शी जिनपिंग दिल्ली आए तो साथ क्या-क्या लाए? चीन से पहले ही आ गया चलता-फिरता 'किला'
शी जिनपिंग BRICS समिट में हिस्सा लेने भारत पहुंच गए हैं। चीनी राष्ट्रपति के साथ खास सुरक्षा टीम और Hongqi N701 आर्मर्ड कार भी आई है। जानिए दिल्ली में जिनपिंग की सुरक्षा के लिए चीन और भारत ने पहले से क्या-क्या तैयारियां की हैं।

नई दिल्ली में BRICS समिट शुरू हो चुका है और शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत पहुंच गए। जिनपिंग का विमान पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरा। करीब सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति के इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात भी होने वाली है।
लेकिन जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली में कई दिन पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। चीन की अपनी सुरक्षा टीम पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी थी। होटल से लेकर सड़क और एयरपोर्ट से लेकर भारत मंडपम तक हर मूवमेंट के लिए अलग प्लान तैयार किया गया। और सबसे ज्यादा चर्चा उस कार की है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति दिल्ली में सफर कर रहे हैं।
पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरे शी जिनपिंग
शी जिनपिंग शनिवार, 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचे। वह BRICS के 18वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS समिट के लिए आमंत्रित किया था।
जिनपिंग की यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण भारत और चीन के रिश्तों में तनाव रहा है। अब दोनों देशों के बीच रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिशों के बीच जिनपिंग का दिल्ली आना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिनपिंग की कार भी अपने साथ आई
विदेशी राष्ट्राध्यक्ष जब भारत आते हैं तो उनके लिए सुरक्षा का इंतजाम सिर्फ मेजबान देश नहीं करता। कई बार राष्ट्राध्यक्ष अपनी खास गाड़ियां और सुरक्षा उपकरण भी साथ लेकर आते हैं।
शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे में भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है। उनके लिए चीन की खास Hongqi N701 आर्मर्ड लिमोजिन चर्चा में है। यह सामान्य लग्जरी कार नहीं है, बल्कि चीन के शीर्ष नेतृत्व के लिए तैयार की गई विशेष सुरक्षा कार है।
Hongqi N701 को चीन के शीर्ष नेतृत्व की आधिकारिक कार के तौर पर देखा जाता है। इसकी सबसे खास बात इसका सुरक्षा कवच है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें मजबूत आर्मर, बुलेटप्रूफ ग्लास और बुलेटप्रूफ टायर जैसे फीचर हैं। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि राष्ट्रपति को बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में भी सुरक्षा मिल सके।
यानी दिल्ली की सड़कों पर जिनपिंग जिस कार में दिखाई देंगे, वह सिर्फ उनके आने-जाने का साधन नहीं होगी। वह चीन के राष्ट्रपति के लिए चलता-फिरता सुरक्षा कवच होगी।
किस विमान से आए जिनपिंग, साथ में और किसे लाए?
शी जिनपिंग 12 सितंबर को विशेष विमान से नई दिल्ली पहुंचे हैं। चीन के राष्ट्रपति विदेश दौरों के लिए आम तौर पर Air China के Boeing 747-8 का इस्तेमाल करते हैं; इसे सामान्य यात्री विमान की तरह नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की जरूरतों के मुताबिक विशेष रूप से तैयार किया जाता है और इसमें संचार व सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त इंतजाम होते हैं। हालांकि विमान की पूरी सुरक्षा तकनीक सार्वजनिक नहीं की जाती। जिनपिंग अकेले भारत नहीं आए हैं। चीन के आधिकारिक विदेश मंत्रालय के मुताबिक उनके साथ कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और केंद्रीय कार्यालय के निदेशक कै क्यूई तथा पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी भी आए हैं। इसके अलावा, चीन का एक बड़ा व्यापारी मंडल भी आया है।
चीन की सुरक्षा टीम पहले ही दिल्ली पहुंच गई थी
जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने से पहले ही चीन की विशेष सुरक्षा टीम राजधानी में पहुंच चुकी थी। सुरक्षा अधिकारियों ने उस होटल और आसपास के इलाके का जायजा लिया, जहां चीनी राष्ट्रपति के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेशी नेताओं की सुरक्षा के लिए उनकी अपनी सुरक्षा टीमों के साथ भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी काम कर रही हैं। चीनी सुरक्षा अधिकारियों के पास अपने आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी हैं।
जिनपिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दी गई है। उनके होटल में भी सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया है। राष्ट्रपति के ठहरने वाली मंजिल से लेकर होटल की छत और ग्राउंड फ्लोर तक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। होटल कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया गया है।
होटल से लेकर सड़क तक हर कदम पर नजर
जिनपिंग जहां ठहरेंगे, वहां सुरक्षा को सिर्फ होटल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा गया है। होटल से बाहर निकलने के बाद जिस रास्ते से उनका काफिला गुजरेगा, उस पूरे रूट पर भी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
एयरपोर्ट से होटल और फिर होटल से भारत मंडपम तक उनके संभावित रूट को पहले ही तय किया गया। इन रूट पर सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए रिहर्सल भी की गई।
BRICS में शामिल होने वाले दूसरे बड़े नेताओं के लिए भी इसी तरह व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली को अलग-अलग सुरक्षा सेक्टर में बांटकर निगरानी की जा रही है।
जिनपिंग के होटल के ऊपर भी खास निगरानी
राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा में सबसे बड़ा खतरा सिर्फ जमीन से नहीं माना जाता। इसलिए उनके होटल के आसपास और ऊपर के हवाई क्षेत्र पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक जिनपिंग के करीब 24 घंटे के भारत दौरे के दौरान उनके होटल के ऊपर अस्थायी नो-फ्लाई जोन और संभावित CBRN यानी रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों को लेकर विशेष जांच जैसे उपाय किए गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर दिल्ली में किस स्तर की तैयारी की गई है।
दिल्ली में 15 हजार पुलिसकर्मी, 200 पैरामिलिट्री कंपनियां
जिनपिंग की सुरक्षा अकेले चीन की टीम के भरोसे नहीं है। BRICS समिट के लिए दिल्ली में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी बड़ा इंतजाम किया है। करीब 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों और 200 पैरामिलिट्री कंपनियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा 500 से ज्यादा CCTV कैमरों और फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। भारत मंडपम और विदेशी मेहमानों के होटलों में एंटी-सबोटाज चेकिंग के लिए 100 से ज्यादा दिल्ली पुलिस K9 यानी स्निफर डॉग भी तैनात किए गए हैं।
सड़क पर निकलेगा तो काफिला भी खास होगा
शी जिनपिंग जैसे राष्ट्राध्यक्ष का काफिला आम वीआईपी काफिले से काफी अलग होता है। इसमें मुख्य कार के साथ सुरक्षा वाहन, संचार व्यवस्था, पुलिस एस्कॉर्ट और दूसरे सपोर्ट वाहन शामिल होते हैं। भारत में BRICS के दौरान जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफिलों को सबसे बड़े मोटरकेड में रखा गया है। दोनों देशों की सुरक्षा टीमें पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी थीं और संबंधित होटलों में सुरक्षा तैयारियों में शामिल थीं।
आखिर इतनी सुरक्षा क्यों?
शी जिनपिंग सिर्फ चीन के राष्ट्रपति नहीं हैं। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वोच्च नेता और देश की सैन्य व्यवस्था के शीर्ष नेतृत्व से भी जुड़े हैं। इसलिए उनकी विदेश यात्रा में सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद सख्त होता है।
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा को लेकर तनाव भी रहा है। हालांकि हाल के समय में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिशें हुई हैं और दोनों पक्ष बातचीत बढ़ा रहे हैं। ऐसे में जिनपिंग का भारत आना सुरक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस बार दिल्ली में BRICS के लिए जो सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है, उसमें भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की अपनी सुरक्षा टीमों के बीच तालमेल सबसे अहम है।


