
सनातन धर्म में…; हुमायूं कबीर ने गीता पाठ को लेकर क्या कहा, कर दिया नया ऐलान
पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों के साधुओं और साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता पाठ में हिस्सा लिया था। यह आयोजन बाबरी मस्जिद की नींव रखे जाने के एक दिन बाद हुआ था।
पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद विधायक हुमायूं कबीर कुरान पाठ के आयोजन की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वह सनातन धर्म का सम्मान करते हैं। रविवार को कोलकाता में बड़े स्तर पर गीता पाठ का आयोजन किया गया था। इसके अलावा उन्होंने 22 दिसंबर को नए राजनीतिक दल की घोषणा की भी तैयारी की है।
बुधवार को एएनआई से बातचीत में कबीर से कोलकाता में हुए गीता पाठ को लेकर सवाल किया गया था। इसपर उन्होंने कहा, 'सनातन धर्म के लोगों ने गीता पाठ किया। उनका मैं बहुत सम्मान करता हूं। उनमें मेरी बहुत श्रद्धा है।' उन्होंने कहा, '...मैं 1 लाख लोगों के साथ कुरान पाठ कराऊंगा। इसमें बंगाल के 90 हजार और पूरे भारत से अलग-अलग राज्यों से 10 हजार, एक लाख लोगों को कुरान पाठ कराऊंगा।'
उन्होंने कहा, 'उसके 2 दिन के बाद बाबरी मस्जिद का काम धूमधाम से शुरू करेंगे।' उन्होंने बताया कि जिस जगह बाबरी मस्जिद बनाया जाना है, वहीं पंडाल और शामियाना लगाकर पाठ करेंगे।
कबीर ने रविवार को कहा था कि वह फरवरी में एक लाख लोगों के साथ ‘कुरान ख्वानी’ (कुरान का पाठ करना) का आयोजन करेंगे। उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में पत्रकारों से कहा था, 'मैं फरवरी में एक लाख लोगों के साथ ‘कुरान ख्वानी’ का आयोजन करूंगा।'
गीता पाठ
पीटीआई भाषा के अनुसार, पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों के साधुओं और साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता पाठ में हिस्सा लिया था। आयोजकों के हवाले से बताया गया कि लगभग एक लाख लोग धर्मग्रंथ के प्रथम, नौवें और अठारहवें अध्याय के सामूहिक पाठ में शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी और विधायक अग्निमित्रा पॉल सहित वरिष्ठ भाजपा नेता आयोजन में मौजूद थे। कार्तिक महाराज के नाम से जाने जाने वाले स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज तथा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं के साथ-साथ कई मठों के साधु भी इसमें शामिल हुए।





