दल-बदल कानून क्या है? TMC के बागियों का NCPI में विलय, कहीं उलटा न पड़ जाए

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मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि क्या किसी दल के केवल दो-तिहाई विधायक या सांसद अपने स्तर पर विलय का फैसला ले सकते हैं, या इसके लिए मूल राजनीतिक दल की मंजूरी आवश्यक है। संविधान की 10वीं अनुसूची यहां अहम है।

दल-बदल कानून क्या है? TMC के बागियों का NCPI में विलय, कहीं उलटा न पड़ जाए

त्रिणमूल कांग्रेस के 20 विद्रोही सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सूचित किया कि वे एक ऐसे दल में विलय हो गए हैं जिसके देश में कहीं भी कोई सीट नहीं है। यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तिदार और सुखेंदु रे समेत कई प्रमुख नेता टीएमसी नेतृत्व से नाराजगी जताते हुए इस कदम में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी के संसदीय दल में विद्रोह उभरा। यह कदम एंटी-डिफेक्शन कानून को टालने के लिए उठाया गया है। कुछ सप्ताह पहले आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों ने राज्यसभा में इसी तरह का प्रयास किया था। इस घटना से कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

भारत में एंटी-डिफेक्शन कानून 1985 में 52वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से दसवीं अनुसूची के रूप में लागू हुआ। यह 'आया राम गया राम' की संस्कृति को रोकने के लिए लाया गया था। कानून के अनुसार, कोई विधायक अगर अपनी पार्टी की सदस्यता त्याग दे या सदन में पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट दे तो अयोग्य ठहराया जा सकता है। शुरू में ऐसा प्रावधान था जिसमें एक-तिहाई सदस्य अलग होकर बच सकते थे, लेकिन 2003 के 91वें संशोधन से इसे हटा दिया गया। अब केवल मर्जर का एक अपवाद बचा है। पैराग्राफ 4 के तहत मूल राजनीतिक दल का दूसरे दल में विलय और उस दल के कम से कम दो-तिहाई विधायकों की सहमति जरूरी है।

विद्रोहियों का दावा और नया दल

टीएमसी के विद्रोहियों में पूर्व चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तिदार, पूर्व फ्लोर लीडर सुदीप बंदोपाध्याय, शताब्दी रे, दीपक अधिकारी, जून मलिया, यूसुफ पठान, प्रसून बनर्जी और सायोनी घोष जैसे नेता शामिल हैं। 19 सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को व्यक्तिगत रूप से पत्र सौंपे जबकि एक ने मलेशिया से सहमति भेजी। उन्होंने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा किया, जो 2022 में रजिस्टर्ड एक छोटा दल है और 2023 के बाद कोई चुनाव नहीं जीता। भाजपा सांसदों के अनुसार, इस दल को पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर का प्रतीकात्मक जुड़ाव बनाए रखने के लिए चुना गया। अगर स्वीकार किया गया तो टीएमसी की लोकसभा ताकत 28 से घटकर 8 रह जाएगी।

कानूनी बहस और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

मुख्य विवाद यह है कि क्या विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य अकेले विलय का फैसला कर सकते हैं या मूल राजनीतिक दल की सहमति जरूरी है। 10वीं अनुसूची ओरिजिनल पॉलिटिकल पार्टी का जिक्र करती है, न कि केवल विधायी विंग का। 2023 के महाराष्ट्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधायी दल राजनीतिक दल से स्वतंत्र नहीं हो सकता। बंबई हाईकोर्ट ने गोवा मामले में दो-तिहाई विधायकों के आधार पर विलय मंजूर किया था, जो फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती प्राप्त है। टीएमसी ने स्पीकर को पत्र लिखकर दावा किया कि स्प्लिट अब वैध नहीं है और विद्रोही स्वतंत्र रूप से विलय नहीं कर सकते। कपिल सिब्बल ने भी यही राय दी।

नतीजा और भविष्य की स्थिति

अगर विलय मंजूर होता है तो एनडीए की लोकसभा संख्या 294 से बढ़कर 314 हो जाएगी। स्पीकर ओम बिरला हस्ताक्षरों की जांच के बाद फैसला लेंगे। तब तक विद्रोही टीएमसी के सदस्य बने रहेंगे और व्हिप का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त अयोग्यता का सामना कर सकते हैं। यह मामला कानून की कमजोरी को उजागर करता है जहां मर्जर अपवाद संगठित दलबदली का रास्ता बन गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस पर निर्भर करेगा कि पैराग्राफ 4 को कैसे पढ़ा जाए। टीएमसी नेतृत्व अदालत जाने की तैयारी कर रहा है। यह घटना भारतीय राजनीति में स्थिरता और नैतिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

Niteesh Kumar

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Niteesh Kumar

पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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