Hindi NewsIndia NewsWhat is Indian EU gambit on Republic Day? Why caused stir among ISI and Khalistani organizations
गणतंत्र दिवस पर भारत का EU दांव क्या? जिससे ISI और खालिस्तानी संगठनों में मच गई खलबली

गणतंत्र दिवस पर भारत का EU दांव क्या? जिससे ISI और खालिस्तानी संगठनों में मच गई खलबली

संक्षेप:

गणतंत्र दिवस के अगले दिन 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन होगा। इसमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA),रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

Jan 23, 2026 06:33 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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77वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार यूरोपीय संघ (EU) की ऐतिहासिक भागीदारी होने जा रही है। एक तरफ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर इस राष्ट्रीय समारोह के मुख्य अतिथि होंगी, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में EU का एक विशेष दस्ता मार्च करेगा। यही बात पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और खालिस्तानी संगठनों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और वैश्विक पटल पर भारत और यूरोप के बढ़ते भरोसे का प्रतीक होगा।

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खालिस्तानी संगठनों में क्यों बढ़ी बेचैनी?

राजपथ (कर्तव्य पथ) पर होने वाली परेड में यूरोपीय संघ के चार ध्वजवाहक, दो जिप्सी वाहनों पर सवार होकर मार्च पास्ट में हिस्सा लेंगे। खुफिया सूत्रों के अनुसार, “EU नेतृत्व की मौजूदगी यह दिखाती है कि यूरोप अब भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है, न कि अलगाववादी एजेंडों को।” न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि यूरोपीय देशों को यह भी बताया गया है कि कई तथाकथित खालिस्तानी संगठन हिंसक आतंकी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि EU अब इन समूहों को यूरोप की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा मानने लगा है।

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भारत-EU शिखर सम्मेलन भी अहम

गणतंत्र दिवस के अगले दिन 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन होगा। इसमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA),रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। सूत्रों ने कहा, "खालिस्तानी समूहों के लिए यह नुकसानदायक है क्योंकि यूरोप अलगाववादी विचारों को जगह देने के बजाय भारत के साथ रणनीतिक तालमेल को प्राथमिकता दे रहा है।" उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल ही में कहा था कि भारत-EU FTA लगभग अंतिम चरण में है। इसके लागू होने से 2 अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा और यह वैश्विक GDP का लगभग 25% हिस्सा होगा। उन्होंने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” तक बताया।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले क्रोएशिया की राजधानी ज़ाग्रेब में भारतीय दूतावास पर तोड़फोड़ की गई है। भारतीय एजेंसियों ने जांच में पाया कि विदेशी फंडिंग, चैरिटी नेटवर्क, हवाला और डिजिटल ट्रांसफर के जरिए पंजाब में आतंकी मॉड्यूल्स को समर्थन दिया जा रहा था। ये सबूत विदेशी सरकारों के साथ साझा किए गए हैं और वे इससे काफी हद तक संतुष्ट हैं।

Republic Day EU Masterstroke

NIA की जांच और चार्जशीट

इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 2025 में कई बड़े मामलों में चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें विदेशों में बैठे खालिस्तानी नेटवर्क और पाकिस्तान से जुड़े तार सामने आए हैं। इन हालिया प्रगतियों को देख खालिस्तानी नेटवर्क में खलबली है। कुल मिलाकर देखें तो EU के बड़े नेताओं की गणतंत्र दिवस पर मौजूदगी सिर्फ एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख, भारत-यूरोप की बढ़ती नजदीकी और अलगाववादी ताकतों के लिए सख्त संदेश है। यही वजह है कि यह कदम खालिस्तानी संगठनों और ISI को असहज कर रहा है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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