Putin India Visit: पुतिन की यात्रा से पहले तीन देशों के दूतों ने ये क्या लिख डाला? भड़का भारत- हमें ये स्वीकार नहीं है
Putin India Visit: पुतिन की भारत यात्रा से पहले लिखे इस लेख को लेकर पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे खुले मंच पर किया गया प्रचार बताते हुए कहा कि यह बहुत ही तीखा लेख है जो कूटनीतिक मानदंडों का उल्लंघन करता है।
Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कल यानी 4 दिसंबर को दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं। उनके भारत आगमन से ठीक पहले एक कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के शीर्ष राजनयिकों द्वारा 1 दिसंबर को एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित संयुक्त लेख ने नई दिल्ली को नाराज कर दिया है। इस लेख में यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया गया और राष्ट्रपति पुतिन पर मानव जीवन के प्रति पूर्ण उपेक्षा का आरोप लगाया गया।

भारत ने बताया ‘अस्वीकार्य और असामान्य’
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने तीनों दूतों के इस कदम को अस्वीकार्य और असामान्य करार दिया। अधिकारियों के अनुसार- यह बहुत असामान्य है। तीसरे देशों के संबंधों पर सार्वजनिक सलाह देना स्वीकार्य कूटनीतिक प्रथा नहीं है। हमने इस पर संज्ञान लिया है।
यह लेख ब्रिटेन की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन, फ्रांसीसी राजदूत थिएरी माथू और जर्मन राजदूत फिलिप एकरमन द्वारा लिखा गया था। ‘दुनिया चाहती है कि यूक्रेन युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन रूस शांति को लेकर गंभीर नहीं लगता’ शीर्षक वाले इस लेख में रूस पर युद्ध की शुरुआत करने का आरोप लगाया गया और कहा गया कि रूस की सैन्य कार्रवाई पूर्ण क्रूरता के साथ युद्ध छेड़ने की सुनियोजित रणनीति है।
लेख में यह भी कहा गया कि रूस साइबर हमलों और दुष्प्रचार के माध्यम से वैश्विक स्तर पर दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को अंजाम दे रहा है, जो यह दर्शाता है कि रूसी नेतृत्व की क्षेत्रीय विस्तार और वैश्विक अस्थिरता की लालसा यूक्रेन से कहीं आगे तक जाती है। दूतों ने पुतिन पर आरोप लगाया कि वे शांति वार्ता में देरी करते हैं और गंभीर बातचीत से बचते हैं।
‘कूटनीतिक मर्यादा का उल्लंघन’- कंवल सिब्बल
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी इस लेख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे खुले मंच पर किया गया प्रचार बताते हुए कहा कि यह बहुत ही तीखा लेख है जो कूटनीतिक मानदंडों का उल्लंघन करता है। सिब्बल ने कहा- यह हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है, क्योंकि इसका उद्देश्य भारत में यूरोपीय समर्थक समूहों में रूस-विरोधी भावना जगाना और रूस के साथ हमारे संबंधों की नैतिकता पर प्रश्न उठाना है। उन्होंने MEA से आग्रह किया कि वह तीनों दूतों की इस कार्रवाई पर सार्वजनिक रूप से असंतोष जताए।
भारत आ रहे पुतिन
राष्ट्रपति पुतिन बृहस्पतिवार से भारत की दो दिवसीय यात्रा करेंगे और इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। इस बैठक से व्यापार और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में ऐसे महत्वपूर्ण परिणाम मिलने की उम्मीद है, जो द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मोदी-पुतिन वार्ता में यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा उठने की संभावना है। उन्होंने भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं किया जा सकता तथा बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका द्वारा संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों के संदर्भ में, भारत किसी भी ऐसे कदम का समर्थन करता है, जो लड़ाई रोकने और स्थायी शांति की दिशा में ले जाए।





