

पेपर लीक के खिलाफ भूख हड़ताल करने वाले सोनम वांगचुक ने आंदोलन के दौरान वायरल हुए गाली वाले वीडियोज पर भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि वह इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन सरकार को भी सोचना चाहिए कि युवा इतना हताश क्यों हो गया है। साथ ही वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के राजनीति से दूर रहने के फैसले का भी समर्थन किया है।
इंडिया टुडे से बातचीत में वांगचुक से आंदोलन के दौरान लगाए गए आपत्तिजनक नारों को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने राजनेताओं के खिलाफ इस तरह की भाषा के उपयोग को गलत बताया है। उन्होंने कहा, 'मैं अपशब्दों के इस्तेमाल को बिल्कुल भी सही नहीं मानता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन सरकार के लिए यह बड़ा संकेत है कि हमारा युवा किस हद तक हताश हो चुका है।'
उन्होंने कहा, 'अगर मैं प्रधानमंत्री की जगह होता, तो पहले मैं खुद से कहता कि मैंने इन लोगों में गुस्सा भड़काने के लिए कितना गलत बर्ताव किया है।' उन्होंने कहा, 'संदेश को समझो। उसे लेकर आने वाले दूत को मत मारो।' उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा करने वाले तत्वों के खिलाफ कानूनी ऐक्शन होना चाहिए, लेकिन असली छात्रों को नाराजगी जाहिर करने के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'अगर वो एक राजनीतिक दल बनता है, तो वो किसी के खिलाफ और कुछ के पक्ष में हो जाएंगे। राजनीतिक से दूर प्रेशर ग्रुप की तरह रहने से कमजोरों को आवाज मिलेगी।' उन्होंने कहा कि लोग बाद में राजनीति में जा सकते हैं, लेकिन इस मंच को राजनीतिक दलों से दूर रहकर जनता का भरोसा पाना होगा।
वांगचुक ने साफ कर दिया है कि वह हर छात्र आंदोलन का चेहरा नहीं बनेंगे। चैनल से बातचीत में उनसे झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर भी सवाल किया गया था। पूछा गया था कि क्या वह छात्रों के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए यात्रा करेंगे। इसपर उन्होंने कहा, 'मैं ऐसा नहीं बनना चाहता। मैं चाहता हूं कि सभी लोग अपनी जगहों पर खुद हीरो बने।'
हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि वह शिक्षा और पर्यावरण के मुद्दे पर मुहिमों में समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने कहा, 'शिक्षा और पर्यावरण ऐसे विषय हैं, जो मेरे दिल के बेहद करीब हैं...। अगर इन दो विषयों पर कोई आवाज उठा रहा है, तो मैं उनका समर्थन करना चाहूंगा।'
निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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