए ये नदियां मुख्य स्तंभ हैं। वहीं। भारत को पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने के लिए पानी पूरी तरह रोकने की भी जरूरत नहीं है। भारत अगर सिर्फ पश्चिमी नदियों पर बने अपने बांधों से पानी छोड़ेने के समय में थोड़ा भी बदलाव कर दे, तो बुआई के सीजन में पाकिस्तान के खेत बाढ़ में डूब सकते हैं। सिंचाई के मुख्य सीजन में पानी रोकने से पाकिस्तान में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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