
कोई अपराध नहीं, लेकिन...; हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद की नींव रखे जाने पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री
साधुओं और साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता पाठ में हिस्सा लिया था। कार्तिक महाराज के नाम से जाने जाने वाले स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज तथा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं के साथ मठों के साधु भी इसमें शामिल हुए।
TMC यानी तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की तरफ से बाबरी मस्जिद का शिलान्यास चर्चा का विषय बना हुआ है। 6 दिसंबर को उन्होंने नींव रख दी है। इसी बीच बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि किसी की श्रद्धा है, तो वह अपनी आस्था को मान सकता है। साथ ही उन्होंने कहा है कि भगवान राम पर टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी।
रविवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शास्त्री से मस्जिद की नींव रखे जाने को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा, 'देखिए अगर ऐसी किसी की कोई श्रद्धा है, तो वह अपनी अपनी श्रद्धा से आस्था को मान सकता है। इसमें कोई दोष या अपराध नहीं है। लेकिन हमारे राम पर टिप्पणी कोई नहीं कर सकता...।' साथ ही उन्होंने मंदिर पर टिप्पणी करने वालों को चुनौती दी है।
इससे पहले उन्होंने कहा था, 'कोलकाता, पश्चिम बंगाल की इस भूमि पर एक साथ 5 लाख लोगों ने गीता पाठ किया। ये लोगों का उत्साह, ये आस्था सैलाब। मानो कोलकाता में महाकुंभ लग गया हो। हम पश्चिम बंगाल के लोगों, कोलकाता के लोगों और भारतवासियों को साधुवाद दे रहे हैं। सनातन एकता ही इस विश्व का, इस विश्व शांति का सबसे बड़ा माध्यम है।' उन्होंने कहा, 'भारत में हम तनातनी नहीं, सनातनी चाहते हैं।'
गीता पाठ हुआ
पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों के साधुओं और साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता पाठ में हिस्सा लिया था। भगवा वस्त्र पहने साधुओं ने आयोजन स्थल पर गीता की प्रतियों से एक स्वर में श्लोक पढ़े, जबकि बजरंगबली और भगवान राम की तस्वीरों वाले भगवा झंडे आयोजन स्थल पर लहरा रहे थे।
केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी और विधायक अग्निमित्रा पॉल सहित वरिष्ठ भाजपा नेता आयोजन में मौजूद थे।
कार्तिक महाराज के नाम से जाने जाने वाले स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज तथा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं के साथ-साथ विभिन्न मठों के साधु भी इसमें शामिल हुए थे।





